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Rajasthan: कोटा के सपूत BSF DIG प्रभाकर जोशी को मिली गुरदासपुर सेक्टर की सुरक्षा की जिम्मेदारी

असम के बरपेटा जिले में एक मुठभेड़ में सात उल्फा उग्रवादियों को मार गिराने के बाद प्रभाकर जोशी को राष्ट्रपति की ओर से वीरता पदक से सम्मानित किया गया था.

BSF DIG Prabhakar Joshi posted on Gurdaspur sector: कोचिंग सिटी कोटा के जांबाज अधिकारी प्रभाकर जोशी को भारत-पाकिस्तान सीमा (India-Pakistan border) के अति संवेदनशील इलाके गुरदासपुर सेक्टर की सरहदों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

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कोटा. कोचिंग सिटी कोटा (Coaching City Kota) का वीरता और साहस के क्षेत्र में भी नाम लगातार आगे बढ़ता जा रहा है. यहां के वीर देश की सरहदों की रक्षा पूरी जिम्मेदारी से कर रहे हैं. यही कारण है कि इन्हें अहम् जिम्मेदारियां दी जा रही हैं. इसी कड़ी में पिछले दिनों कोटा के आरकेपुरम निवासी प्रभाकर जोशी (BSF DIG Prabhakar Joshi) को सीमा सुरक्षा बल ने उपमहानिरीक्षक के रूप में अति संवेदनशील माने जाने वाले पंजाब के गुरदासपुर सेक्टर (Gurdaspur sector) की जिम्मेदारी सौंपी है.

अभी तक पश्चिम बंगाल के कूचबिहार सेक्टर में उप महानिरीक्षक के पद पर तैनात प्रभाकर जोशी ने गौ और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बहुत प्रभावी तरीके से कार्रवाइयां की है. कोटा के जांबाज अधिकारी प्रभाकर जोशी की सेवाओं से प्रभावित होकर उन्हें भारत-पाकिस्तान सीमा के अति संवेदनशील इलाके गुरदासपुर की सरहदों की सुरक्षा की जिम्मेदारी के लिए उपमहानिरीक्षक पद पर तैनात किया गया है.

करतारपुर कॉरीडोर की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी इन्हीं के अधीन होगी
यह इलाका पठानकोट स्थित वायु सेना के अड्डे पर हुए आतंकवादी हमले के बाद बहुत संवेदनशील माना गया है. हाल में ही बने पवित्र करतारपुर कॉरीडोर (Kartarpur Corridor) की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी इन्हीं के अधीन होगी. पाकिस्तान की ओर से लगातार इस इलाके में ड्रोन द्वारा हथियार गिराने समेत ड्रग्स और आतंकवादी भेजने की कायराना करतूत की जाती रही हैं.

सात उल्फा उग्रवादियों को मार गिरा चुके हैं
कोटा में पैदा हुए और पले पढ़े आरकेपुरम निवासी प्रभाकर जोशी के छोटे भाई दिवाकर जोशी राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी में डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर तैनात हैं. उनके मुताबिक प्रभाकर जोशी इससे पूर्व आंतरिक सुरक्षा में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं. वे कश्मीर और असम तक अपनी बहादुरी की धाक जमा चुके हैं. असम के बरपेटा जिले में एक मुठभेड़ में सात उल्फा उग्रवादियों को मार गिराने के बाद प्रभाकर जोशी को राष्ट्रपति की ओर से वीरता पदक से सम्मानित किया गया था.

संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना में भी दे चुके हैं सेवाएं
प्रभाकर कश्मीर के लालचौक व बटमालू जैसे इलाके में भी 1993 से 1996 तक तैनात रहे हैं. अल उमर तंजीम के सरगना अख्तर चाचा समेत कई आतंकवादी मारने और भारी मात्रा में हथियार पकड़ने में भी कामयाब रहे थे. प्रभाकर जोशी संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना में भी वर्ष 2000 से 2001 तक कोसोवो की राजधानी प्रीस्टिना में रहे. उन्हें 2014 में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) में कार्य के लिए राष्ट्रपति के सराहनीय पदक से नवाजा गया था.
Published by:Sandeep Rathore
First published: