निर्भया के दोषी मुकेश को फांसी, करौली के पैतृक घर पर लटका ताला
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निर्भया के दोषी मुकेश को फांसी, करौली के पैतृक घर पर लटका ताला
बेटे की करतूत के कारण मां पहले ही पैतृक घर घर छोड़कर जा चुकी है.

निर्भया गैंगरेप केस (Nirbhaya Gangrape Case) के चारों दोषियों में मुख्य आरोपी मुकेश और राम सिंह राजस्थान (Rajasthan) के करौली (Karauli) जिले में भद्रवती नदी किनारे स्थित कल्लादेह के निवासी थे.

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करौली. निर्भया गैंगरेप केस (Nirbhaya Gangrape Case) के चार आरोपियों को शुक्रवार तड़के 5.30 बजे तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई, जिससे सालों से हो रहा न्याय का इंतजार पूरा हो गया. चारों दोषियों में मुख्य आरोपी मुकेश और राम सिंह राजस्थान (Rajasthan) के करौली (Karauli) जिला मुख्यालय के पास भद्रवती नदी किनारे स्थित एक छोटी बस्ती कल्लादेह के निवासी थे. यहां बहुत कम लोग रहते है और अधिकतर लोग खेती-बाड़ी का ही काम करते हैं. यहां पहुंचने के लिए भद्रावती नदी पार करनी पड़ती है. करौली शहर से करीब 4 किलोमीटर दूर कल्लादेह शहरी सुविधाओं से भी दूर है. यहीं निर्भया के गुनहगार मुकेश सिंह का छप्परनुमा घर नदी के किनारे ही बना है, जिस पर ताला लटका है.

गुनहगारों को फांसी की सजा होना कानून और न्याय की जीत
कल्लादेह में उसकी मां कल्याणी रहती थीं, जो बेटे की करतूत के बाद गांव छोड़कर जा चुकी हैं. आसपास भी कोई घर नहीं है. करीब 100 से 150 मीटर चलने के बाद छितराये हुए घर हैं, जहां कुछ लोग रहते हैं. लोग कहते हैं कि वे अपनी जुबान पर मुकेश का नाम भी नहीं लेना चाहते. उस परिवार से हमारा कोई लेना-देना नही है. कल्लादेह बस्ती के लोगों का कहना है कि आरोपी बचपन में ही करौली से चले गए थे, लेकिन उनकी हैवानियत ने करौली को सुर्खियों में ला दिया. अब गुनहगारों को फांसी की सजा होना कानून और न्याय की जीत है. करौली का दाग भी धुलना चाहिए.

राम सिंह ने फांसी लगाकर कर ली थी आत्महत्या
थोड़ा दूर जाने पर गांव के बाहर के लोग जरूर मुकेश के बारे में बात करते मिले. लोगों का कहना है कि मुकेश की शादी नहीं हुई थी. वह अपने 3 भाइयों के साथ दिल्ली में ही रहता था. उसकी मां कल्याणी जरूर दिल्ली आती जाती रहती थीं, लेकिन मुकेश के पिता की मौत के बाद गांव में ही रहने लगी थी. वे केस की तारीखों के बाद दिल्ली चली गई. मुकेश का बड़ा भाई राम सिंह भी निर्भया केस का मुख्य दोषी था. दोनों साथ में ही दिल्ली में रहते थे. राम सिंह ड्राइवर था, वहीं मुकेश खलासी का काम करता था. राम सिंह की पत्नी की मौत होने के बाद वह शराब पीने का आदी हो गया था. दोषी राम सिंह ने ट्रायल के दौरान ही तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी.



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