Kota News: जेल की काल कोठरी में महिला कैदी को मिली जिंदगी की नई रोशनी, जानिये कैसे

कैदी कैलाशी बाई गत तीन बरसों में करीब 32 बार कोटा के एमबीएस अस्पताल ले जाया गया. यही नहीं तीन बार कैलाशी बाई को ऑपरेशन थियेटर से भी बिना ऑपरेशन के बाहर लाना पड़ा.

कोटा जेल प्रशासन ने मानवता की नई मिसाल कायम (Precedent) की है. यहां जेल प्रशासन ने एक बुजुर्ग महिला कैदी की आंखों का ऑपरेशन करवाकर उसे जिंदगी की नई रोशनी दी है.

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कोटा. कहते है अंधरे ने अंधरे से कहा ''रोशनी से कर लो किनारा, अगर किसी दिन रोशनी आ गई तो मिटेगा नामों निशां हमारा तुम्हारा''. ये पंक्तियां कोटा जेल (Kota Jail) की काल कोठरी से आ रहे रोशनी के एक संदेश पर सटीक बैठती है. यहां जेल प्रशासन ने मानवीय पहल की मिसाल कायम करते हुए एक बुजुर्ग महिला बंदी (Elderly female prisoner) की जिदंगी को रोशन कर उसकी खोई हुई आंखों की रोशनी को लौटा दिया है.

कोटा की महिला जेल में बंद 65 साल की बुजुर्ग कैलाशी बाई वर्ष 2006 से मर्डर केस में आजीवन कारावास की सजा काट रही है. इस दौरान मोतियाबिंद होने से उसकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई थी. बुजुर्ग कैलाशी बाई पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हो गई थी. जेल प्रशासन ने उम्र के इस पड़ाव पर कैलाशी बाई के आंखों के ऑपरेशन के लिए जब प्रयास किये तो काफी मुश्किलें सामने आईं. उसे गत तीन बरसों में करीब 32 बार कोटा के एमबीएस अस्पताल ले जाया गया. यही नहीं तीन बार कैलाशी बाई को ऑपरेशन थियेटर से भी बिना ऑपरेशन के बाहर लाना पड़ा. लेकिन जेल प्रशासन ने हिम्मत नहीं हारी. उसने कैलाशी बाई की आंखों की रोशनी लौटाने के अपने इरादों को पूरी शिद्दत के साथ निभाया.

जेल की पेहरेदार को भी उसके साथ रखा गया
इसके लिये बकायदा जेल के चिकित्सकों ने समय समय पर कैलाशी बाई चेकअप किया. फिर उसे ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया. यही नहीं कैलाशी बाई के साथ जेल की उस पहरेदार को भी अस्पताल में रखा गया जिसकी आवाज और अहसास को वह भलीभांति महसूस कर सकती थी. ताकि उसको अस्पताल में किसी तरह की कोई घबराहट ना हो. अब कैलाशी बाई जेल की उसी चारदीवारी में घूमकर अपनी आंखों से आसपास की दुनिया को सूकून के साथ निहार रही है.

कैलाशी बाई की सजा भी जल्द ही पूरी होने वाली है
कैलाशी बाई कोटा के इटावा क्षेत्र की रहने वाली है. अब उसकी सजा भी जल्द ही पूरी होने वाली है. लेकिन जिदंगी में छाये अंधरे से उजाले की ओर आई कैलाशी बाई को जेल परिसर में घूमते देख जेल प्रशासन भी अपनी इच्छा शक्ति पर खुशी महसूस कर रहा है. फिलहाल कैलाशी बाई की एक आंख का सफल ऑपरेशन हो गया है. उसकी दूसरी आंख का भी जेल प्रशासन चिकित्सकों की सलाह के बाद ऑपरेशन करवाने का इंतजार कर रहा है. जेल अधीक्षक सुमन मालीवाल ने बताया कि कोटा जेल बीतों कई दिनों से कैदियों के लिए किए जा रहे नवाचारों से प्रदेशभर में अपनी पहचान बनाने में सफल रही है. यह एक सुखद अहसास है.