Positive India: कोटा के युवा उद्यमी ने किया कमाल, फैक्ट्री को ऑक्सीजन प्लांट में बदल डाला, प्रशासन को सौंपा

इस तरह के प्लांट को तैयार करने में 3 से 4 महीने का वक्त लगता है लेकिन दिल्ली से आई टीम ने 24 घंटे काम कर 15 से 20 दिन में इसे तैयार कर डाला.

इस तरह के प्लांट को तैयार करने में 3 से 4 महीने का वक्त लगता है लेकिन दिल्ली से आई टीम ने 24 घंटे काम कर 15 से 20 दिन में इसे तैयार कर डाला.

Unique positive initiative of young entrepreneur in Kota : कोटा के उद्यमी ने कोरोना काल में मचे ऑक्सीजन संकट से निजात दिलाने के लिये अपनी कारोबार को एक तरफ कर मानवता के नाते अपनी फैक्ट्री को ऑक्सीजन प्लांट में बदल डाला.

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कोटा. कहते हैं जहां चाह है वहां राह है. कोरोना की दूसरी लहर (Second wave of corona) के बीच देश और प्रदेश में प्राणवायु ऑक्सीजन का संकट (Oxygen crisis) को लेकर चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है. इस संकट से निपटने के लिये कोचिंग सिटी कोटा के एक उद्यमी ने अनूठा कदम उठाते हुये बड़ा कमाल किया है. इस उद्यमी ने अपनी फैक्ट्री को कुछ ही दिनों में दिल्ली के विशेषज्ञों की टीम की मदद से ऑक्सीजन प्लांट में तब्दील करवा डाला.

इससे पहले यह फैक्ट्री दूसरी गैस का उत्पादन कर बाजार में सप्लाई करती थी. लेकिन कोरोना संक्रमण के बिगड़ते हालात में जैसे ही ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार मचा तो युवा उद्यमी ने अपने व्यवसाय को एक तरफ कर जन सेवा में मानवता की मिसाल देते हुए अपनी फैक्ट्री को ऑक्सीजन प्लांट में तब्दील करवा लिया. अब यहां प्रतिदिन ऑक्सीजन के 150 से अधिक सिलेंडर्स का उत्पादन हो रहा है. उद्यमी ने ऑक्सीजन प्रबंधन के लिए प्लांट को जिला प्रशासन को सौंप दिया है.

200 ऑक्सीजन सिलेंडर का उत्पादन करने की कोशिश कर रहे हैं


कोटा के रामपुर औद्योगिक क्षेत्र के पास भीमपुरा में आकाश नाम से संचालित प्लांट के मालिक राजेश अग्रवाल ने बताया कि संकट की इस घड़ी में हमने अपने तमाम दूसरे गैस उत्पादन मैटेरियल्स के काम को बंद कर ऑक्सीजन प्लांट को तैयार करवा लिया है. बकौल राजेश वे जिला प्रशासन का सहयोग करना चाहते हैं. हम उद्योग जगत से जुड़े लोगों को भी इस संकट की घड़ी में अपना मानवता का धर्म निभाना चाहिए. अब हम यहां से 200 ऑक्सीजन सिलेंडर का उत्पादन करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को संकट की इस घड़ी में राहत मिल सके.
24 घंटे काम कर 15 से 20 दिन में तैयार किया प्लांट

राजेश अग्रवाल ने औद्योगिक क्षेत्र के अन्य उद्यमियों से भी अपील की है कि वह भी अपने प्लांटों को ऑक्सीजन प्लांट में तब्दील करवाकर संकट की इस घड़ी में मानवता का धर्म निभायें. प्लांट को तैयार करने आए विशेषज्ञों की टीम के सदस्य कपिल शर्मा ने बताया कि वैसे तो इस तरह के प्लांट को तैयार करने में 3 से 4 महीने का वक्त लगता है लेकिन हमने 24 घंटे काम कर 15 से 20 दिन में इस प्लांट को तैयार कर दिया है. कोशिश है कि इसमें उत्पादन की क्षमता में बढ़ोतरी की जाए. हमारे पास देश के अन्य क्षेत्रों से भी ऑक्सीजन प्लांट को तैयार करने के लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं. जिला प्रशासन ने प्लांट में तैयार होने वाले ऑक्सीजन सिलेंडर्स को अस्पतालों में सप्लाई के लिए अधिग्रहित कर लिया है.
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