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Lockdown: कोटा में फंसे देश भर के करीब 30 हजार छात्र, गृहराज्य भी नहीं दे रहे सीमा में घुसने की इजाजत

उम्मीदवार अब 3 मई तक अपने फॉर्म में करेक्शन कर सकेंगे.
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कोरोना वायरस (COVID-19) के संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन में कोचिंग सिटी कोटा (Coaching City Kota) में देशभर के करीब 30 हजार से अधिक स्टूडेंट्स फंसे हुए हैं.

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कोटा. कोरोना वायरस (COVID-19) के संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन में कोचिंग सिटी कोटा (Coaching City Kota) में देश भर के करीब 30 हजार से अधिक स्टूडेंट्स फंसे हुए हैं. कोटा में कोरोना के अब तक 49 पॉजिटिव मरीज सामने आ चुके हैं. उसके बाद से इन स्टूडेंट्स के अभिभावक चिंतित हो गए हैं. शहर के कुछ इलाकों में एहतियातन कर्फ्यू लगा हुआ है. राहत की बात यह है कि अभी तक कोचिंग क्षेत्र इससे अछूता है और सभी स्टूडेंट्स पूरी तरह से सुरक्षित हैं.

मुख्यतया इन राज्यों के स्टूडेंट्स फंसे हैं
कोटा में फंसे हुए स्टूडेंटस देश भर से यहां इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने आए हुए हैं. इनमें मुख्यतः उत्तर प्रदेश के लगभग 7500, बिहार के करीब 6500, मध्य प्रदेश के 4000, झारखंड के 3000, हरियाणा के 2000, महाराष्ट्र के 2000, नार्थ ईस्ट के 1000 और पश्चिम बंगाल के लगभग 1000 विद्यार्थियों के साथ कई अन्य क्षेत्रों के विद्यार्थी भी शामिल हैं.

सैंकड़ों स्टूडेंट्स रास्ते में ही अटके
लॉकडाउन में फंसे इन स्टूडेंट्स को कोटा के जिला कलक्टर ओम कसेरा ने उचित समय देखते हुए हाल ही में घर जाने की सुरक्षित तरीके से परमिशन जारी की तो कई राज्यों ने अपने ही प्रदेश के बच्चों को अपनी सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया. बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश सहित कई राज्य ऐसे हैं जहां के अधिकारियों ने इसका विरोध दर्ज करवा दिया. नतीजतन हजारों विद्यार्थी रास्ते में ही अटक गए. विभिन्न राज्यों की सीमा पर स्टूडेंट्स की जांच करने के बाद भी उन्हें घर तक जाने के लिए अनुमति नहीं दी जा रही है.



छात्राएं होने लगी हैं परेशान
इन स्टूडेंटस में करीब आधी संख्या छात्राओं की है, वो अब परेशान होने लगी हैं. कोटा में ही रुकी हुई इन छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल्स में चुनिंदा स्टूडेंट्स बचे हैं. ऐसे में कई फ्लोर पर एक-एक स्टूडेंट ही है. इससे कई बार डर लगने लगता है. इसके साथ ही छात्राओं को कुछ जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही है. बाजार बंद होने के कारण छोटी-छोटी चीजों के लिए उन्हें परेशान रहना पड़ रहा है.

गृह राज्यों में है परीक्षा केन्द्र
कोटा में रह रहे हजारों स्टूडेंट्स ने हाल ही में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से दी गई सुविधा के बाद परीक्षा केन्द्र के शहरों में बदलाव कर दिया है. इन स्टूडेंट्स ने अपने गृह जिलों या राज्यों में परीक्षा केन्द्र चुन लिया है. अब परीक्षा देने के लिए भी इन स्टूडेंट्स का घर जाना जरूरी है. एनटीए द्वारा परीक्षा केन्द्र के शहर बदलने का जो विकल्प दिया गया, उसकी अंतिम तिथि भी 14 अप्रैल थी. ऐसे में अब इसमें बदलाव भी नहीं किया जा सकता है.

ट्वीटर पर 70 हजार से अधिक ट्वीट
घर वापस जाने के लिए स्टूडेंट्स और उनके अभिभावक लगातार अपील कर रहे हैं. इसके लिए सोशल मीडिया पर भी गुहार लगाई जा रही है. परेशान हजारों छात्रों की पीड़ा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ट्विटर और फेसबुक पर स्टूडेंट्स की गुहार ट्रेंड कर रही है. स्टूडेंट्स और उनके पैरेंट्स की ओर से ट्वीटर पर ‘सेंड अस बैक होम‘ के हैश टेग से ट्वीट किए जा रहे हैं. दिन भर ये ट्विटर पर ट्रेंड करता रहा. 70 हजार से अधिक ट्वीट अब तक पीएमओ, राजस्थान सरकार, मुख्यमंत्री राजस्थान, पीएम नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री को टैग करते हुए किए गए हैं.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी किए प्रयास
इस संबंध में कोटा के कोचिंग संस्थानों, स्टूडेंट्स और पैरेंट्स ने जिला प्रशासन, राज्य सरकार और केन्द्र सरकार से भी निवेदन किया. इसके बाद लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने भी अपनी ओर से प्रयास किए. गृह सचिव से बात की, लेकिन फिर भी बात बनती नहीं दिख रही है. गृह सचिव के आश्वासन के बाद भी स्टूडेंट्स को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है और वो लगातार परेशान हो रहे हैं.

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