भंसाली कोर्ट में Padmaavat दिखाने को तैयार, लेकिन सुरक्षा की गारंटी मांगी

निर्माता संजय लीला भंसाली राजस्थान हाईकोर्ट में विवादित फिल्म 'पद्मावत' दिखाने को तैयार हो गए हैं.

ETV Rajasthan
Updated: January 23, 2018, 12:40 PM IST
भंसाली कोर्ट में Padmaavat दिखाने को तैयार, लेकिन सुरक्षा की गारंटी मांगी
करनाल में नहीं दिखाई जाएगी पद्मावत
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Updated: January 23, 2018, 12:40 PM IST
निर्माता संजय लीला भंसाली राजस्थान हाईकोर्ट में विवादित फिल्म 'पद्मावत' दिखाने को तैयार हो गए हैं. लेकिन उन्होंने इसके लिए कोर्ट से सुरक्षा की मांग की है. कोर्ट ने अब सरकार से भंसाली को सुरक्षा की गारंटी देने की बात कहते हुए मामले में अगली सुनवाई 2 फरवरी तक टाल दी है. मंगलवार को ही राजस्थान और मध्यप्रदेश की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर पिटीशन भी खारिज कर दी गई जिसमें 'पद्मावत' पर बैन लगाने की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब पूरे देश में 25 जनवरी को फिल्म रिलीज होगी.

बता दें कि विवादित फिल्म 'पद्मावती' का नाम बदल कर भले ही 'पद्मावत' कर दिया हो लेकिन इसे लेकिन फिल्म में रानी पद्मिनी के सम्मान को ठेस पहुंचाने का विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है. राजस्थान में इसी अपमान को लेकर फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली, अभिनेता रणवीरसिंह और अभिनेत्री दीपिका पादुकोन पर एफआईआर दर्ज है जिसे रद्द करने की याचिका पर मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई.

इससे पहले 12 जनवरी को राजस्थान उच्च न्यायालय के जस्टिस संदीप मेहता की कोर्ट में भंसाली और अन्य की 482 की याचिका पर सुनाई हुई थी. कोर्ट ने भंसाली, अभिनेता रणवीरसिंह और अभिनेत्री दीपिका पादुकोन पर नागौर के डीडवाणा थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए 23 जनवरी तक फिल्म कोर्ट में प्रदर्शित करने के निर्देश दिए थे. तीनों पर आईपीसी की धारा 153 ए और 295 ए में एफआईआर दर्ज की गई थी.

इस एफआईआर को रद्द करवाने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय में 482 की एक याचिका पेश की गई थी. इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट में यह दलील दी कि न ही तो फिल्म प्रदर्शित की गई है और न ही उसका टेलर रिलीज किया गया है.

फिल्म को प्रदर्शन करने से पूर्व सिनेमाटोग्राफी अधिनियम 1952 के तहत बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन सेक्शन 5 ए के तहत सर्टिफिकेट लेना पड़ता है. जिस पर कोर्ट के कहां कि चूंकि एफआईआर में फिल्म में भद्दे सीन और इतिहास के साथ छेड़छाड़ का आरोप है. इसलिए कोर्ट इस एफआईआर को निरस्त फिल्म को देखे बगैर कैसे कर सकती है? इसलिए आगामी 23 जनवरी या उससे पूर्व इस फिल्म को कोर्ट के समक्ष दिखाए.

याचिकाकर्ता कि ओर से अधिवक्ता नीशांत बोड़ा ने पैरवी की वहीं सरकार की ओर से जेपी भारद्वाज ने
पक्ष रखा. वीरेन्द्र सिंह और नागपाल सिंह ने यह एफआईआर दर्ज करवाई थी. कोर्ट के आदेश पर अधिवक्ता ने कोर्ट को कहा कि वह निर्माता संजय लीला भंसाली से पूछ कर बताएंगे कि कब फिल्म का प्रदर्शन कोर्ट के समक्ष करेंगे.

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First published: January 23, 2018, 11:29 AM IST
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