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लड़की भगाने के आरोप में दर्ज केस में 20 हजार रुपए की रिश्वत लेने वाले ASI को 6 साल की जेल

News18 Rajasthan
Updated: December 9, 2019, 5:31 PM IST
लड़की भगाने के आरोप में दर्ज केस में 20 हजार रुपए की रिश्वत लेने वाले ASI को 6 साल की जेल
रिश्वतखोरी के एक मामले में ASI को 6 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है.

कोटा (kota) शहर में दादाबाड़ी थाने में तैनात राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) के सहायक उपनिरीक्षक (ASI) जगदीश प्रसाद मीणा को रिश्वतखोरी के एक मामले में 6 वर्ष के कठोर कारावास एवं 60,000 रुपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई है.

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कोटा. राजस्थान के कोटा (kota) शहर में दादाबाड़ी थाने में तैनात सहायक उपनिरीक्षक (ASI) जगदीश प्रसाद मीणा को भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने सोमवार को रिश्वतखोरी के एक मामले में 6 वर्ष के कठोर कारावास एवं 60,000 रुपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है. एएसआई मीणा ने पुलिस थाना दादाबाड़ी, कोटा में परिवादी मोहम्मद मुख्तार जकी के पुत्र गुफरान जकी के विरूद्ध लड़की भगाकर ले जाने के अपराध में दर्ज एफआईआर संख्या 347/2008 को लेकर 80 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी. आखिर 30 हजार रुपए में रिश्वत का सौदा तय हुआ था. इसी कड़ी में 8 नवंबर 2008 को 20,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए एसीबी ने मीणा को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था.

80 हजार रुपए मांगी थी रिश्वत, 30 पर सौदा तय
जानकारी के अनुसार एएसआई मीणा ने धारा 363, 366 भादस में परिवादी के पुत्र की हाईकोर्ट अग्रिम जमानत खारिज करवाने और प्रकरण में परिवादी और उसकी पत्नी को आपराधिक षड़यन्त्र में शामिल कर गिरफ्तार करने की धमकी देकर परिवादीगण से नाजायज रूप से 80,000 रुपए की रिश्वत मांगी थी. परिवादी द्वारा आग्रह करने पर रिश्वत की राशि 30,000 रुपए पर सहमत हुआ. इस संबंध में परिवादी ने 7 नवंबर 2008 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो(जयपुर) के समक्ष परिवाद पेश किया गया और अगले ही दिन कोटा में ट्रेप कार्यवाही की गई.

कोर्ट ने कहा- सजा में नरमी नहीं

इस मामले में न्यायालय द्वारा सुनवाई करते हुए सोमवार को निर्णय पारित कर 6 साल जेल की सजा सुनाई गई. कोर्ट ने मत व्यक्त किया कि पुलिस थाना दादाबाडी, कोटा में परिवार के पुत्र गुफरान जकी के खिलाफ दर्ज केस में अभियुक्त के द्वारा अपने लोक कर्तव्यों के निर्वहन की विधिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने में घोर लापरवाही बरत कर रिश्वत राशि मांग कर और रिश्वत राशि प्राप्त कर पुलिस विभाग की प्रतिष्ठा को धूमिल किया है. वर्दी को दागदार किया है. अतः सजा में नरमी का रूख नहीं अपनाया जा सकता.

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First published: December 9, 2019, 5:31 PM IST
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