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करौली में है उत्तर भारत का एकमात्र पिता पुत्र का मंदिर, जानें क्या है मान्यता? 

राजस्थान में मिनी वृंदावन के नाम से मशहूर करौली नगरी में पिता पुत्र का एक ऐसा प्राचीन मंदिर है जो कि उत्तर भारत का एकमा ...अधिक पढ़ें

    मोहित शर्मा/करौली. राजस्थान की धार्मिक नगरी करौली मे गली-गली में मंदिर होने के कारण इस नगरी को मिनी वृंदावन के नाम से जाना जाता है. करौली के सभी प्राचीन मंदिर अपनी एक विशेष पहचान रखते हैं. यहां एक ऐसा अनोखा मंदिर है. जिसे पिता पुत्र के मंदिर के नाम से जाना जाता है. जिसे भगवान सूर्य और शनि देव का मंदिर कहा जाता है. यह मंदिर पीली कचहरी पुरानी नगर पालिका के पास स्थित है. 400 वर्ष प्राचीन इस पिता पुत्र के मंदिर में भगवान सूर्य और उनके पुत्र शनिदेव की पूजा की जाती है.

    भगवान सूर्य और उनके पुत्र शनिदेव के देश में अनगिनत मंदिर है. लेकिन करौली के इस पिता पुत्र के मंदिर की बात की जाए तो इस प्राचीन मंदिर में भगवान सूर्य और उनकी पत्नी छाया देवी के सामने उनके पुत्र शनिदेव विराजमान है. राज्याचार्य पंडित प्रकाश जत्ती ने बताया कि उत्तर भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है जिसमें पिता-पुत्र एक साथ विराजमान है.

    जानिए क्या है मान्यता
    राज्याचार्य पंडित प्रकाश जत्ती के अनुसार इस मंदिर की ऐसी मान्यता है कि भगवान सूर्य की आराधना से आरोग्य की प्राप्ति होती है और कुष्ठ रोग ( कोढ ) दूर होते हैं और मंदिर में विराजमान सूर्यपुत्र शनिदेव की आराधना से प्रचुर धन लाभ होता है.

    इस मंदिर की खास बात यह है कि मंदिर के सामने पत्थर के नीचे फुवारा लगा हुआ है. मंदिर में भगवान सूर्य और उनकी पत्नी छाया देवी भव्य चांदी के सिंहासन में विराजमान है. मंदिर के ऊपरी भाग में बना शिखर दक्षिणी भारत शैली का अद्भुत नमूना है.

    सूर्य छठ और शनिवार को लगती है श्रद्धालुओं की भीड़
    पिता पुत्र के इस प्राचीन मंदिर में शनिवार और सूर्य छठ के अवसर पर श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ लगती है. महिलाएं सूर्य छठ के अवसर पर मंदिर की परिक्रमा लगाती हैं. वर्तमान में इस मंदिर की देखरेख एवं पूजा अर्चना मोहन लाल चतुर्वेदी कर रहे हैं. भगवान सूर्य देव का प्रतिदिन मावे की बर्फी और दल के लड्डू का भोग लगाया जाता है और रविवार के दिन सूर्य देव का विशेष दूध जलेबी का भोग लगाया जाता है. तो वहीं दूसरी ओर शनिवार के अवसर पर भगवान सूर्य के सामने विराजमान उनके पुत्र शनि देव को श्रद्धालु तेल अर्पण करके चना कल-कल, इत्यादि का भोग लगाते हैं

    Tags: Karauli news, Rajasthan news

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