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करौली के हटबारा बाजार में 300 वर्षों से चल रहा है लकड़ी के खिलौनों का कारोबार

Wooden Toy Marke: करौली का हटवारा बाजार लकड़ी के खिलौनों के लिए विश्व प्रसिद्ध है. यहां लकड़ी के खिलौने बनाने के कारोबा ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट : मोहित शर्मा

    करौली. करौली के हटवारा बाजार में बननेवाले लकड़ी के खिलौनों की अपनी एक खास पहचान है. आज भी आधुनिकता से भरे इस दौर में इनकी खास मांग होती है. हटवारा बाजार में बननेवाले लकड़ी के खिलौने और अन्य सामान आज भी विदेशी सैलानियों और पर्यटकों को लुभाते हैं. यहां पर बननेवाले लकड़ी के खिलौनों के दम पर कई परिवारों का पालन-पोषण होता है. करौली में लकड़ी के खिलौने बनाने के कारोबार से करीब 30 से 40 परिवार जुड़े हुए हैं. महंगाई के इस दौर में आज भी करौली बाजार में 20 रुपए से लेकर 100 तक के लकड़ी के खिलौने मिलते हैं.

    हटवारा बाजार में लकड़ी के खिलौने बनानेवाले अमीरुद्दीन खान ने बताया कि करौली में पहले हमारे पिताजी और दादा जी लकड़ी का स्पेशल कमल और गुलाब का फूल बनाते थे. ये चीजें आज भी हिंदुस्तान में कहीं नहीं बनती हैं. हम अपने पूर्वजों से सब खिलौने और बर्तन बनाना सीख गए लेकिन इस फूल को बनाना नहीं सीख पाए. दरअसल, ये फूल बड़ी मेहनत और बारीकी से तैयार होते हैं.

    आज भी बनती है स्पेशल गाड़ी

    करौली के हटवारा बाजार में तीन पहियों वाली गाड़ी बनती है. इसे छोटे बच्चों की हाथ गाड़ी के नाम से जाना जाता है. इस गाड़ी के जरिए छोटे बच्चे कदम बढ़ाना सीखते हैं. आज भी इस गाड़ी की करौली में सबसे ज्यादा मांग रहती है. करौली के अधिकतर घरों में आज भी छोटे बच्चे इस गाड़ी के जरिए ही चलना सीखते हैं.

    कारोबार के लिए ये सीजन खास

    कारीगर घनश्याम शर्मा ने बताया कि लकड़ी के खिलौने बनाने का काम उनके परिवार में 4 पीढ़ियों से चला आ रहा है. लेकिन यह कारोबार मेहनत, मेहनताना और फैंसी आइटमों की कमी के कारण पिछड़ता जा रहा है. करौली में तो बस शादियों के समय लकड़ी के तोरण, गेहूं फटकने के सूप आदि की वजह से अच्छा कारोबार हो जाता है. तो वहीं दूसरी ओर देवउठनी ग्यारस के अवसर पर अंजनी माता के मेले के लिए बच्चों के लिए पहिया गाड़ी बनाई जाती है. मेले के कारण करीब 20 हजार गाड़ियों का व्यापार हो जाता है.

    करौली में 7-8 दुकानें

    करौली के हटवारा बाजार में लकड़ी के खिलौनों की करीब 7-8 दुकान बनी हुई हैं, जिन पर बेलन, चकला, हुक्के का नेचा, शतरंज के मोहरे, चौपड़ की गोटी, फिरकिनी, सिंगारदानी, तोरण, एक पहिए की गाड़ी, और जानवरों के लिए ऊंट की गिरवान और उन्हें नमक और तेल देने के लिए बांस की नाल बनाई जाती है.

    Tags: Karauli news, Rajasthan news, Wooden Toys

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