बेबसी: जोधपुर में इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं लोग, सामने आई दर्दनाक तस्वीर

जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में सामने आई बेबसी की दर्दनाक तस्वीर. इलाज के अभाव में युवक ने कुर्सी पर ही दम तोड़ दिया.

जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में सामने आई बेबसी की दर्दनाक तस्वीर. इलाज के अभाव में युवक ने कुर्सी पर ही दम तोड़ दिया.

Horrific conditions of Corena in Jodhpur: राजस्थान के दूसरे सबसे बड़े शहर जोधपुर में कोरोना के हालात इतने ज्यादा बिगड़ चुके हैं कि अब पीड़ित और सिस्टम पूरी तरह से लाचार हो चुके हैं. यहां एक युवक ने इलाज के अभाव (Lack of treatment) में तड़फ-तड़फकर कुर्सी पर ही दम तोड़ दिया.

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जोधपुर. प्रदेश में दिन प्रतिदिन बिगड़ते कोरोना (COVID-19) के हालात के कारण मेडिकल सिस्टम पूरी तरह से चरमरा गया है. जोधपुर में तो अब इलाज के अभाव में बीमार लोग दम तोड़ने लगे हैं. सनसिटी जोधपुर (Jodhpur) में दिल को दहला देने वाली ऐसी ही एक तस्वीर सामने आई है. जोधपुर में रविवार को इलाज नहीं (Lack of treatment) मिलने के कारण एक युवक ने अपने परिजनों के सामने ही तड़फ-तड़फकर दम (Death) तोड़ दिया. युवक की सांसें फूल रही थी. अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि वह कोरोना से पीड़ित था या नहीं. लेकिन इलाज के अभाव में उसकी मौत जरुर हो गई.

कोरोना से लड़ने की सरकारी तैयारियों और सिस्टम पर सवालिया निशान लगाने वाली यह तस्वीर बेहद दर्दनाक है. चोटिला गांव निवासी करीब 25 वर्षीय पप्पू सिंह की तबीयत बिगड़ने पर रविवार को उसके परिजन उसे आनन-फानन में जोधपुर संभाग के सबसे बड़े मथुरादास माथुर अस्पताल लेकर आए. उन्हें उम्मीद थी कि संभाग के इस सबसे बड़े अस्पताल में उनके बेटे को जिंदगी मिल जाएगी. लेकिन ऐसा हो नहीं सका. अस्पताल में पप्पू को बेड भी नसीब नहीं हो पाया. इलाज के अभाव में पप्पू ने अस्पताल की सीटिंग चेयर पर ही एक-एक सांस के लिए संघर्ष करते परिजनों के सामने ही दम तोड़ दिया.

राजस्थान का दूसरा सबसे ज्यादा संक्रमित जिला है जोधपुर

उल्लेखनीय है कि जोधपुर राजस्थान का दूसरा सबसे ज्यादा संक्रमित जिला है. रविवार को भी जोधपुर में 2212 नये पॉजिटिव केस सामने आये हैं. वहीं 32 कोरोना पीड़ितों की मौत हो गई. जबकि 1334 लोग इस महामारी से ठीक हुये हैं. यहां कोरोना संक्रमण बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. जोधपुर में नये पॉजिटिव आने और मौतों का आंकड़ा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. जोधपुर के सभी कोविड अस्पताल मरीजों से भरे पड़े हैं.
अस्पतालों ने अब पीड़ितों की गुहार तक सुननी बंद कर दी

ऐसे हालात में कोरोना पीड़ित और उनके परिजन कहां जाये उनकी समझ में नहीं आ रहा है. वे मारे-मारे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल फिर हैं. मरीज की किस्मत अच्छी होती है वो उसे इलाज नसीब हो जाता है अन्यथा वह चोटिला के पप्पू की तरह दम तोड़ देता है. अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इतना दबाव है कि अस्पताल प्रशासन ने अब पीड़ितों की गुहार तक सुननी बंद कर दी है.
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