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Kota News: राजस्थान में पहली बार रोबोट के जरिये जांची जा रही है बड़े बांधों की मजबूती, जानिये कैसे

चेन्नई से आई तकनीकी टीम के सदस्य कार्तिक बताते हैं कि इस रोबोट में स्पेशल कैमरा फिट है. उसमें पानी के भीतर जाने की अचूक क्षमता है.

चेन्नई से आई तकनीकी टीम के सदस्य कार्तिक बताते हैं कि इस रोबोट में स्पेशल कैमरा फिट है. उसमें पानी के भीतर जाने की अचूक क्षमता है.

चंबल नदी (Chambal River) पर बने राजस्थान के तीन बड़े बांधों की पहली बार रोबोट (Robot) के जरिये जांच (Investigation) करवाई जा रही है. यह रोबोट पानी में 60 से 80 फीट की गहराई तक जाकर इसकी तस्वीरे कमांड सेंटर को भेज रहा है.

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कोटा. राजस्थान में पहली बार चंबल नदी (Chambal River) पर बने तीन बड़े बांध राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज (Rana Pratap Sagar- Jawahar Sagar and Kota Barrage) की पानी के भीतर की मजबूती और बांध के मौजूदा हालात की जांच रोबोट (Robot) कर रहा है. चेन्नई से आई एक तकनीकी विशेषज्ञों की टीम इन दिनों कोटा बैराज बांध की मजबूती का परीक्षण कर रही है. पानी के भीतर रोबोट को भेजा जा रहा है जो बांध की दीवारों की टूट-फूट के साथ गेटों की मौजूदा स्थिति की तस्वीरें बखूबी ले रहा है.

जल संसाधन एवं सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता ए जे अंसारी ने बताया कि चंबल नदी पर बने इन बांधों की उम्र करीब 60 साल हो गई है. इसलिये बांधों की बॉडी का परीक्षण करना अनिवार्य था. इससे पहले भी बांधों की बॉडी का परीक्षण किया गया था लेकिन वह प्रक्रिया काफी धीमी थी और उसके रिजल्ट भी देरी से आ रहे थे. रोबोट की ओर से किए जा रहे बांधों के परीक्षण से एक्यूरेट नतीजे आ रहे हैं.

वर्ल्ड बैंक की योजना के तहत इनका जीणोद्धार करवाया जायेगा
बांधों की स्थिति की तकनीकी टीम की ओर से रिपोर्ट दिए जाने के बाद इनके रखरखाव के लिए बजट बनाकर सरकार को भेजा जाएगा. इससे पूर्व बांधों के दरवाजों का हेल्थ असेसमेंट करवाया गया है. इसमें बांधों के गेटों की थिकनेस और उनकी मजबूती तथा कई जगहों पर गड्ढे होने के प्रमाण मिले हैं. इनकी मरम्मत के लिए कोटेशन बनाकर सरकार को भेज दिया गया है. जल्द ही चंबल नदी पर बने इन तीनों बांधों का जीणोद्धार का कार्य वर्ल्ड बैंक की योजना के तहत करवाया जायेगा.
60 से 80 मीटर गहराई तक जाकर पिक्चर ले रहा है रोबोट


चेन्नई से आई तकनीकी टीम के सदस्य कार्तिक बताते हैं कि इस रोबोट में स्पेशल कैमरा फिट है. उसमें पानी के भीतर जाने की अचूक क्षमता है. यह 60 से 80 मीटर तक पानी के भीतर की वीडियो और तस्वीरें लेकर सीधे कमांड सेंटर तक पहुंचा रहा है. इससे इस बात का अंदाजा हो जाता है कि कितनी गहराई पर बांध की बॉडी क्षतिग्रस्त है. रोबोट 24 घंटे पानी में रहकर बांध के कंक्रीट वाले इलाके की पुख्ता और साफ तस्वीरें उपलब्ध करवा रहा है. कोटा बैराज से पहले राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर पर किए गए रोबोट के प्रयोग के सार्थक परिणाम आए हैं. इसकी रिपोर्ट हमने विभाग को दे दी है.
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