Kota News: राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंक्चुरी में छलके जाम, प्रशासन ने उठाया बड़ा कदम

शराब पार्टियों जैसे आयोजन के लिये लोग जिप्सी में सवार होकर शराब की बोतलें, चखना और प्लास्टिक के डिस्पोजल लेकर पहुंचते हैं.

शराब पार्टियों जैसे आयोजन के लिये लोग जिप्सी में सवार होकर शराब की बोतलें, चखना और प्लास्टिक के डिस्पोजल लेकर पहुंचते हैं.

राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य में हुई शराब पार्टी का मामला उजागर होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है. दीगोद उपखंड अधिकारी ने इस मामले में वन विभाग और दूसरे संबंधित विभागों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.

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कोटा. राजस्थान के कोटा जिले में बने प्रसिद्ध राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में खुलेआम वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धज्जियां उड़ाने का मामला उजागर होने के बाद अब प्रशासन हरकत में आ गया है. जिले के दीगोद उपखंड अधिकारी ने वन विभाग समेत सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को इस मामले में त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए हैं.

उपखंड अधिकारी दीगोद की ओर से जिला परिवहन अधिकारी, तहसीलदार, क्षेत्रीय वन अधिकारी, क्षेत्रीय वन मंडल अधिकारी और थानाधिकारी को जारी आदेश में कहा गया है कि इस बारे में तत्काल कार्रवाई करें. आदेश में कहा गया है कि इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत तत्काल कार्रवाई कर अवगत कराएं .

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की खुले आम धज्जियां

अभयारण्य में स्थित जामुनिया आईलैंड सात भागों में बंटा हुआ है. इसे राजस्थान के मिनी गोवा के नाम से पहचाना जाता है. यहां का नैसर्गिक सौंदर्य आमजन को अपनी ओर आकर्षित करता है. यही कारण कि यहां लोग खिंचे चले आते हैं. आरोप हैं कि पिछले कुछ दिनों से यहां कुछ लोग गैर कानूनी तरीके से प्रवेश कर शराब पार्टियां कर रहे हैं. इस दौरान वे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की खुले आम धज्जियां उड़ा रहे हैं.
वन्यजीवों के हैबिटेट को भी नुकसान

मामले को लेकर वन्यजीव प्रेमियों ने भी जमकर विरोध किया है. उनका कहना है कि सेंक्चुरी में गैर कानूनी तरीके से आने वाले लोग न केवल नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि वे खुद की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं. शराब पार्टियों जैसे आयोजन के लिए लोग जिप्सी में सवार होकर शराब की बोतलें, चखना और प्लास्टिक के डिस्पोजल लेकर पहुंचते हैं. बाद में इस कचरे को भी वहीं बिखेर कर आ जाते हैं. इस तरह की गतिविधियों से वन्यजीवों के हैबिटेट को भी नुकसान हो रहा है और यहां पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
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