Jodhpur Fire: जिंदा जले एक ही परिवार के 4 लोग, मौके पर पहुंची पुलिस को मिले सिर्फ कंकाल

जोधपुर में घटनास्थल पर मौजूद जिला कलेक्टर और स्थानीय लोग.

Big Accident in Jodhpur: जोधपुर में हुए दर्दनाक हादसे में बुजुर्ग पति-पत्नी और उनकी दो बेटियां जिंदा जल (Burnt alive) गईं. परिवार के चार में से तीन सदस्‍य बीमार थे.

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जोधपुर. सनसिटी जोधुपर में रविवार रात को हुए दर्दनाक हादसे (Traumatic accident) में एक ही परिवार 4 लोग जिंदा जल (Burnt alive) गए. मृतकों में बुजुर्ग दपंति और उनकी दो बेटियां शामिल हैं. चारों की मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस और फायरबिग्रेड की टीम जब वहां पहुंची तब तक परिवार के चारों सदस्यों के केवल कंकाल ही बचे थे. हादसे की सूचना पर पुलिस, प्रशासन के आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे. हादसे के शिकार हुए तीन सदस्य बीमार बताए जा रहे हैं. पुलिस पूरे मामले की पड़ताल में जुटी है. आग लगने के कारणों का भी अभी तक पता नहीं चल पाया है.

जानकारी के अनुसार, हादसा मिल्कमैन कॉलोनी क्षेत्र में सुभाष चौधरी के घर में हुआ. सुभाष चौधरी के मकान में रविवार रात को अचानक आग लग गई. हादसे में सुभाष चौधरी (75), उनकी पत्नी नीलम चौधरी (70) बेटी पल्लवी चौधरी (50) और लावण्या चौधरी (45) जिंदा जल गईं. स्थानीय लोगों ने बताया कि रात के समय अचानक मकान से धुंआ उठते देख उन्होंने पुलिस स्टेशन और दमकल विभाग को सूचना दी. मौके पर पहुंची दमकल ने आग पर काबू पाया. मकान अंदर से बंद था, लिहाजा दमकलकर्मी उसमें घुस नहीं पाए. आग बुझने के बाद पुलिस ने दरवाजा तोड़कर जब अंदर देखा तो सुभाष और उनकी पत्नी तथा दोनों बेटियां एक कमरे में जले हुए मिले.

काजरी के रिटायर्ड ऑफिसर थे सुभाष चौधरी
घटना की सूचना के बाद जिला कलेक्टर इंद्रजीत सिंह, कमिश्नरेट (पश्चिम) डीसीपी आलोक श्रीवास्तव तथा एसीपी नूर मोहम्मद सहित क्षेत्रीय नेता मौके पर पहुंचे. मकान में 4 लोग ही रहते थे. एक ही कमरे में सभी के शव मिलने के कारण पुलिस इस मामले में हादसे और अन्य एंगल से भी जांच कर रही है. एफएसएल की टीम आने तक मकान में किसी को भी प्रवेश नहीं करने दिया गया. आसपास के क्षेत्रवासियों ने बताया कि इस परिवार की एक बेटी का विवाह चंडीगढ़ में हो रखा है. मृतकों में से शामिल परिवार का मुखिया सुभाष चौधरी काजरी के रिटायर्ड ऑफिसर थे.

परिवार के तीन सदस्य बीमार
पल्लवी चौधरी शहर के शास्त्रीनगर सर्कल स्थित सेंट पॉल स्कूल में साइंस की टीचर थीं. वह अपने माता-पिता और बहन के साथ ही रहती थीं. उनकी बहन 25 साल से पैरालाइज्ड थीं. वहीं, पिता सुभाष चौधरी और मां नीलम चौधरी भी कई महीनों से बीमार थे.

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