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कोटा में फंसे अन्य राज्यों के छात्रों की घर वापसी को केंद्र की मंजूरी, जल्‍द होंगे रवाना

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए इस राज्य ने की खास पहल, Google Map कर रहा मदद
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मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने कहा है कि राजस्थान के कोटा में 4000 छात्र हैं, उनको  भी जल्द उनके गृह जिले में भेजने की व्यवस्था की जा रही है. 

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जयपुर. कोटा (Kota) में फंसे अन्य राज्यों के छात्रों की घर वापसी का रास्ता साफ हो गया है. कोचिंग के लिए दूसरे राज्‍यों से कोटा आए छात्रों को वापस भेजने के लिए केंद्र सरकार ने अनुमति दे दी है. सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि  मध्‍य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, पश्चिम बंगाल और असम सहित सभी राज्य अपने छात्रों को वापस ले जाने को तैयार है.  आज ही पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी से बात हुई है. असम के सीएम से बात हुई थी, उनके मंत्री भी यहां आ रहे हैं.

उन्‍होंने बताया कि राजस्थान (Rajasthan) के कोटा में 4000 छात्र हैं, उनको  भी जल्द उनके गृह जिले में भेजने की व्यवस्था की जा रही है.  सीएम ने वीसी के जरिए मीडिया से बातचीत में कहा कि  विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर कोटा में कोचिंग के लिए रह रहे छात्रों को गृह राज्य पहुंचाने के योजना पर काम किया जा रहा है. मध्यप्रदेश. छत्तीसगढ़. पश्चिम बंगाल. आसाम और गुजरात के मुख्यमंत्रियों ने इस पर सहमति दे दी है. जल्द ही इन राज्यों के छात्र अपने घर के लिए रवाना होंगे.

प्रवासी राजस्थानियों को भी घर आने का मौका मिले
सीएम  अशोक गहलोत ने केंद्रीय गृहमंत्री आमिट शाह से फोन पर बात कर प्रस्ताव दिया है कि लॉकडाउन के चलते राजस्थान में अटके प्रवासियों और विभिन्न प्रदेशों में रह रहे राजस्थानियों को एक बार अपने घर जाने का मौका दिया जाए. गृहमंत्री ने इस पर मंत्रालय के अधिकारियों से बात कर सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया है.
गृहमंत्री शाह ने दिया मुख्‍यमंत्री  गहलोत को आश्‍वासन


सीएम गहलोत ने कहा कि पूरे देश में लोग फंसे हुए हैं और उनकी घर जाने की मांग पर संवेदशीलता के साथ निर्णय करने की जरूरत है. केन्द्र सरकार से इस विषय पर कई बार चर्चा की गई है. अब सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री से भी फोन पर गंभीर विमर्श हुआ है. उन्होंने कहा कि राजस्थान के प्रवासी अपने गृह राज्य से गहरा लगाव रखते हैं और सुख-दुख में हमेशा आते-जाते रहते हैं. इसीलिए देशभर में जो प्रवासी राजस्थानी हैं. राज्य सरकार उन्हें भी एक बार अपने गांव आने का अवसर देने के लिए प्रयासरत है.

 
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