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जोधपुर: शादी के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 और लड़की के लिए 18 वर्ष क्यों ? HC ने सरकार से मांगा जवाब
Jodhpur News in Hindi

Chandra Shekhar Vyas | News18 Rajasthan
Updated: February 6, 2020, 7:23 PM IST
जोधपुर: शादी के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 और लड़की के लिए 18 वर्ष क्यों ? HC ने सरकार से मांगा जवाब
हाई कोर्ट की मुख्य पीठ ने याचिकाकर्ता के सभी तर्कों को स्वीकार करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर उनसे 6 सप्ताह में जवाब मांगा है.

संविधान में प्रदत्त लैंगिक समानता (Gender equality) के अधिकार का उल्लंघन करने के विषय को लेकर जोधपुर हाईकोर्ट (Jodhpur High Court) में एक जनहित याचिका (Public interest litigation) दायर की गई है.

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जोधपुर. संविधान में प्रदत्त लैंगिक समानता (Gender equality) के अधिकार का उल्लंघन करने के विषय को लेकर जोधपुर हाईकोर्ट (Jodhpur High Court) में एक जनहित याचिका (Public interest litigation) दायर की गई है. इस याचिका पर हाई कोर्ट सीजे इंद्रजीत महंती और जस्टिस डॉ. पुष्पेन्द्रसिंह सिंह भाटी की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी (Notice issued) कर जवाब तलब किया है.

लैंगिक समानता के अधिकार का उल्लंघन
याचिका पर सुनवाई बुधवार को की गई. इस जनहित याचिका में यह सवाल उठाया गया कि पुरुष और महिला की शादी की उम्र में अंतर संविधान द्वारा प्रदत्त लैंगिक समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है. वर्तमान समय में शादी के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की के लिए 18 वर्ष तय की हुई है. अब इस मामले में 6 सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी.

यह अंतर लड़की की शिक्षा के अवसर को प्रभावित करता है



याचिकाकर्ता अधिवक्ता अब्दुल मन्नान ने बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट में उन्होंने इसको लेकर जनहित याचिका दायर की है. याचिका में लड़का और लड़की की वैवाहिक उम्र को चुनौती दी गई है. बकौल मन्नान आयु का यह निर्धारण संविधान की धारा 14 और 15 का उल्लंघन करता है. इसके साथ ही यह लड़की की शिक्षा के अवसर को सीधे तौर पर प्रभावित करता है. याचिकाकर्ता अधिवक्ता मन्नान ने खंडपीठ के समक्ष पैरवी करते हुए कहा कि डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में भी यह कहा गया है कि लड़की 20 साल से पहले किसी बच्चे को जन्म देती है तो उसके स्वास्थ्य और जीवन के लिए खतरा है.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की सर्वे रिपोर्ट भी पेश की
इसके अलावा याचिकाकर्ता ने खंडपीठ के समक्ष ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक सर्वे की रिपोर्ट भी पेश की, जिसमें बायोलॉजिकल उम्र और कैलेंडर उनके बारे में तथ्य पेश किए गए हैं. हाई कोर्ट की मुख्य पीठ ने सभी तर्कों को स्वीकार करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर उनसे 6 सप्ताह में जवाब मांगा है.

 

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First published: February 6, 2020, 7:20 PM IST
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