हार्ट अटैक से मौत के बाद भी परिजनों को नहीं मिला शव, अंतिम संस्कार के लिए 35 घंटे से कर रहे इंतजार
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हार्ट अटैक से मौत के बाद भी परिजनों को नहीं मिला शव, अंतिम संस्कार के लिए 35 घंटे से कर रहे इंतजार
जोधपुर में मृतक के परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. (प्रतीकात्मक फोटो)

राजस्थान (Rajasthan) के जोधपुर (Jodhpur) में कोविड-19 (Covid-19) के कारण मरने वाले लोगों का अंतिम संस्कार परिजनों को नहीं करने दिया जा रहा है, लेकिन जो लोग इस बीमारी से नहीं मरे हैं, उनके अंतिम संस्कार भी दो 2 दिन तक नहीं हो पा रहे हैं.

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जोधपुर. राजस्थान (Rajasthan) के जोधपुर (Jodhpur) में कोविड-19 (Covid-19) के कारण मरने वाले लोगों का अंतिम संस्कार परिजनों को नहीं करने दिया जा रहा है, लेकिन जो लोग इस बीमारी से नहीं मरे हैं, उनके अंतिम संस्कार भी दो 2 दिन तक नहीं हो पा रहे हैं. चिकित्सा विभाग के ध्वस्त हो चुकी व्यवस्थाओं के कारण न तो दूसरी बीमारियों से मरने वाले लोगों की कोरोना जांच के नमूने समय पर लिए जा रहे हैं और न ही जांच की रिपोर्ट समय पर मिल पा रही है. ऐसे में दाह संस्कार नहीं हो पाने से मृतकों के परिजन 2 दिन से भूखे प्यासे विलाप करते बेहाल हो रहे हैं. इसको लेकर शिकायत भी की गई है.

केस नंबर-1: हार्ट अटैक से मौत
पाल रोड पर मेड़तिया गार्डन के पास रहने वाले 35 साल के गणपत भाटी पुत्र अमरचंद बीते शुक्रवार को तड़के करीब 3 बजे संभवतया हार्ट अटैक के कारण बाथरूम में गिर गए और बेहोश हो गए. परिजनों ने पास में रहने वाले एक कंपाउंडर को बुलाकर जांच कराई और उसके बाद मथुरादास माथुर लेकर गए। माथुर अस्पताल में गणपत पाटिल को मृत घोषित कर दिया गया. करीब 11 बजे शव को मोर्चरी में भिजवाया गया.

दोपहर एक बजे कोरोना जांच
जांच के लिए उनके स्वाब का नमूना लिया गया. इसके बाद शुक्रवार की शाम अंधेरा ढलने तक और शनिवार को दिनभर परिजन जांच रिपोर्ट का इंतजार करते रहे. डॉक्टरों से फरियाद करते रहे. आज शाम करीब 5 बजे चिकित्सा विभाग के एक कर्मचारी ने अपने मोबाइल फोन पर कथित रूप से रिपोर्ट देखकर कहा कि नेगेटिव रिपोर्ट है, आप शव ले जा सकते हैं. सूर्यास्त में कम समय रहने और इस दौरान तैयारियां होने की संभावना को नहीं देखते हुए परिजनों ने शव नहीं लिया. घर में जवान dh मौत हो जाने के बाद कल और आज 2 दिन से परिजनों के मुंह में अन्न का दाना भी नहीं गया है. परिजन रो-रोकर हलकान हो गए हैं. अब वे कल सुबह अंतिम संस्कार करेंगे.



केस नंबर-2: सीने में दर्द से मौत
पुराने शहर में राखी हाउस की गली में रहने वाले 60 साल के रामरतन मोदी को शनिवार की सुबह 9:30 बजे सीने में दर्द होने लगा और सांस लेने में दिक्कत होने लगी. परिजनों ने पास में ही रहने वाले एक डॉक्टर को बुलाया तो उसने जांच करने के बाद अस्पताल ले जाने की सलाह दी. परिजन उनको ऑटो रिक्शा में लेकर महात्मा गांधी अस्पताल गए। रास्ते बंद किए गए होने के कारण उनको नई सड़क होते हुए सोजती गेट से घूम कर गांधी अस्पताल जाना पड़ा. परिजनों के अनुसार रामरतन में नई सड़क पर ही अंतिम सांस ली थी. अस्पताल में ईसीजी की गई और रामरतन को मृत घोषित कर दिया गया.

बताया जा रहा है कि शनिवार को ही करीब 12:45 बजे कोरोनावायरस जांच के लिए उनके स्वाब का नमूना लिया गया. इसकी रिपोर्ट लेने के लिए रविवार की सुबह ही राम रतन के दोनों पुत्र राजेश और गौरव सुबह 8 बजे मेडिकल कॉलेज पहुंच गए. उनको 2 घंटे बाद रिपोर्ट देने के लिए कहा गया. 2 घंटे बीत जाने पर फिर 2 घंटे से रिपोर्ट देने का कह दिया गया. आखिर दोपहर 2 बजे रामरतन के परिचितों ने शहर विधायक मनीषा पवार को इस बारे में शिकायत की विधायक ने चिकित्सा अधिकारियों को फोन किया. इसके बाद करीब 3:45 बजे रामरतन का शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया, लेकिन रिपोर्ट नहीं दी गई. परिजनों ने कर्फ्यू इलाका होने के बावजूद आनन-फानन में सूरज डूबने से पहले दाह संस्कार शुरू कर दिया. बताया जा रहा है कि कल रात नमूनों की जांच को लेकर बड़ी गड़बड़ी हुई. परिजनों को बिना बताए मोर्चरी में रखे शवों से दोबारा नमूने लिए गए और जांच के लिए भिजवाए गए.

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