अपना शहर चुनें

States

कोटा: 9 महीने से बंद है 3000 करोड़ की कोचिंग इंडस्ट्री, शहर का आर्थिक पहिया हुआ जाम

कोटा में एक हॉस्टल में औसतन 5 कर्मचारी भी मानें तो करीब 15 हजार लोगों की नौकरी सिर्फ हॉस्टल्स से जा चुकी है.
कोटा में एक हॉस्टल में औसतन 5 कर्मचारी भी मानें तो करीब 15 हजार लोगों की नौकरी सिर्फ हॉस्टल्स से जा चुकी है.

राजस्थान में कोचिंग सेंटर्स (Coaching centers) नहीं खुलने से हजारों लोगों की नौकरी पर संकट आया हुआ है. अकेले कोचिंग सिटी कोटा शहर (Kota City) में करीब 3000 हॉस्टल्स है ओर 2 हजार से ज्यादा पीजी हैं. इतने ही मैस हैं. कोचिंग सेंटर्स बंद होने से हजारों कर्मचारियों का परिवार प्रभावित है.

  • Share this:
कोटा. केन्द्र सरकार की ओर से कोरोना काल में राज्य की सरकारों को 15 अक्टूबर के बाद हालात के मद्देनजर कोचिंग सेंटर (Coaching centers) शुरू किए जाने के दिए गए निर्णय के बाद कई राज्यों ने अब कोचिंग सेंटर्स खोलने की तारिखों की घोषणाएं कर दी हैं. लेकिन राजस्थान में अब तक इसकी तस्वीर साफ नहीं हुई है. इससे कोचिंग इंडस्ट्री और इस व्यवसाय से जुड़े लोग अब राजस्थान (Rajasthan) में भी कोचिंग संस्थाओं को खोलने की पुरजोर मांग कर रहे हैं. पिछले 9 महीने से कोचिंग सेंटर्स बंद हैं. इससे कोटा की 3000 करोड़ की कोचिंग इंडस्ट्री ठप पड़ी है.

कोटा में हॉस्टर्ल्स संचालकों और निजी कोचिंग संस्थानों सहित अन्य संस्थाओं से जुड़े सदस्यों के संयुक्त मोर्च ने नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द कोचिंग सेंटर्स शुरू करवाने की मांग की है. हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष शुभम अग्रवाल ने बताया है कि हमारे राज्य में कोचिंग शुरू करने में देरी की गई तो इसका सीधा फायदा दूसरे राज्यों के कोचिंग सेंटर को मिलेगा. उन्होंने बताया कि कोरोना काल में कोटा में कोचिंग सेंटर्स की हालत खस्ताहाल है. इस मामले में देरी किए जाने से कोचिंग और हॉस्टल्स इंडस्ट्री को एक ओर बड़ा झटका लगेगा.

निकाय प्रमुख चुनाव: कांग्रेस की बड़ी छलांग, 5 मंत्री और 14 विधायक हुए पास, BJP को भारी नुकसान

3000 हॉस्टल्स है ओर 2 हजार से ज्यादा पीजी हैं


कोटा का आर्थिक पहिया बीते कई महीने से जाम है. हालात यह हैं कि अब कोचिंग और हॉस्टल्स संचालकों के साथ कोचिंग एरिया के व्यापारियों को अपने कर्मचारियों को तनख्वाह देना मुश्किल हो रहा है. कई कर्मचारियों की नौकरी भी चली गई है. चंबल हॉस्टल एसोसिएशन के सचिव राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि कोटा में हर साल करीब 1 लाख 65 हजार स्टूडेंटस कोचिंग के लिए आते हैं. शहर में करीब 3000 हॉस्टल्स है ओर 2 हजार से ज्यादा पीजी हैं. इतने ही मैस हैं.

15 हजार लोगों की नौकरी सिर्फ हॉस्टल्स से जा चुकी है
इन सभी के सामने लोन की किश्त चुकाने का सकंट तो चल ही रहा है. इसके साथ ही एक हॉस्टल में औसतन 5 कर्मचारी भी मानें तो करीब 15 हजार लोगों की नौकरी सिर्फ हॉस्टल्स से जा चुकी है. पीजी और मैस के कर्मचारियो को जोड़ा जाए तो आकंड़ा डराने वाला हो जाता है. यही नहीं कोचिंग संस्थानों में काम करने वालें कर्मचारियों के परिवारों पर भी संकट लगातार गहराता जा रहा है. कोटा में सभी छोटी बड़ी कोचिंग में कुल 5 हजार फैकल्टी और 5 हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं जो बीते कई महीनों से आधी या उससे भी कम सैलरी पर गुजारा कर रहे हैं. जल्द ही कोचिंग सेंटर्स नहीं खोले गये तो हालात भयावह हो सकते हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज