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फैंसी कंबलों और जयपुरी रजाई को मात देती करौली की देसी रजाई, जानें खूबियां, कीमत और मार्केट

सर्दियों के मौसम की शुरुआत के साथ ही करौली में देशी रजाईयों का निर्माण कार्य शुरू हो जाता है देशी कपास को साफ करके बनाई ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट – मोहित शर्मा

करौली. राजस्थान के करौली ज़िले में देशी रजाईयों का कारोबार सदियों से चलता आ रहा है. यहां बनने वाली देशी रजाई आज भी गर्माहट के लिए सबसे पहली पसंद है. इसकी खास बात यह है कि 10 से 15 साल तक इन रजाइयों को आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. यही कारण है कि काफी वैरायटी के बावजूद ये देसी रजाइयां करौली और इसके आसपास के क्षेत्रों के लोगों की पहली पसंद बनी हुई हैं. इन परंपरागत रजाइयों को 10 से 15 साल बाद दोबारा भरवाया भी जा सकता है.

बाजार में आ रही कई प्रकार की फैंसी रजाईयों और फैंसी कम्बलों को यह देशी रजाइयां मात दे रही हैं. देशी रजाई को तैयार करने वाले कारीगर गोलम कंडारा ने बताया कि यह एक रजाई चार कम्बलों के बराबर होती है और कंबल के मुकाबले सस्ती और टिकाऊ होती है. कंबल दो या तीन साल में खराब हो जाता है, लेकिन हाथ से तैयार की गई इस रजाई का सालों तक कुछ नहीं बिगड़ता.

जयपुरी रजाई से कैसे बेहतर है यह रजाई?

करौली में रजाई के कारोबार से कंडेरा समाज के लोग जुड़े हुए हैं. सर्दियों की शुरूआत के साथ ही इस रजाई के कारण यहां 300 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है. रजाई व्यापारी शीतल शर्मा ने बताया कि करौली में यह रजाई तैयार भी मिलती है और ग्राहक अपनी इच्छा के अनुसार रूई-खोली देकर बनवा भी सकते हैं. शर्मा के मुताबिक जयपुर की रजाई दोबारा उपयोग में नहीं आ पाती लेकिन करौली की देसी रजाई दोबारा रूई भरवाकर तैयार करवाई जा सकती है. यही नहीं इसकी पुरानी रूई का भी तकिये और गद्दे में उपयोग हो जाता है.

आप कहां खरीद सकते हैं यह रजाई?

रजाई के कारीगर ईश्वर लाल ने बताया कि इस रजाई के लिए कच्चा माल गंगानगर, अलवर, हनुमानगढ़ से आता है. इसके बाद इस कच्चे माल को मशीन से साफ किया जाता है. पहले रूई को तोला जाता है. फिर सूती कपड़े पर रखकर इसको लकड़ी की डंडियों और हाथ से दबाया जाता है और फिर रजाई को प्लेन करने के लिए तांत लगाया जाता है. इन रजाइयों में 4 से 5 किलो तक वजन होता है. 1150 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक यह रजाई बाजार में मिलती है. अगर आप भी इन रजाईयो को खरीदना चाहते हैं तो करौली में हिंडौन गेट के पास, कपड़ा बाजार और साईनाथ खिड़कियां के पास जाकर खरीद सकते हैं.

Tags: Karauli news, Winter season

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