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कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र- बढ़े हुए मतदान पर टिकी हैं बीजेपी-कांग्रेस की नजरें

कोटा सिटी। फाइल फोटो।

कोटा सिटी। फाइल फोटो।

बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले हाड़ौती संभाग की कोटा-बूंदी लोकसभा सीट पर इस पर रोचक मुकाबला हुआ है. इस सीट पर 29 अप्रैल को हुए चुनाव में गत बार के मुकाबले 3.58 फीसदी ज्यादा मतदाता पोलिंग बूथों पर पहुंचे हैं.

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    बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले हाड़ौती संभाग की कोटा-बूंदी लोकसभा सीट पर इस पर रोचक मुकाबला हुआ है. यहां इस बार दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने अपने-अपने वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को चुनाव मैदान में उतार रखा है. इस सीट पर 29 अप्रैल को हुए चुनाव में गत बार के मुकाबले 3.58 फीसदी ज्यादा मतदाता पोलिंग बूथों पर पहुंचे हैं. यह बात दीगर है कि बढ़ा हुआ वोट बैंक बीजेपी के खाते में गया है या कांग्रेस के इसका फैसला तो 23 मई को मतगणना के बाद ही हो पाएगा.

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    कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्र कोटा के और दो क्षेत्र बूंदी जिले के शामिल हैं. इनमें कोटा जिले का कोटा उत्तर, कोटा दक्षिण, सांगोद, पीपल्दा, लाडपुरा व रामगंजमंडी और बूंदी जिले का बूंदी तथा केशवरायपाटन विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. बीजेपी ने यहां पर इस बार फिर अपने मौजूदा सांसद ओम बिरला को तो कांग्रेस ने पीपल्दा के विधायक रामनारायण मीणा को चुनाव मैदान में उतार रखा है.

    ओम बिरला। फोटो ट्वीटर


    दोनों ही प्रत्याशी काफी वरिष्ठ और अनुभवी
    दोनों ही प्रत्याशी काफी वरिष्ठ और अनुभवी हैं. बिरला दूसरी बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. वे इससे पहले लगातार तीन बार कोटा दक्षिण से विधायक और एक बार राज्य सरकार में संसदीय सचिव रह चुके हैं. बिड़ला ने अब तक चार चुनाव लड़े हैं और चारों ही जीते हैं. यह उनका पांचवा चुनाव है. वहीं रामनाराण मीणा पांच बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं. मीणा एक बार विधानसभा उपाध्यक्ष और एक बार सदन के उप नेता भी रहे हैं. वे पूर्व में लोकसभा के दो चुनाव हार चुके हैं. दोनों नेता बूथ मैनेंजमेंट के मामले में सिर्फ खुद पर ही विश्वास करते हैं. दोनों की चुनाव जीतने की ताकत बूथ मैनेंजमेंट है.

    रामनारायण मीणा। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।


    इस बार मतदान 3.58 फीसदी बढ़ा है
    वर्तमान में कोटा जिले में बीजेपी व कांग्रेस के पास 3-3 विधानसभा सीटें हैं. लेकिन बूंदी में जिले की दोनों विधानसभा सीटें बूंदी और केशवरायपाटन बीजेपी के पास है. यानी बीजेपी के पास लोकसभा क्षेत्र की आठ में से पांच विधानसभा सीटें हैं. कोटा लोकसभा सीट बीजेपी ने पिछली बार कांग्रेस से झटकी थी. इस क्षेत्र में गत बार जहां 69.84 फीसदी मतदान हुआ था, वहीं इस बार यह 3.58 फीसदी बढ़कर 66.26 प्रतिशत रहा है.

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    एससी-एसटी वोट बैंक के साथ तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है
    कुल 19,47,245 मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में एससी-एसटी का बड़ा वोट बैंक हैं. इनमें मीणा जाति के करीब 2.56 लाख और अनुसूचित जाति के 2.50 लाख मतदाता हैं. करीब 1.80 लाख मुस्लिम मतदाता हैं. लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि 2009 में यहां से कांग्रेस के टिकट पर सांसद का चुनाव जीते कोटा के पूर्व राजपरिवार के सदस्य इज्यराज सिंह इस बार विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. यह फैक्टर बीजेपी के लिए काफी राहत भरा है.

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    ये मुद्दे छाए रहे चुनाव में
    बीजेपी ने यहां राष्ट्रीयता, सर्जिकल स्ट्राइक और आतंकवाद के खात्मे के साथ ही विकास कार्यों के नाम पर वोट मांगे हैं, वहीं कांग्रेस नोटबंदी, जीएसटी और काले धन के मुद्दे को लेकर जनता के बीच गई है. बीजेपी अपने विकास कार्यों के बूते जीत का दावा कर रही है तो कांग्रेस न्याय योजना के सहारे जीत के सपने बुन रही है.

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