टाइगर के हमले में चरवाहे की मौत के बाद से भय के माहौल में जी रहे ग्रामीण

करौली जिला मुख्यालय के समीप दुर्गेसीघटा इलाके में तीन दिन पहले टाइगर के हमले में चरवाहे की मौत और उसके बाद से क्षेत्र में टाइगर की मौजूदगी से ग्रामीणों की नींद उड़ गई है.

Dharmendra | News18 Rajasthan
Updated: August 2, 2019, 11:48 PM IST
टाइगर के हमले में चरवाहे की मौत के बाद से भय के माहौल में जी रहे ग्रामीण
करौली - टाइगर की मौजूदगी के भय से ग्रामीणों के कामकाज प्रभावित हुए.
Dharmendra | News18 Rajasthan
Updated: August 2, 2019, 11:48 PM IST
करौली जिला मुख्यालय के समीप दुर्गेसीघटा इलाके में तीन दिन पहले टाइगर के हमले में चरवाहे की मौत और उसके बाद से क्षेत्र में टाइगर की मौजूदगी से ग्रामीणों की नींद उड़ गई है. घटना के बाद से अधिकतर बच्चों का स्कूल जाना भी बंद हो गया है. इसके चलते ग्रामीणों के कामकाज प्रभावित हो गए हैं. बता दें कि दुर्गेसीघटा और नाहरदह इलाके में ग्रामीण टाइगर के चलते दहशत में हैं. गांव के लोग यही जानना चाह रहे हैं कि वन विभाग के कर्मी बाघ को पकड़ लिए या नहीं. ग्रामीणों का कहना है कि कोई भी अकेला व्यक्ति रास्ते पर जाने में कतराने लगा है. सामूहिक रूप से लोग करौली सहित आसपास के इलाके में आ जा रहे हैं.

गौरतलब है कि इन इलाकों के बीच घना जंगल और गहरी खाई है. इसी एक खाई में टाइगर ने चरवाहे पर हमला किया था. दुर्गेसीघटा निवासी बबलू ने कहा कि वन विभाग की टीम इलाके में घूम रही है. एक दिन पहले भी टाइगर के पगमार्क नजर आए, उसके बाद टाइगर भी नजर आया. इससे लोगों में भय बना हुआ है. दुर्गेसीघटा के ही पदमसिंह का कहना है कि लोग परेशान हैं. बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. खेतों से भी शाम ढलने से पहले ही लोग घरों को लौट जा रहे हैं. वहीं समीप के नाहरदह इलाके की महिला दुर्गी ने भी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि तीन दिन से लोग न तो चैन से सो पा रहे हैं और न ही कहीं आ-जा पा रहे हैं. हमेशा भय बना रहता है. जब तक टाइगर यहां से चला नहीं जाता, सुकून नहीं मिलेगा.

बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे माता-पिता

बाघ के डर से नाहरदह के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में शुक्रवार को भी ताला लटका नजर आया.


नाहरदह के ही कृष्णबल्लभ ने कहा कि टाइगर के डर से बाहर भी निकलते हैं तो सामूहिक रूप से आ-जा पा रहे हैं. रात को भी नींद नहीं आ पा रही. इसी प्रकार गद्का की चौकी क्षेत्र के निवासी वृद्ध मनोहरी का कहना था कि गुरुवार तक टाइगर इसी इलाके में विचरण कर रहा था. उसने घटना के दिन भी टाइगर को देखा था और कुछ लोगों को भी दिखाया था.

बाघ के डर से नाहरदह के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में शुक्रवार को भी ताला लटका नजर आया. ग्रामीणों ने कहा कि अध्यापक पढ़ाने तो आए, लेकिन टाइगर के भय से बच्चों को स्कूल नहीं आने दिया जा रहा है. स्कूल में करीब 40-50 बच्चे अध्ययनरत हैं. हालांकि दुर्गेसीघटा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में आसपास के बच्चे स्कूल पहुंचे. विद्यालय में 29 बच्चों में से आधे बच्चे ही नजर आए. मगर टाइगर का भय सभी में बना हुआ है.

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First published: August 2, 2019, 11:48 PM IST
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