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रावण की ससुराल जोधपुर में बना है उसका मंदिर, दशहरे पर यहां छाया रहता है मातम

Ravan Temple: मान्यता है कि रावण की ससुराल जोधपुर में है. रावण की पत्नी महारानी मंदोदरी जोधपुर के मंडोर के राजा की पुत् ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

गोदा गोत्र के श्रीमाली ब्राह्मण खुद को रावण का वंशज और मंडोर को उसकी ससुराल मानते हैं.
फिलहाल जोधपुर में गोदा गोत्र के 100 से ज्यादा और फलोदी में 60 से अधिक परिवार रहते हैं.

रिपोर्ट : मुकुल परिहार

जोधपुर. दशहरे पर देशभर में असत्य पर सत्य और पाप पर पुण्य की जीत के प्रतीक के रूप में रावण दहन कर दशहरा मनाया जाता है. लेकिन जोधपुर में खुद को रावण का वंशज बताने वाले श्रीमाली ब्राह्मण समाज के लोग लंकापति रावण के मंदिर में शोक मनाने के साथ ही यज्ञोपवित संस्कार व पूजन करते हैं.

मान्यता है कि रावण की ससुराल जोधपुर में है. रावण की पत्नी महारानी मंदोदरी जोधपुर के मंडोर के राजा की पुत्री थी. लंका से जब रावण बारात लेकर जोधपुर के मंडोर आए थे, तब उनके साथ बारात में गोदा गोत्र के श्रीमाली ब्राह्मण भी यहां आए थे. शादी के बाद रावण तो मंदोदरी को लेकर लंका लौट गए लेकिन गोदा गोत्र के श्रीमाली ब्राह्मण जोधपुर में ही रह गए. तब से लेकर आज तक वे यहां दशानन की पूजा और आराधना करते हैं. आलम ये है कि यह समाज दशहरे को शोक के रूप में मनाते हैं, साथ ही रावण दहन भी नहीं देखते.

श्रीमाली ब्राह्मण खुद को मानते हैं रावण का वंशज

गोदा गोत्र के श्रीमाली ब्राह्मण समाज के लोग खुद को रावण के वंशज और मंडोर को रावण की ससुराल मानते है. जोधपुर में इस गोत्र के करीब 100 से ज्यादा और फलोदी में 60 से अधिक परिवार रहते हैं.

यहां है रावण का मंदिर

2008 में जोधपुर के श्रीमाली ब्राह्मणों ने मेहरानगढ़ की तलहटी में रावण के मंदिर का निर्माण करवाया था. यहां रावण और मंदोदरी की शिव की पूजा करते हुए विशाल प्रतिमा स्थापित की गई. वर्तमान में भी मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है और रावण के वंशज की यहां हर रोज पूजा करते हैं.

श्राद्ध पक्ष में करते है रावण का तर्पण

गोदा गोत्र के श्रीमाली ब्राह्मण रावण की विशेष पूजा करते आ रहे हैं. ये रावण दहन के दिन शोक मनाते हैं. यहां तक कि गोदा गोत्र के ब्रह्माण श्राद्ध पक्ष में दशमी पर रावण का श्राद्ध, तर्पण भी करते हैं. अपनों के निधन के बाद जिस तरह स्नान कर यज्ञोपवीत (जनेऊ) बदला जाता है उसी तरह दशहरे पर रावण दहन के बाद इस समाज के लोग तालाब-सरोवर में स्नान कर यज्ञोपवीत भी बदलते हैं.

नहीं होता यहां रावण दहन

जोधपुर के किला रोड स्थित नवग्रह मंदिर में लंकापति रावण का मंदिर बना है. जहां शिव की पूजा करते दशानन रावण कि मूर्ति है. लंकापति रावण महादेव के परम भक्त थे. इसलिए यहां शिव रावण के मंदिर के सामने ही मंदोदरी का मंदिर भी बनवाया गया है. जोधपुर के रावण मंदिर के करीब 500 मीटर के दायरे में रावण दहन नहीं किया जाता है, न ही यहां के कोई लोग रावण दहन देखने जाते हैं. यहां के लोगों का कहना है कि भले ही रावण को बुराई का प्रतीक माना जाए, लेकिन उनके पूर्वजों ने रावण की पूजा की है. रावण बहुत विद्वान और संगीतज्ञ थे। ऐसे में वे भी रावण की पूजा करते चले आएंगे.

वंशज की रावण में आस्था

खुद को रावण का वंशज मानने वाले रावण के मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित कमलेश कुमार दवे का कहना है कि वह गोदा गोत्र के श्रीमाली ब्राह्मण समाज के हैं और रावण के वंशज भी हैं. जब रावण लंका से महारानी मंदोदरी से विवाह करने मंडोर आए, तब उनके पूर्वज भी दईजर की गुफा के रास्ते विवाह में सम्मिलित होने आए थे. विवाह के बाद लंकापति रावण पुष्पक विमान में मंदोदरी संग लंका लौट गए और उनके वंशज यहीं रह गए थे. तब से लेकर आज तक वह यहां रावण की आराधना व पूजा करते आ रहे हैं.

Tags: Dussehra Festival, Jodhpur News, Rajasthan news

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