कैलादेवी का लक्खी मेला शुरू, देशभर से पहुंचेंगे श्रद्धालु

मंदिर का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना है. धर्म ग्रंथों के अनुसार सती के अंग जहां-जहां गिरे वहीं एक शक्तिपीठ का उदगम हुआ. उन्हीं शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ कैलादेवी है.

ETV Rajasthan
Updated: March 14, 2018, 10:45 AM IST
कैलादेवी का लक्खी मेला शुरू, देशभर से पहुंचेंगे श्रद्धालु
कैला देवी का लक्खी मेला शुरू. Photo:etv/news18
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Updated: March 14, 2018, 10:45 AM IST
उत्तर भारत के प्रसिद्ध कैला देवी लक्खी मेले का आगाज बुधवार से हो गया है. 15 दिनों तक चलने वाले इस मेले में देशभर से करीब 50 लाख श्रद्धालु माता के दर्शन करेंगे. सुरक्षा-व्यवस्था के लिए 1250 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं साथ ही ड्रोन कैमरों से भी निगरानी रखी जाएगी. यातायात व्यवस्था में 600 से अधिक रोडवेज की बसें लगाई हैं. यात्रियों की सुविधाओं के लिए खान-पान, चिकित्सा व ठहरने के लिए हिण्डौन और करौली में व्यवस्था की गई है. 300 से अधिक सफाईकर्मी तैनात किए गए है.

राजस्थान के करौली जिला मुख्यालय से दक्षिण दिशा की ओर 24 किलोमीटर की दूरी पर पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य त्रिकूट पर्वत पर कैला मैया विराजमान है. मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पैदल पहुंचकर कैलामाता के धोक लगाकर मनौती मांगते हैं.  महिलाएं सुहाग के प्रतीक के रूप में हरे रंग की चूडियां एवं सिंदूर की खरीददारी करती है.

इस मंदिर का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना है. धर्म ग्रंथों के अनुसार सती के अंग जहां-जहां गिरे वहीं एक शक्तिपीठ का उदगम हुआ. उन्हीं शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ कैलादेवी है. कहा जाता है कि बाबा केदागिरी ने तपस्या के बाद माता के श्रीमुख की स्थापना इस शक्तिपीठ के रूप में की. मां कैलादेवी की मुख्य प्रतिमा के साथ मां चामुण्डा की प्रतिमा भी विराजमान है.

(धर्मेन्द्र कुमार शर्मा की रिपोर्ट)
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