धूमधाम से हुई दो बहनों की शादी, मां की मौत के बाद गंभीर हालत में अनाथ आश्रम में कई साल पहले छोड़ गया था पिता
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धूमधाम से हुई दो बहनों की शादी, मां की मौत के बाद गंभीर हालत में अनाथ आश्रम में कई साल पहले छोड़ गया था पिता
जोधपुर के लवकुश संस्थान में दो अनाथ बहनों का धूमधाम से विवाह हुआ

लवकुश संस्थान (lavkush Institute) के संचालक राजेन्द्र परिहार ने बताया कि कई साल पहले डेढ़ वर्ष की सोनू और 6 माह की बसंती की मां की मौत हो गई थी. उसके बाद इनके पिता दोनों को यहां छोड़ कर चले गए थे. उस समय इन दोनों बेहद बीमार हालत में थीं यहां तक कि इन बच्चियों के बचने की भी कोई संभावना नजर नहीं आ रही थी.

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जोधपुर. मां की मौत के बाद जिन बच्चियों को उनके पिता ने भी मरने के लिए छोड़ दिया था. उन बच्चियों को जनपद के लवकुश संस्थान (Luvkush Sansthan) ने पाला-पोसा और आज उन बच्चियों की शादी (marriage) की रस्म अदा की गई. इस विवाह समारोह के साक्षी केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत (Union Minister Gajendra Singh Shekhawat), जोधपुर मेयर घनश्याम ओझा समेत शहर के कई गणमान्य लोग रहे जिन्होंने वर-वधू को आशीर्वाद देकर नए जीवन में प्रवेश के लिए विदा किया.

पिता ने दोनों बेटियों को मरणासन्न अवस्था में छोड़ा था
बता दें कि शहर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित लवकुश संस्थान में सोनू और बसंती का विवाह था. रिपोर्ट के मुताबिक मां की मौत के बाद इनके पिता ने दोनों बेटियों को मरणासन्न अवस्था में यहां छोड़ दिया था. इनके विवाह में केंद्रीय मंत्री, मेयर समेत शहर तमाम लोग और उनके साथ यहां रहने वाले उनके साथी 60 बच्चे भी शामिल रहे और इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. सारी रीति-रिवाज के साथ इन बहनों का विवाह सम्पन्न हुआ. शहर के लवकुश संस्थान में बड़ी हुई सोनू और बसंती का विवाह सोमवार को शहर के किराना व्यवसायी  प्रियेश और गौरव के साथ हुआ. इन युवकों ने खुद अपना कारोबार खड़ा किया है. सोनू और बसंती की रजामंदी से इनका विवाह इन युवकों के साथ सम्पन्न हुआ. समाजसेवी भगवान सिंह परिहार ने अनाथ बच्चों के लिए वर्ष 1989 में लवकुश संस्थान की स्थापना की थी. इस संस्थान द्वारा अब तक 1144 बच्चों को गोद दिया जा चुका है. बच्चों को पालने में असमर्थ या अनाथ बच्चों को लोग इस संस्थान के बाहर लगे पालने में छोड़ जाते हैं. इसके बाद संस्थान के कर्मचारी इन बच्चों को परिवार के सदस्यों के समान पालते हैं. फिलहाल इस संस्थान का संचालन राजेन्द्र परिहार द्वारा किया जा रहा है.

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6 माह और डेढ़ वर्ष उम्र थी जब संस्थान आई थीं ये बेटियां
लवकुश संस्थान के संचालक राजेन्द्र परिहार ने बताया कि बरसों पहले डेढ़ वर्ष की सोनू और 6 माह की बसंती की मां की मौत हो गई थी. उसके बाद इनके पिता दोनों को यहां छोड़ कर चले गए थे. उस समय इन दोनों बेहद बीमार हालत में थीं यहां तक कि इन बच्चियों के  बचने की भी कोई संभावना नजर नहीं आ रही थी. संस्थान ने दोनों का इलाज करवाया और पाल-पोस कर बड़ा किया. दोनों की पढ़ाई-लिखाई भी यहीं से हुई. सोनू ने पॉलिटेक्निक से डिप्लोमा कोर्स किया तो वहीं बसंती आर्ट्स में ग्रेजुएट हैं. सोनू और बसंती का कन्यादान शहर के ही व्यवसाई गौतम मेहता और आशीष अग्रवाल ने किया. इन लोगों से विवाह में किसी प्रकार का खर्च नहीं लिया गया. बल्कि इनको संसथान की एक शर्त का पालन अपने परिवार समेत जीवन पर्यंत करना होगा. इस संस्थान की शर्त है यह है कि कन्यादान करने वाले पति-पत्नी ताउम्र इन दोनों कन्याओं की आगे की जिम्मेदारी निभाएंगे.

राजेन्द्र परिहार बताते हैं कि संस्थान की विवाह योग्य कन्याओं के विवाह के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया जाता है. इसके बाद इच्छुक लोगों के संपर्क करने पर उनके बारे में पूरी जानकारी ली जाती है. जिसके अंतर्गत घर-परिवार के अलावा लड़कों की पढ़ाई और काम-धंधे, रोजगार के बारे में जानकारी ली जाती है. उन्होंने बताया कि जैसे ये दोनों युवा किराना व्यवसाई हैं. ऐसे में इनकी दुकान पर जाकर कुछ सामान की खरीदारी कर इनके व्यवहार को परखा गया. इसके बाद सोनू और बसंती से दोनों को मिलवाया गया और दोनों की पसंद-नापसंदगी के बारे पूछा गया. दोनों बच्चियों की सहमति मिलने के बाद यह रिश्ता तय किया गया,और आज पूरे रीति-रिवाजों के साथ दोनों बहनों का विवाह संपन्न कराया गया.
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