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Rajasthan : सरकार ने बढ़ाई कैदियों की मजदूरी, महिला कैदियों को जेल की बेकरी में मिलेगा रोजगार

जेल में कुशल और अकुशल श्रमिकों की मजदूरी में अंतर रहेगा.
जेल में कुशल और अकुशल श्रमिकों की मजदूरी में अंतर रहेगा.

अब कारागृहों में कुशल बंदी श्रमिकों को 249 रुपये प्रतिदिन और अकुशल बंदी श्रमिकों को 225 रुपये प्रतिदिन उनके काम के लिए मिलेंगे. पहले यह राशि कुशल बंदी श्रमिक के लिए 209 रुपये और अकुशल बंदी श्रमिक के लिए 189 रुपये थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 25, 2021, 4:37 PM IST
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कोटा. राजस्थान (Rajasthan) की जेलों में बंद सजायाफ्ता कैदियों को दी जाने वाली मजदूरी (wages) में वृद्धि की गई है. गृह विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है. वहीं, कोटा (Kota) की महिला जेल (Women's prison) की कैदियों को भी रोजगार से जोड़ने की पहल करते हुए बेकरी (bakery) खोलने की तैयारी की जा रही है. कोटा जेल अधीक्षक सुमन मालीवाल (Jail Superintendent Suman Maliwal) ने बताया कि राजस्थान कारागार के पुलिस महानिदेशक राजीव दासोत की ओर से आए आदेश के बाद कैदियों में रोजगार को लेकर भरोसा और मजबूत हुआ है. अब कारागृहों में कुशल बंदी श्रमिकों को 249 रुपये प्रतिदिन और अकुशल बंदी श्रमिकों को 225 रुपये प्रतिदिन उनके काम के लिए मिलेंगे. पहले यह राशि कुशल बंदी श्रमिक के लिए 209 रुपये और अकुशल बंदी श्रमिक के लिए 189 रुपये थी.

कोटा जेल में फिलहाल 516 कैदी

सुमन मालीवाल ने बताया कि कोटा में फिलहाल 516 कैदी हैं जो जेल उद्योगशाला में लगातार काम कर रहे हैं. इसी तरह कोटा की महिला जेल में 34 कैदी हैं, जिन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए महिला जेल परिसर में बेकरी खोली जा रही है. उन्होंने बताया कि कोटा जेल में बने उत्पाद बाजारों में अपनी पहचान भी बना रहे हैं. फिलहाल कोटा जेल की उद्योगशालाओं में दरी, निवार, कपड़ा बुनाई, सिलाई, कूलर बनाना, कार्पेंट्री, होजरी और लुहारी आदि के काम करवाए जाते हैं. यहां के कैदी फिनायल, झाड़ू और पोछा निर्माण भी करते हैं. यही नहीं, कोटा जेल की आर्केस्ट्रा के कलाकार शहर में होने वाले कार्यक्रमों में अपना परफॉर्मेंस देकर भी रोजगार भी पा रहे हैं.




कुशल और अकुशल बंदी श्रमिक का अंतर

कारागृह उद्योग में कार्य करने वाले कैदी कुशल श्रमिक कहलाते हैं, वहीं जेल सेवाओं का रखरखाव करने वाले अन्य समस्त कैदी अकुशल श्रमिक कहे जाते हैं.

25 प्रतिशत की राशि पीड़ित पक्ष को

जेल नियमों के अंतर्गत भुगतान योग्य पारिश्रमिक की 75 प्रतिशत राशि बंदी श्रमिक को दी जाती है, शेष 25 प्रतिशत राशि की पीड़ित पक्ष को दी जाती है. बंदी मजदूरी में संशोधन के लिए राज्य सरकार द्वारा एक समिति का गठन किया गया था. समिति की सिफारिश के आधार पर राज्य सरकार द्वारा बंदी मजदूरी की दरों में वृद्धि की गई है, जिससे राज्य के कारागृहों में बंद लगभग छह हजार दंडित बंदियों को लाभ होगा.
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