गुर्जर आरक्षण आंदोलन: अधिकांश मांगों पर बनी सहमति, बैकलॉग पर अटकी बात, IAS नीरज लौटे

आंदोलनकारी लगातार पांच दिन से पीलूपुरा में रेलवे ट्रैक पर कब्जा जमाये बैठे हुये हैं. (फाइल फोटो)
आंदोलनकारी लगातार पांच दिन से पीलूपुरा में रेलवे ट्रैक पर कब्जा जमाये बैठे हुये हैं. (फाइल फोटो)

Gujjar Reservation Movement: आंदोलनकारियों और सरकार के बीच चल रही वार्ता में अधिकांश बातों पर सहमति (Consent) बनती दिखायी दे रही है. बैकलॉग के मसले का अभी तक समाधान नहीं हो पाया है.

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जयपुर. राजस्‍थान में चल रहे गुर्जर आरक्षण आंदोलन (Gujjar Reservation Movement) में अभी तक पूर्ण समाधान की राह नहीं निकल पाई है. इसके कारण दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक लगातार पांचवें दिन गुरुवार को भी बाधित है. बताया जा रहा है कि आंदोलनकारियों और सरकार के बीच चल रहे वार्ताओं के दौर में अधिकांश मांगों पर सहमति बन गई है, लेकिन बैकलॉग के मसले पर बात अटकी हुई है. आंदोलन के समाधान को लेकर सरकार के प्रशासनिक प्रतिनिधि वरिष्ठ आईएएस नीरज के.पवन दो दिन तक यहां डेरा डाले रखा था, लेकिन अब वे लौट गये हैं.

नीरज के. पवन ने इन दो दिनों के दौरान पटरियों पर पड़ाव डालकर बैठे आंदोलनकारियों और उनकी अगुवाई कर रहे गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला से मुलाकात कर सरकार का पक्ष रखा. वार्ताओं में अधिकांश बातों पर सहमति भी बनती दिखी, लेकिन वह समझौते में तब्दील नहीं हो पाई है. वार्ता के दौरान बैकलॉग को लेकर बात अटक गई है. दो दिन की मशक्कत के बाद नीरज के. पवन वापस लौट गये हैं. पवन ने बताया कि अटकी हुई भर्तियों पर विस्तार से चर्चा हुई है. परेशान अभ्यर्थियों को जयपुर बुलाकर राहत दी जायेगी. बैकलॉग का भी सरकार अध्ययन करा रही है.

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उल्लेखनीय है कि आंदोलन के पहले ही दिन मंत्री अशोक चांदना को कर्नल बैंसला ने बुलावा भेजा था. इस पर चांदना तमाम जरूरी काम छोड़कर गुर्जरों के बीच पहुंचते, इससे पहले ही हिंडौन-बयाना स्टेट हाइवे पर गुर्जर आंदोलनकारियों ने चक्काजाम कर दिया. चांदना ने कर्नल से मिलने की कोशिश की तो उन्होंने दूसरे दिन सुबह आने को कहा और अपने बेटे विजय बैंसला से मिलने की हिदायत दी. चांदना विजय से मिलने निकले तो उनसे भी मुलाकात नहीं हो पाई. इस पर वो वापस लौट गए. बाद में मंगलवार को नीरज के. पवन आये. उनकी दो दिन में कर्नल बैंसला से मुलाकात भी हुई. उन्होंने पटरी पर आकर मांगों को पूरी करने का भरोसा भी दिया, लेकिन कर्नल ऑर्डर की जिद पर कायम हैं. वहीं, विजय बैंसला का अड़ियल रुख भी वार्ता को नतीजे तक ले जाने में बाधक बना हुआ है.
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