कोटा कोचिंग को दुनिया में पहचान दिलाने वाले कोचिंग गुरु वीके बंसल का निधन, कोरोना से संक्रमित थे

बंसल कोटा जेके सिंथेटिक उद्योग में सहायक इंजीनियर थे. मस्कुलर डिस्ट्रोफी नामक बीमारी के कारण सन 1991 में उन्होंने रिटायरमेंट लिया था.

बंसल कोटा जेके सिंथेटिक उद्योग में सहायक इंजीनियर थे. मस्कुलर डिस्ट्रोफी नामक बीमारी के कारण सन 1991 में उन्होंने रिटायरमेंट लिया था.

Kota Coaching founder VK Bansal passed away : कोटा को देश दुनिया में कोचिंग हब के रूप में स्थापित करने वाले कोचिंग गुरु वीके बंसल का निधन हो गया है. वे कोरोना से संक्रमित थे. बंसल के निधन से कोटा में शोक की लहर छा गई है.

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कोटा. देश और दुनिया में कोटा कोचिंग क्लासेज (Kota Coaching Classes) को पहचान दिलाने वाले कोचिंग गुरु वीके बंसल का निधन (Coaching guru VK Bansal passed away) हो गया है. बंसल कोविड-19 के संक्रमण से संक्रमित थे. इलाज के दौरान सोमवार का उनका निधन हो गया. बंसल के निधन की खबर मिलने के बाद कोचिंग इंडस्ट्रीज शहर में शोक की लहर छा गई. वीके बंसल का निधन की खबर जैसे-जैसे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही है वैसे-वैसे उनके जानने वाले परिचित और उनके स्टूडेंट उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी दिवंगत हुए वीके बंसल को श्रद्धांजलि दी है. लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि बंसल क्लासेज के निदेशक वीके बंसल का निधन समूचे शैक्षणिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. उन्होंने अपना जीवन शिक्षा की उन्नति और विद्यार्थियों के उन्नयन को समर्पित किया. उनसे पढ़े हजारों विद्यार्थी विश्व में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें.

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बंसल ने लालटेन की रोशनी में पढ़ाई की थी
आपको बता दें कि वीके बंसल को कोटा कोचिंग गुरु कहा जाता है. चंबल नदी के किनारे बसा कोटा शहर देश दुनिया में आईआईटी और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी का गुरुकुल है. मौजूदा दौर में कोचिंग इंडस्ट्रीज 3000 करोड़ रुपए की है. इसकी नींव रखने वाले वीके बंसल ने लालटेन की रोशनी में पढ़ाई की थी. कोचिंग क्लासेज के जनक वीके बंसल के स्टूडेंट उनके लिए कहते हैं कि सर हमेशा परिश्रम को तवज्जो देते थे. कोटा कोचिंग की बुनियाद का श्रेय वीके बंसल को जाता है. उन्होंने अब तक करीब 20 हजार आईआईटियन देश को दिए हैं.

संघर्ष के साथ स्टूडेंट्स को देते थे सफलता का मंत्र

बंसल कोटा जेके सिंथेटिक उद्योग में सहायक इंजीनियर थे. मस्कुलर डिस्ट्रोफी नामक बीमारी के कारण सन 1991 में उन्होंने रिटायरमेंट लिया था. उन्होंने बंसल क्लासेज की शुरुआत बहुत छोटे स्तर पर की थी. नौकरी के दौरान भी वे घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया करते थे. पहले साल में बंसल के 10 स्टूडेंट का आईआईटी में चयन हुआ था. उसके दूसरे साल उनके 50 स्टूडेंट आईआईटी में चयनित हुए थे. इसके बाद कोटा आईआईटी और मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम की स्टूडेंट को बेहतर तैयारी कराने वाली फैक्ट्री के रूप में देश दुनिया में अपनी पहचान को आगे बढ़ाता गया.



कोटा शहर देश का सबसे बड़ा कोचिंग हब है

बंसल की सफलता से प्रभावित होकर और उनको अपना आदर्श मानकर कोटा में एक के बाद एक कोचिंग क्लासेज खुलते चले गए. आज कोटा शहर देश का सबसे बड़ा कोचिंग हब है. इसे राजस्थान की एजुकेशन सिटी कहा जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ताजपोशी के दौरान कोटा शहर को 'शिक्षा की काशी' के नाम से संबोधित कर चुके हैं.

अब तक का सबसे बड़ा झटका कोविड-19 के कारण लगा है

यही वजह है कि हर साल देश दुनिया के करीब पौने दो लाख स्टूडेंट कोटा में आईआईटी और मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करने आते हैं. कोचिंग इंडस्ट्रीज को अब तक का सबसे बड़ा झटका कोविड-19 के कारण लगा है. लेकिन उम्मीद है कि हालात समान्य होते ही शिक्षा नगरी अपनी सफलता के इतिहास को फिर से दोहरायेगी.
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