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COVID-19: कोटा में बहू को कोरोना पीड़ित बताकर घर से निकाला, ससुरालियों पर मामला दर्ज

महिला का कहना है कि उसे टाइफाइड हो गया था. इसका उसने अपने जेवर बेचकर इलाज करवाया. अब वो पूरी तरह से स्वस्थ है.
महिला का कहना है कि उसे टाइफाइड हो गया था. इसका उसने अपने जेवर बेचकर इलाज करवाया. अब वो पूरी तरह से स्वस्थ है.

दुनियाभर में कहर ढा रहा कोरोना (COVID-19) अब रिश्तों पर भी भारी पड़ने लगा है. ऐसा ही एक मामला कोटा (Kota) में सामने आया है, जहां एक बहू (Daughter-in-law) को उसके सुसराल पक्ष के लोगों ने कोरोना पीड़ित बताकर घर से बाहर निकाल दिया.

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कोटा. दुनियाभर में कहर ढा रहा कोरोना (COVID-19) अब रिश्तों पर भी भारी पड़ने लगा है. ऐसा ही एक मामला कोटा (Kota) में सामने आया है, जहां एक बहू (Daughter-in-law) को उसके सुसराल पक्ष के लोगों ने कोरोना पीड़ित बताकर घर से बाहर निकाल दिया. पीड़ित बहू ने अब अपने बचाव के लिए अब पुलिस की शरण ली है. उसने महिला थाने में अपनी सास, ननद और पति के खिलाफ मामला दर्ज कराया है. पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है.

टाइफाइड हो गया तो जेवर बेचकर इलाज कराया
जानकारी के अनुसार मामला कोटा शहर के कुन्हाडी थाना इलाके से जुड़ा हुआ है. क्षेत्र में रहने महिला ने महिला थाने में एफआईआर देकर सुसराल पक्ष पर उसे घर से बाहर निकाल देने का मामला दर्ज कराया है. महिला का कहना है कि उसे टाइफाइड हो गया था. इसका उसने अपने जेवर बेचकर इलाज करवाया. अब वो पुरी तरह से स्वस्थ है, लेकिन सुसराल पक्ष के लोग उसे नहीं अपना रहे हैं और वह दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो रही है.

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पहले दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे


मूलतया बारां जिले के मांगरोल इलाके की निवासी इस महिला ने बताया कि उसकी शादी वर्ष 2009 में कुन्हाडी निवासी भुवरेश मीणा से हुई थी. शादी के कुछ दिन बाद ही सास और ननद ने उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. बीमार होने के कारण वह कमजोर हो गई तो सुसराल पक्ष के लोगों ने उसे कोरोना पीड़ित बताते हुए घर से बाहर निकाल दिया. महिला थानाप्रभारी चंद्रज्योति का कहना है कि पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है. पूरे मामले की जांच की जा रही है.

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भीलवाड़ा में इससे ज्यादा खौफनाक मामला सामने आ चुका है
उल्लेखनीय है कि कोरोना के खौफ के चलते पूर्व में भीलवाड़ा में एक ऐसा मामला भी सामने आ चुका है, जहां एक बीमार मासूम की मौत के बाद उसका शव महज इसलिए घंटों पड़ा रहा था, क्योंकि परिजनों का शक था कि वह कोरोना पीड़ित थी. बाद में उस शव को इलाके के एसडीएम ने खुद मौके पर पहुंचकर अपने हाथों से अंतिम संस्कार किया.
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