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ऐसा अनोखा दंगल जहां पहलवान दांव पेंच नही बल्कि लोक कलाकार गाते हैं गाथाएं

ऐसा अनोखा दंगल जहां पहलवान दांव पेंच नही बल्कि लोक कलाकार गाते हैं गाथाएं

कोटा के विशाल कन्हैया पद दंगल में कलाकारों ने ढोल नगाड़े के साथ दी शानदार प्रस्तुति

कोटा के विशाल कन्हैया पद दंगल में कलाकारों ने ढोल नगाड़े के साथ दी शानदार प्रस्तुति

कोटा (kota) में आयोजित किए गए अनोखे दंगल में कोई पहलवान (Wrestler) नहीं बल्कि ढोल नगाड़े हैं, गीत संगीत और लोक संस्कृति की गाथाएं सुनाते लोक कलाकार (Folk artist) हैं. इस दंगल का नाम है विशाल कन्हैया पद दंगल

    कोटा. दंगल (wrestling) तो आपने बहुत देखें होंगे, जहां दो पहलवान अखाड़े में पहुंचकर एक दूसरे को धूल चटाते दिखाई देते हैं, लेकिन कोटा (kota) में आयोजित किए गए अनोखे दंगल में कोई पहलवान (Wrestler) नहीं बल्कि ढोल नगाड़े हैं, गीत संगीत और लोक संस्कृति की गाथाएं सुनाते लोक कलाकार (Folk artist) हैं. इस दंगल का नाम है विशाल कन्हैया पद दंगल

    गुर्जर समाज के लोग खेलते हैं विशाल कन्हैया पद दंगल

    यह कन्हैया पद दंगल कोटा में पहली बार देखने में आया, जिसे गुर्जर समाज के लोग खेलते हैं. यह दंगल कोटा में नयापुरा स्थित उम्मेद सिंह स्टेडियम के परिसर में टेंट से बने पंडाल में गुर्जर समाज के लोगों के बीच में हुआ. मौका था गुर्जर समाज के दीपावली स्नेह मिलन समारोह का, जिसमें कन्हैया पद दंगल का आयोजन किया गया. हाड़ौती में यह पहली बार देखने में आया, इस बात की पुष्टि पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने की, जो खुद गुर्जर समाज से हैं.

    सामाजिक सौहार्द को कायम रखने के लिए किया जाता है दंगल का आयोजन

    पूर्व विधायक गुंजल के भतीजे पार्षद ओम गुंजल बताते है कि यह दंगल सामाजिक सौहार्द समाज में बनाने के लिए आयोजित किया गया, लेकिन इस दंगल का सीधा नाता समाज के आराध्य देव भगवान देवनारायण की प्रस्तुति करने और समाज के वीर शिरोमणि रहे योद्धा की गाथाओं गीत संगीत में पिरोते हुए उन्हें याद करते हुए आयोजित किया जाता है. दंगल के कलाकार गाथाएं गाते हैं और नृत्य करते हैं, जमकर झूमते हैं. कलाकार अन्य देवी देवताओं की भी इस तरह गाथाएं गा-गाकर वंदना भी करते हैं. कन्हैया दंगल करने वाले कलाकार ऐसे तो हाड़ौती अंचल के खातौली क्षेत्र के हैं, लेकिन अधिकतर यह दंगल गुर्जर समाज के सामाजिक कार्यक्रमों में राजस्थान के करौली, दौसा, सवाईमाधोपुर आदि जिलों में आयोजित होते हैं, लेकिन हाड़ौती में कन्हैया पद दंगल का आयोजन पहली बार हुआ है.

    विशाल कन्हैया पद दंगल में कलाकार नगाड़े की धुन पर नृत्य करता हुआ
    विशाल कन्हैया पद दंगल में कलाकार नगाड़े की धुन पर नृत्य करता हुआ


    दंगल में 100 ज्यादा कलाकार हुए शामिल

    वीर गुर्जर समाज कोटा के दीपावली मिलन समारोह में आयोजित किए गए कन्हैया पद दंगल में 100 कलाकार शामिल हुए, जहां दो विशालकाय नगाड़े थे. कलाकारों ने अपनी बाजुओं पर नोट लगा रखे थे और अपनी इस दंगल की लोक संस्कृति को लुप्त होने से बचाने का संदेश देते हुए कलाकार आधुनिकता के जमाने में लोगों का मनोरंजन कर रहे थे. कार्यक्रम में शामिल पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने कहा, समाज की इस विरासत को ऐसे कलाकारों ने बचा रखा है. सरकारों को चाहिए वह इस तरह की लोक कलाओं का संरक्षण करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों भी इस तरह के दंगल को देख सके, जिसे गुर्जर समाज ने आज भी संजोए रखा है.

    दंगल में लोक गीत गाते कलाकार
    दंगल में लोक गीत गाते कलाकार


    बयाना के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना ने दंगल में की शिरकत

    कार्यक्रम में बयाना के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना भी थे. सुरीले गीत संगीत वाले इस दंगल को जिसने भी देखा और सुना वह दंग रह गया. कन्हैया पद दंगल की यह पंरपरा हजारों सालों पुरानी पौराणिक लोक संस्कृति है, जिसमें समाज के लोक देवताओं की गाथाओं को उनके शौर्य, पराक्रम, और धार्मिक आस्था को इस तरह गाया जाता है और उनकी स्तुति, वंदना, आराधना लोक कलाकारों के द्वारा की जाती है.

    (कोटा से अर्जुन अरविंद की रिपोर्ट)

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    Tags: Kota news, Rajasthan news

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