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फिल्म 'भूरा' ने बदली कोटा की कच्ची बस्ती की तकदीर, अब यूट्यूब पर भी हिट

फिल्म 'भूरा' ने बदली कोटा की कच्ची बस्ती की तकदीर, अब यूट्यूब पर भी हिट

शॉर्ट फिल्म 'भूरा' में भिखारी से आईआईटीयन बने बच्चे की छोटी बहन का किरदार निभाने वाली कलाकार.

शॉर्ट फिल्म 'भूरा' में भिखारी से आईआईटीयन बने बच्चे की छोटी बहन का किरदार निभाने वाली कलाकार.

राजस्थान के छोटे से कस्बे रामगंजमंडी के एक युवक की शॉर्ट फिल्म एजुकेशन हब कोटा की कच्ची बस्ती की तकदीर बदलने लगी.

    राजस्थान के छोटे से कस्बे रामगंजमंडी के एक युवक की शॉर्ट फिल्म एजुकेशन हब कोटा की कच्ची बस्ती की तकदीर बदलने लगी.
    थिएटर आर्टिस्ट अभिषेक की इस फिल्म का नाम 'भूरा' है और इसे देखने के बाद कच्ची बस्ती के लोगों में भी शिक्षा की अलख जाग उठी है. इस फिल्म को देख कर कई गरीब, कचरा बीनने वाले बच्चों को भी उनके परिजन स्कूल भेजने लगे हैं. इतना ही नहीं अब अभिषेक की इस फिल्म को इंटरनेट की दुनिया यानि यूट्यूब पर भी खास पसंद किया जाने लगा है. महज चार हफ्तों में इसे 28 हजार से ज्यादा लोग देख चुके हैं.
    बता दें कि रामगंजमंडी के अभिषेक तिवाड़ी द्वारा लिखित और निर्देशित शिक्षाप्रद फिल्म 'भूरा' एक भिखारी बच्चे के शिक्षा प्राप्त कर आईआईटीएन बनने पर आधारित है. इस फिल्म की ज्यादातर शूटिंग रामगंजमंडी, कोटा और उदयपुर में ही हुई है.



    (फोटो- शॉर्ट फिल्म देख कर रानू के परिवार वाले भी उसे स्कूल भेजने लगे हैं.)
    क्या खास है फिल्म 'भूरा' में ?
    भूरा एक भीख मांगने वाले बच्चे पर आधारित है जिसका समाज उस वर्ग के सभी बच्चों को शिक्षा से वंचित रखता है. यदि कोई व्यक्ति अपने बच्चे को स्कूल भी भेजता है तो समाज से बाहर कर देता है. इस फिल्म में दिखाया जाता है कि जब भूरा किसी शिक्षक की प्रेरणा से स्कूल जाने लगता है तो उसे भी विरोध झेलना पड़ता है. उसे भी अपनों की उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है और घर से बाहर निकाल दिया जाता है.



    (फोटो- इस स्कूल में नया जीवन शुरू कर चुके हैं कच्ची बस्ती के बच्चे.)
    लेकिन घर से निकाले जाने के बाद मुख्य किरदार यानि भूरा को साथ मिलता है गांव की स्कूल के पीटीआई शर्मा का. जो उसे गोद लेके आईआईटी की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं. कई विपरीत परिस्थितियों का सामना करके भी भूरा आखिरकार एक आईआईटीयन बन ही जाता है.

    इस फिल्म ने बदली रामगंजमंडी की कच्ची बस्ती की तकदीर:



    (फोटो- शॉर्ट फिल्म देखने के बाद कचरा बीनने वाली सपना अब स्कूल जाने लगी है.)
    इस फिल्म को देखकर रामगंजमंडी की कच्ची बस्ती रोसली के एक दो नहीं पूरे 18 बच्चे स्कूल जाने लगे हैं. यह बच्चे भीख मांगने और कचरा बीनने जैसा कार्य करते थे. अब बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजाला आ चूका है और ये बच्चे भी अब डॉक्टर और इंजीनियर बनने के सपने संजोने लगे हैं.


    (फोटो- शॉर्ट फिल्म के लेखक और निर्माता अभिषेक तिवारी)

    Tags: Kota news, Rajasthan news

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