दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चों को अस्पतालकर्मी ने चढ़ाया एक्सपायरी डेट का ग्लूकोज, ऐसे खुला राज
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दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चों को अस्पतालकर्मी ने चढ़ाया एक्सपायरी डेट का ग्लूकोज, ऐसे खुला राज
इस मामले के खुलासे के बाद ड्रग डिपार्टमेंट के असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर राकेश वर्मा खुद अस्पताल पहुंचे और उन्होंने सभी इंजेक्शन को भी जब्त कर लिया. (सांकेतिक फोटो)

इस मामले के खुलासे के बाद ड्रग डिपार्टमेंट के असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर राकेश वर्मा (Rakesh Verma) खुद अस्पताल पहुंचे और उन्होंने सभी इंजेक्शन भी जब्त कर लिया.

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जोधपुर. राजस्थान के जोधपुर शहर के उम्मेद अस्पताल (Umaid Hospital) में शिशु रोग विभाग की यूनिट में 4 बच्चों को एक्सपायर डेट का ग्लूकोज (Expire Gate Glucose) चढ़ाया गया है. घटना के सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने स्टोर इंचार्ज व नर्सिंग इंचार्ज को हटने के आदेश दे दिए हैं. दिमागी बुखार में काम आने वाला इंजेक्शन के साथ ग्लूकोज को चढ़ाया गया है. दरसअल, दिमागी बुखार (Brain Fever) में काम आने वाला ग्लकोज की बोतल की तरह ही आईवी इंजेक्शन मेनिटोल था,  जिसे सीधे नसों में चढ़ाया जाता है. जिन चार बच्चों को यह इंजेक्शन चढ़ाया गया था उन्हें दिमागी बुखार बताया जा रहा है. यह इंजेक्शन दिमाग की नसों की सूजन कम करने सहित अन्य कारणों के लिए लगाया जाता है.

ड्रग डिपार्टमेंट ने भी शुरू की जांच
इस मामले के खुलासे के बाद ड्रग डिपार्टमेंट के असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर राकेश वर्मा खुद अस्पताल पहुंचे और उन्होंने सभी इंजेक्शन को भी जब्त कर लिया. इसके अलावा विभाग की टीम को स्टोर व वार्ड में अनियमितताएं भी मिली हैं, जिनकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है. इधर मेडिकल कॉलेज प्राचार्य के आदेश पर तीन सदस्यों की कमेटी भी गठित हो गई है. इसे तीन दिन में इस मामले की रिपोर्ट देनी है. शनिवार रात को उम्मेद अस्पताल में हुई इस घटना का खुलासा सोमवार रात को हुआ. हालांकि तत्कालीन समय वार्ड के नर्स को इस बात का पता चल गया था. उसने 3 बच्चों को लगाए गए इंजेक्शन की खाली बोतल हटा दी. लेकिन एक बोतल वहीं पर रह गई जिसे परिजनों ने देख लिया.

3 दिन में जांच रिपोर्ट के आदेश दिए हैं
इधर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इस पूरे मामले पर गंभीरता दिखाते हुए 3 दिन में जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं. प्राचार्य डॉक्टर जीएल मीणा ने संबंधित वार्ड के इंचार्ज, नर्सिंग कर्मी और स्टोर प्रभारी को हटाने के निर्देश भी जारी किए हैं. कायदे से नर्सिंग कर्मी की जिम्मेदारी है कि वह किसी भी तरह की दवा लगाने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट देखे. लेकिन वार्ड में एक्सपायरी दवा आना और लगना दोनों स्तर पर हुई चूक ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान लगा दिया है.



 
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