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जोधपुर में 29 मार्च को दिखेंगे लोक संस्कृति के रंग, राज गणगौर की निकलेगी सवारी

जोधपुर में 29 मार्च को दिखेंगे लोक संस्कृति के रंग, राज गणगौर की निकलेगी सवारी

सूर्यनगरी में 29 मार्च को चार अलग-अलग धार्मिक-सांस्कृतिक शोभायात्राओं में लोक संस्कृति के रंग व अध्यात्म की खुशबू बिखरेगी। मेहरानगढ़ के नागणेच्या माता मंदिर से राज गणगौर की सवारी सज-धज कर 29 मार्च को शाम 6 बजे शोभायात्रा के रूप में मेहरानगढ़ से निकलेगी। गाजे-बाजों और शाही लिवाज के साथ रानीसर जलाशय पर गणगौर माता को जल अर्पण किया जाएगा। पूर्व नरेश गजसिंह परिवार सहित समारोह में शामिल होंगे। गवर विदाई से पूर्व गणगौर प्रतिभाओं का विधिवत पूजन किया जाएगा।

सूर्यनगरी में 29 मार्च को चार अलग-अलग धार्मिक-सांस्कृतिक शोभायात्राओं में लोक संस्कृति के रंग व अध्यात्म की खुशबू बिखरेगी। मेहरानगढ़ के नागणेच्या माता मंदिर से राज गणगौर की सवारी सज-धज कर 29 मार्च को शाम 6 बजे शोभायात्रा के रूप में मेहरानगढ़ से निकलेगी। गाजे-बाजों और शाही लिवाज के साथ रानीसर जलाशय पर गणगौर माता को जल अर्पण किया जाएगा। पूर्व नरेश गजसिंह परिवार सहित समारोह में शामिल होंगे। गवर विदाई से पूर्व गणगौर प्रतिभाओं का विधिवत पूजन किया जाएगा।

सूर्यनगरी में 29 मार्च को चार अलग-अलग धार्मिक-सांस्कृतिक शोभायात्राओं में लोक संस्कृति के रंग व अध्यात्म की खुशबू बिखरेगी। मेहरानगढ़ के नागणेच्या माता मंदिर से राज गणगौर की सवारी सज-धज कर 29 मार्च को शाम 6 बजे शोभायात्रा के रूप में मेहरानगढ़ से निकलेगी। गाजे-बाजों और शाही लिवाज के साथ रानीसर जलाशय पर गणगौर माता को जल अर्पण किया जाएगा। पूर्व नरेश गजसिंह परिवार सहित समारोह में शामिल होंगे। गवर विदाई से पूर्व गणगौर प्रतिभाओं का विधिवत पूजन किया जाएगा।

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सूर्यनगरी में 29 मार्च को चार अलग-अलग धार्मिक-सांस्कृतिक शोभायात्राओं में लोक संस्कृति के रंग व अध्यात्म की खुशबू बिखरेगी। मेहरानगढ़ के नागणेच्या माता मंदिर से राज गणगौर की सवारी सज-धज कर 29 मार्च को शाम 6 बजे शोभायात्रा के रूप में मेहरानगढ़ से निकलेगी। गाजे-बाजों और शाही लिवाज के साथ रानीसर जलाशय पर गणगौर माता को जल अर्पण किया जाएगा। पूर्व नरेश गजसिंह परिवार सहित समारोह में शामिल होंगे। गवर विदाई से पूर्व गणगौर प्रतिभाओं का विधिवत पूजन किया जाएगा।

महल में विराजित गवर स्थल पर घूमर नृत्य व पारम्परिक गणगौर गीत गायन के साथ गवर को राणीसर तालाब से जल अर्पण कर विदाई दी जाएगी। पारम्परिक वेशभूषा में पूर्व राजपरिवार से जुड़े लोग व अतिथि शामिल होंगे।

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