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कोटा बैराज ने पानी निकासी का बनाया नया 'रिकॉर्ड', पहली बार छोड़ा इतना पानी

News18 Rajasthan
Updated: September 16, 2019, 6:19 PM IST
कोटा बैराज ने पानी निकासी का बनाया नया 'रिकॉर्ड', पहली बार छोड़ा इतना पानी
कोटा बैराज बांध से चंबल नदी में रविवार रात करीब 2 बजे 7 लाख 9 हजार क्यूसेक पानी छोड़ना शुरू किया गया. फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

करीब छह दशक पहले चंबल नदी पर कोटा (Kota) में बने कोटा बैराज बांध (Kota Barrage Dam) ने पानी की निकासी का रविवार रात को नया रिकॉर्ड (New record) बना दिया. बांध से चंबल नदी (Chambal River) में रविवार रात करीब 2 बजे 7 लाख 9 हजार क्यूसेक (7 lakh 9 thousand cusecs) पानी छोड़ना शुरू किया गया है.

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कोटा. करीब छह दशक पहले चंबल नदी पर कोटा (Kota) में बने कोटा बैराज बांध (Kota Barrage Dam) ने पानी की निकासी का रविवार रात को नया रिकॉर्ड (New record) बना दिया. कोटा बैराज बांध से चंबल नदी (Chambal River) में रविवार रात करीब 2 बजे 7 लाख क्यूसेक पानी की निकासी का आंकड़ा पार करते हुए 7 लाख 9 हजार क्यूसेक (7 lakh 9 thousand cusecs) पानी छोड़ना शुरू किया गया. यह सिलसिला सोमवार को शाम तक जारी रहा है. बांध से इतनी भारी मात्रा में पहली बार (first time) पानी छोड़ा जा रहा है.

1960 में बनाया गया था कोटा बैराज बांध
चंबल सिंचाई परियोजना के तहत कोटा में चंबल नदी पर वर्ष 1960 में कोटा बैराज बांध बनाया गया था. लेकिन आज तक बांध से चंबल नदी में इतनी भारी मात्रा में पानी की निकासी नहीं की गई, जितनी रविवार रात शुरू की गई. कोटा बैराज बांध से चंबल नदी में रविवार रात करीब 2 बजे 7 लाख 9 हजार क्यूसेक पानी छोड़ना शुरू किया गया. यह सिलसिला सोमवार को शाम तक तक जारी है. इससे पहले वर्ष 1986 में अधिकतम पानी छोड़ने का रिकॉर्ड था. उस समय बैराज से रिकॉर्ड 6 लाख 83 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था. उसके बाद उससे भी ज्यादा पानी अब छोड़ा गया है. इससे चंबल अपने पूरे उफान पर आ गई है.

चंबल नदी पर बने बांधों पर एक नजर

गांधीसागर बांध- वर्ष 1959 में बना. इसकी भराव क्षमता 1312 फीट है. इससे 115 मेगावाट इससे पन बिजली उत्पादित होती है. यह मध्यप्रदेश के मंदसौर में बना हुआ है. इसमें कुल 19 गेट हैं.
राणाप्रताप सागर बांध- वर्ष 1970 में बना. इसकी भराव क्षमता 1157.50 फीट है. इससे 172 मेगावाट पन बिजली उत्पादित होती है. यह बांध चितौड़गढ़ जिले के रावतभाटा में बना हुआ है. इसमें 17 गेट हैं.
जवाहर सागर बांध- वर्ष 1972 में बना. यह बूंदी जिले में है. इसकी भराव क्षमता 980 फीट है. इससे 99 मेगावाट पन बिजली उत्पादित होती है. इसमें 12 गेट हैं.
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कोटा बैराज बांध- वर्ष 1960 में बना. इसकी भराव क्षमता 854 फीट है. यह कोटा में बना हुआ है. इसमें 19 गेट हैं. इस बांध से हाड़ौती अंचल में 2 लाख 29 हजार हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है. इतनी ही जमीन मध्यप्रदेश में सिंचित होती है. इन सभी बांधों में दो तरह के गेट हैं. इनमें छोटे स्लूज गेट (इमरजेंसी) और बड़े गेट शामिल हैं.

(रिपोर्ट- अर्जुन अरविंद)

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First published: September 16, 2019, 4:58 PM IST
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