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सर्कस के अस्तित्व पर मंडराया 'खतरा', 22 साल में 110 हुए बंद
Kota News in Hindi

Shakir Ali | News18 Rajasthan
Updated: January 23, 2020, 9:45 PM IST
सर्कस के अस्तित्व पर मंडराया 'खतरा', 22 साल में 110 हुए बंद
1998 में देश के अलग-अलग हिस्सों में करीब 127 सर्कस थे.

सर्कस (Circus) और उसके कलाकारों की हैरतअंगेज अदाकारी का हर कोई कायल रहता था, लेकिन अब ना सिर्फ सर्कस बल्कि इससे जुड़े लोगों को अस्तित्व बचाने के लिए जंग लड़नी पड़ रही है. जबकि 1998 में देश के अलग-अलग हिस्सों में करीब 127 सर्कस हुआ करते थे जो अब सिर्फ 17 रह गए हैं.

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कोटा. एक लंबे वक्‍त तक सर्कस (Circus) और उसके कलाकारों की हैरतअंगेज अदाकारी सभी के लिए आकर्षण का केन्द्र रही है, लेकिन बदलते दौर ने सर्कस को इतना पीछे छोड़ दिया कि अब ना सिर्फ सर्कस बल्कि इससे जुड़े लोगों को अस्तित्व बचाने के लिए जंग लड़नी पड़ रही है. अगर आपको भारत में सर्कस का इतिहास और उसकी खूबसूरत तस्वीर देखनी हो तो कोचिंग सिटी कोटा (Kota) चले आइए. जी हां, यहां सर्कस एक थीम विषय पर फोटो प्रदर्शनी लगाई गई है जिसमें आपको वो सबकुछ मिलेगा जो अब सर्कस की दुनिया से लगभग गायब सा हो गया है. आपको बता दें कि 1998 में देश के अलग-अलग हिस्सों में करीब 127 सर्कस हुआ करते थे जो अब सिर्फ 17 रह गए हैं.

फोटो प्रदर्शनी ने जीता दिल
कोटा की कलादीर्घा में लगी फोटो प्रदर्शनी में सर्कस की 51 फोटो का कलेक्शन बखूबी प्रदर्शित किया गया है. सर्कस के जोकरों की कलाबाजियों से लेकर उनके हैरतअंग्रेज करतब ओर सर्कस के किरदारों की लाइफ स्टाइल को सालों तक कैमरे में कैद करने के बाद नई पीढी को लुप्त होती इस कला से मुखाबित करवाया जा रहा है. अहमदाबाद के वरिष्ठ फोटाग्राफर जनजीवन प्रेस के डायरेक्टर विवेक देसाई की यह फोटो प्रदर्शनी उनके द्वारा सर्कस को बचाने ओर उसके कलाकारों के दर्द को बंया करती है. चार दिवसीय इस खास प्रदर्शनी को देखने जो भी पहुंच रहा है उनकी सर्कस से जुडी यादें ताजा हो रही हैं. इस खास प्रदर्शनी का नाम सुनते ही रविन्द्र सोलंकी जब पहुचें तो उन्होंने अपने बपचन की यादों को ताजा किया. उन्‍होंने कहा है कि सर्कस को बचाने के लिए सरकार को कोई ठोस कदम उठाना चाहिए ताकि इस अदभूत कला और कलाकारों को सबंल मिल सके. जबकि शहर के फोटोग्राफर राजीव बताते हैं कि किसी एक विषय पर इतना बड़ा और आकर्षक कलेक्शन एक जगह मुहैया होना फोटोग्राफर्स के लिए बड़ी बात है वो भी जब सब्जेक्ट सिर्फ सर्कस हो.

जबकि इस खास को एग्जीबिशन में कोटा हैरिटैज सोसायटी का महत्वपूर्ण योगदान है और सोसायटी के सदस्य मदन मीणा बताते हैं कि कोटा में देशभर से कोचिंग के लिए छात्र आते हैं और ऐसे में इस फोटो प्रदर्शनी के महत्व और खासयित दोनों से उन्‍हें रूबरू करवाना ही मकसद है.

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इस प्रदर्शनी में 20 साल के फोटोग्राफ हैं.


1998 में थे 127 सर्कस
अगर फोटो ग्राफर देसाई की मानें तो साल 1998 में देश के अलग-अलग हिस्सो में करीब 127 सर्कस हुआ करते थे जो अब सिर्फ 17 रह गए हैं. सर्कस की संख्‍या में आई कमी के पीछे वन्य जीवों की सर्कस में रखने की पाबंदी से अहम वजह है, लेकिन इसके बावजूद भी सर्कस में आज भी बहुत कुछ है जो लोगों के मनोरंजन का बड़ा साधन बन सकता है. देश में अभी भी कुछ सर्कस हैं लेकिन डिजिटल दुनिया में वो अब अपने आप को टिकाए रखने में कमजोर से साबित हो रहे हैं. ऐसे में सर्कस को उन जगहों पर नियमित रूप से लगाया जाना चाहिए जहां पयर्टक अच्‍छी संख्‍या में पहुंचते हैं. साफ है कि देश के प्रमुख पयर्टन स्थलों पर सर्कस को भी कुछ जगह मिल जाए तो सर्कस भी बचाए जा सकते हैं और इनसे जुड़े कलाकारों भी. जबकि देसाई अपने फोटो कलेक्शन के बारे में भी बताते हुए कहते हैं कि आज से 20 साल बाद जब कोई सर्कस के बारे में अध्ययन करेगा तो यह फोटोग्राफ उनके लिए मददगार साबित होंगे, लेकिन सर्कस वजूद में रहें तो अच्छा है. 

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First published: January 23, 2020, 9:30 PM IST
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