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भटक गया था स्पेन के सिनेरियस प्रजाति का गिद्ध, अब कन्याकुमारी से 2600 किमी का सफर तय कर जोधपुर लाएंगे

Jodhpur news: सर्दियां शुरू होते ही आते हैं कई प्रवासी पक्षी,मौसम इनके प्रजनन के भी अनुकूल

Jodhpur news: सर्दियां शुरू होते ही आते हैं कई प्रवासी पक्षी,मौसम इनके प्रजनन के भी अनुकूल

Jodhpur News: सिनेरियस प्रजाति का एक गिद्ध घायल हालत में इस साल जनवरी में कन्याकुमारी में देखा गया. कन्याकुमारी के उदयग ...अधिक पढ़ें

    हाइलाइट्स

    गिद्ध को कन्याकुमारी से लाने के लिए स्पेशल डिजाइन का पिंजरा और व्हीकल तैयार
    जोधपुर-जैसलमेर का मौसम और पठारी इलाके प्रवासी पक्षियों के प्रजनन के भी अनुकूल

    रंजन दवे

    जोधपुर. प्रवासी पक्षियों के साथ आए गिद्ध (Vulture) के रास्ता भटकने के बाद अब उसे वापस अपने कुनबे में शामिल करने की तैयारी की जा रही है. इस प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाने के लिए स्पेन के सिनेरियस प्रजाति (Cinereus species) के गिद्ध को कन्याकुमारी से जोधपुर (Kanyakumari to Jodhpur) लाया जा रहा है. इसके बाद वह अक्टूबर-नवंबर माह में आने वाले प्रवासी पक्षियों के झुंड में शामिल हो सकेगा.

    कन्याकुमारी से जोधपुर तक 26 सौ किलोमीटर के सफर के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. साथ ही जोधपुर में गिद्ध को माचिया बायोलॉजिकल सफारी पार्क में रखा जाएगा, जहां उस पर पूरी नजर रखी जाएगी.

    सर्दियों से शुरू होते ही आते हैं कई प्रवासी पक्षी
    विशेषज्ञों के मुताबिक राजस्थान के जोधपुर, फलोदी और बीकानेर से सटे इलाकों में सर्दियां शुरू होने के साथ ही बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है. यहां कई तरह के साइबेरियन क्रेन, हिमालयन ग्रिफन, सिनेरियस गिद्ध इत्यादि विदेशी पक्षी समूह में आते हैं. वे 2-3 महीने यहीं डेरा डालते हैं और उसके बाद पुनः लौट जाते हैं.

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    रास्ता भटका एक गिद्ध कन्याकुमारी जा पहुंचा
    जानकारों के अनुसार अमूमन यह पक्षी समूह में उड़ान भरते हैं और अपने समूह को छोड़कर कहीं अन्य विचरण नहीं करते. लेकिन कभी-कभार ऐसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं कि कोई पक्षी अकेला रह जाता है या रास्ता भटकने से अन्य स्थान पर पहुंच जाता है. ऐसे ही रास्ता भटका एक गिद्ध कन्याकुमारी जा पहुंचा. स्पेन से आए इस गिद्ध को कन्याकुमारी से जोधपुर लाने की तैयारी की जा रही है.

    स्पेशल डिजाइन का पिंजरा और व्हीकल तैयार
    रास्ता भटके गिद्ध को दूसरे गिद्धों से मिलाने के लिए कन्याकुमारी से जोधपुर तक 2600 किमी का सफर तय कर लाया जाएगा. इसके लिए स्पेशल डिजाइन का पिंजरा और व्हीकल तैयार किए गए हैं. विशेष तरह का हवादार पिंजरा वाहन में फिट किया जाएगा. 4-5 दिनों के सफर के बाद यह वाहन जोधपुर पहुंचेगा. गिद्ध के शरीर पर जीपीएस सिस्टम लगाया गया है, जिससे कि उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके. अनुकूलता होने पर इसे केरु डंपिंग यार्ड में छोड़ने की योजना है.

    यहां का मौसम इनके प्रजनन के भी अनुकूल
    बीकानेर के पर्यावरण विशेषज्ञ प्रोफेसर अनिल छंगाणी के अनुसार सबसे भारी उड़ने वाला सिनेरियस गिद्ध एक यूरेशियन प्रजाति का पक्षी है. यह स्पेन, पुर्तगाल के अलावा दक्षिण फ्रांस में पाया जाता है. यह सर्दी के मौसम में लंबी दूरी तय कर भारत आते हैं और जोधपुर, जैसलमेर, फलोदी आदि पठारी पहाड़ी इलाकों में ठहरते हैं. यहां का मौसम अक्टूबर-नवंबर में इन प्रजातियों के प्रजनन के लिए भी अनुकूल है. ऐसे में समूह बनाकर यह पक्षी यहां आते हैं.

    Tags: Jodhpur News

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