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विजय दिवस विशेष: जैसलमेर के लोंगेवाला में भारत-पाक युद्ध की कहानी, सुनिये नायक भैरों सिंह की जुबानी

अदम्य साहस और शौर्य के लिए भैरों सिंह राठौड़ को 1972 में सेना मेडल से नवाजा गया था.

अदम्य साहस और शौर्य के लिए भैरों सिंह राठौड़ को 1972 में सेना मेडल से नवाजा गया था.

विजय दिवस विशेष: आज हम आपको एक ऐसे योद्धा (Warrior) से मिला रहे हैं जिसने 1971 में हुये भारत पाक युद्ध (Indo-Pak war) म ...अधिक पढ़ें

जोधपुर. 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध (Indo-Pak war) को आज 50 साल पूरे हो चुके हैं. इस युद्ध में भारतीय सेना (Indian Army) के 120 जवानों ने पश्चिमी राजस्थान में थार के धोरों में स्थित जैसलमेर के लोंगेवाला (Longewala) में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी. वैसे तो आर्मी ने उस दौरान युद्ध लड़ा था, लेकिन बीएसएफ (BSF) के एक जवान ने इस युद्ध को जिताने में अहम भूमिका निभाई थी. वह नाम है भैरों सिंह राठौड़ (Bhairon Singh Rathore). इनको आपने 'बॉर्डर' फिल्म में देश के लिए शहीद होता देखा होगा. लेकिन असल जिंदगी में वो वीर आज भी जिंदा है. जोधपुर के शेरगढ़ स्थित एक गांव में वो योद्धा आज शान भी अपना जीवन यापन कर रहा है. भैरों सिंह की जुबानी सुनिये इस युद्ध की दास्तां.

भैरों सिंह बताते हैं कि 1971 जब भारत-पाक के बीच युद्ध छिड़ चुका था. उस समय बीएसएफ की 14 बटालियन की डी कंपनी को तीसरे नंबर की प्लाटून लोंगेवाला पर तैनात थी. आर्मी की 23 पंजाब की एक कंपनी ने मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी के नेतृत्व में लोंगेवाला का जिम्मा संभाल लिया था. बॉर्डर पोस्ट से करीब 16 किमी दूरी पर था. बीएसएफ की हमारी कम्पनी को दूसरी पोस्ट पर भेज दिया गया. मुझे पंजाब बटालियन के गाइड के तौर पर लोंगेवाला पोस्ट पर तैनाती के आदेश मिले. सेना को पैट्रोलिंग के दौरान इलाका दिखाया. आधी रात को संदेश मिला कि पाकिस्तानी सैनिक पोस्ट की ओर बढ़ रहे हैं. उनके पास बड़ी संख्या में टैंक भी थे. भारतीय सेना ने हवाई हमले के लिए एयरफोर्स से मदद मांगी, लेकिन रात होने के कारण मदद नहीं मिल सकी.

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7 घंटे तक फायरिंग करते रहे
बकौल सिंह रात के करीब 2 बजे पाक सेना ने टैंक से गोले बरसाने शुरू कर दिए. दोनों देशों की सेनाओं के बीच घमासान लड़ाई छिड़ चुकी थी. इस बीच एलएमजी से गोलियां दाग रहा एक सैनिक घायल हो गया. मैंने समय गवाएं बिना एलएमजी संभाल ली और लगातार 7 घंटे तक फायरिंग करता रहा. सूरज निकलने के साथ ही वायुसेना के विमान आ चुके थे. विमानों से भयंकर बमबारी की जिसमें पाक को भारी नुकसान हुआ. अंततः पाकिस्तानी सेना को पीछे हटना पड़ा. लोंगेवाला जीत के हीरो बीएसएफ के नायक भैरोंसिंह राठौड़ का दावा है की उन्होंने एलएमजी से दो दर्जन से अधिक पाक सैनिकों को मार गिराया था.

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1972 में सेना मेडल से नवाजा गया था
अदम्य साहस और शौर्य के लिए भैरों सिंह राठौड़ को 1972 में सेना मेडल से नवाजा गया था. पूर्व मुख्यमंत्री बरकतुल्लाह खान ने भी भैरों सिंह राठौड़ को सम्मानित किया था. सन् 1963 में बीएसएफ में भर्ती होकर राठौड़ 1987 में सेवानिवृत्त हुए थे. भैरोंसिंह का दर्द है कि उन्हें सरकार से जमीन नहीं मिली. वहीं पेंशन राशि भी 12500 रुपये ही मिल रही है. छठे और सातवें वेतनमान का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पाया है. गांव में 25 बीघा जमीन है. वो भी बरसात पर निर्भर. परिवार का लालन पोषण पेंशन और खेती से ही हो रहा है.

सिंह को बॉर्डर फिल्म में शहीद बताया गया है
वर्ष 1997 में रिलीज हुई जेपी दत्ता की बॉर्डर फिल्म में अभिनेता सुनील शेट्टी (भैरोंसिंह राठौड़) ने पाकिस्तानी टैंक उड़ाने के लिए लेंड माइन उसके नीचे रख दी थी. फिल्म में उन्हें शहीद बताया गया था. सुनील शेट्टी ने फिल्म में भैरोसिंह सोलंकियातला का किरदार अदा किया था. बातचीत में सिंह ने बताया कि वे अभिनेता सुनील शेट्टी से मिलना चाहते हैं. उन्हें बताएंगे कि वे जिंदा हैं. उन्हें शहीद क्यों फिल्माया गया. भैरोंसिंह बताते हैं कि बॉर्डर फिल्म के डायरेक्टर व अभिनेता ने उनसे मुलाकात ही नहीं की. सेना के अधिकारियों ने जितनी स्क्रिप्ट लिखवाई उसी पर बॉर्डर मूवी फिल्माई गई.

लोंगेवाला एक ऐतिहासिक 'विजय'
भैरों सिंह बताते हैं कि लोंगेवाला की लड़ाई जीते हुए आज 50 साल बीत गए हैं. वहां एक ऐतिहासिक जीत मिली थी. लेकिन आज की जेनरेशन इस बात से वाकिफ ही नहीं है कि लोंगेवाला है कहां ? वे चाहते हैं कि जिस तरह गुलाम भारत के वीरों की कहानी बच्चों को पता है उसी तरह आजाद भारत के सैनिकों की दास्तां भी हर किसी को मालूम होनी चाहिए. हर साल दिसंबर के महीने में जंग के दिनों की यादें ताजा हो जाती हैं. यह दुनिया की पहली ऐसी जंग थी जो सिर्फ 13 दिन तक ही लड़ी गई. 16 दिसंबर 1971 के दिन पाकिस्तान ने अपने 92000 सैनिकों के साथ हिंदुस्तान के आगे सरेंडर किया था. इस दिन को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है.

युद्ध के बाद हुआ था विवाह
भैरों सिंह ने बताया कि बॉर्डर फिल्में में सुनील शेट्टी ने उनके किरदार को निभाया था. इसमें भैरों सिंह को असिस्टेंट कमांडेंट स्तर का अधिकारी दिखाया गया है. जबकि वो तो अंगूठा छाप हैं और बीएसएफ में नायक थे. फिल्म में भैरोंसिंह की पत्नी फूल कंवर थी. जबकि वास्तव में उनकी पत्नी का नाम प्रेम कंवर है. भैरोंसिंह की शादी भारत- पाक युद्ध के बाद सन 1973 में हुई थी.

Tags: BSF jawan, India pakistan, Indian army, War

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