कोटा: ऑक्सीजन सिलेंडर बदलते-बदलते हाथों में पड़ गए छाले, फिर भी डटे हैं कोरोना वॉरियर्स

आपात परिस्थितियों में इसका इस्‍तेमाल गंभीर रूप से बीमार कोरोना मरीजों के लिए किया जाता है. (सांकेतिक फोटो)

आपात परिस्थितियों में इसका इस्‍तेमाल गंभीर रूप से बीमार कोरोना मरीजों के लिए किया जाता है. (सांकेतिक फोटो)

Corona warriors's story : कोचिंग सिटी कोटा में 24 ठेका मजदूर ऑक्सीजन प्लांट में दिन रात काम कर रहे हैं. वे अपने घर नहीं जा रहे हैं. सुबह का खाना रात को तो कभी रात का खाना सुबह 3-4 बजे खा रहे हैं.

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कोटा. ऑक्सजीन की किल्लत के कारण हाहाकार मचा हुआ है. ऐसे कठिन समय में कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर को मरीज तक लाने ले जाने वाले कोरोना वॉरियर दिन रात मरीजों की जान बचाने में जुटे हुए हैं.

कोटा में विकट हालातों में कुछ लोग ऐसे हैं जो एक-दो नहीं सैकड़ों जिंदगियों की डोर अपने हाथ में थामे हुए हैं. ये दिन रात मेहनत कर रहे हैं. पलक तक नहीं झपकाते हैं. 24 घण्टे अलर्ट मोड पर रहकर काम कर रहे हैं. मरीजों की जान बचाने के लिये ऑक्सीजन प्लांट में लगातार ऑक्सीजन सिलेंडर बदल रहे हैं. क्योंकि एक-एक क्षण लोगों के जीवन के लिए कीमती है.

ठेकाकर्मी बचा रहे हैं जीवन

लोगो की जान बचाने की मुहिम में ये ठेकाकर्मी मानवता की मिसाल कायम कर रहे हैं. करीब 24 ठेका श्रमिक ऑक्सीजन प्लांट में रात दिन काम कर रहे हैं. . सुबह का खाना रात को तो कभी रात का खाना सुबह 3-4 बजे खा रहे हैं. उनकी आंखों में जलन होने लगी है. चेहरे मुरझा चुके हैं. लेकिन उसके बाद भी वे लोगों को निरंतर सांसें दें रहे हैं. ऑक्सीजन सिलेंडर उठाते और बदलते हुए कई मजदूरों के हाथ में छाले पड़ गए हैं.
ऑक्सीजन प्लांट ही बना घर

प्लांट में काम करने वाले गोविंद, सुरेंद्र और जोरावर ने बताया कि ठेका श्रमिकों को दो माह से वेतन नहीं मिला है. ऐसे में उन्हें उधार पैसे लेकर अपने घर का खर्च चलाने को मजबूर होना पड़ रहा है. उनका कहना है कि वे सुबह से लेकर रात तक बिना कुछ खाए पिए काम कर रहे हैं. लेकिन ठेकेदारने दो माह से वेतन नहीं दिया है. उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया है, लेकिन उसके बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है.

24 घण्टे में 15 से 20 गाड़िया आती हैं



प्लांट के इंचार्ज संविदाकर्मी प्रेम शंकर मीणा ने बताया कि कोविड अस्पताल में 24 घण्टे में 15 से 20 गाड़ियां आती हैं. इनमें लगभग 1500 सिलेंडर प्रतिदिन आ रहे हैं. पूरे अस्पताल में 24 कर्मचारी अपनी पूरी क्षमता से कम कर रहे हैं. सिलेण्डर को लगाना, ऑक्सीजन सप्लाई को निरंतर चेक करना और सिलेंडर को बाहर से अंदर लाना. कही भी कोई समस्या आए तो पॉइंट तक जाना और उस समस्या को ठीक करना. ये ठेका श्रमिक महज पांच हजार की नौकरी में काम कर रहे हैं. पता चला है कि कोटा के तीन प्लांटों में केवल एक कर्मचारी भैरूलाल ही परमानेंट है.
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