बाघ-बाघिन के रेडियो कॉलर में आई तकनीकी खराबी, वनकर्मी पगमार्क से कर रहे मॉनिटरिंग

रेडियो कॉलर से बाघ-बाघिन का संकेत मिलना बंद हो गया है. (File Photo)
रेडियो कॉलर से बाघ-बाघिन का संकेत मिलना बंद हो गया है. (File Photo)

रेडियो कॉलर (Radio Collar) के काम नहीं करने से अब बाघ-बाघिन (Tiger-Tigress) के पगमार्क (Pugmark) या उनकी अन्य निशानदेही से मॉनिटरिंग (Monitoring) की जा रही है. इन दोनों बाघ-बाघिन के रेडियो कॉलर को बदलने या इनकी बैट्री बदलने की जरूरत है.

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कोटा. प्रदेश के तीसरे मुकंदरा टाइगर रिजर्व (Mukandra Tiger Reserve) के एमटी-1 बाघ और एमटी-4 बाघिन के गले में लगे रेडियो कॉलर में तकनीकी खराबी (Technical fault in radio collar) आ गई है. सूत्रों के मुताबिक रेडियो कॉलर की बैट्री की गारंटी दो साल की होती है, संभवत: बाघ-बाघिन (Tiger-Tigress) के गले में लगे रेडियो कॉलर की बैट्री की पावर खत्म हो गई है. ऐसे में रेडियो कॉलर से बाघ-बाघिन का संकेत मिलना बंद हो गया है. रेडियो कॉलर से बाघ-बाघिन की मॉनिटरिंग करना वनकर्मियों के लिए आसान होता है, रेडियो कॉलर के काम नहीं करने से अब बाघ बाघिन के पगमार्क या  उनकी अन्य निशानदेही से मॉनिटरिंग की जा रही है. वन विभाग (Forest Department) को दोनों बाघ-बाघिन की मॉनिटरिंग वनकर्मियों द्वारा मैनुअल करवानी पड़ रही है.

इधर, मुकंदरा टाइगर रिजर्व के उपवन संरक्षक डॉ. टी मोहनराज ने बताया कि रेडियो कॉलर के संबंध में उच्चाधिकारियों से राय ली जा रही है. उच्चाधिकारियों के निर्देश के मुताबिक वन विभाग आगे की कार्रवाई करेगा. फिलहाल बाघ-बाघिन की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है.

मुकंदरा टाइगर रिजर्व के उपवन संरक्षक डॉ. टी मोहनराज ने बताया कि रेडियो कॉलर के संबंध में उच्चाधिकारियों से राय ली जा रही है.




रणथंभौर नेशनल पार्क प्रशासन ने जर्मनी से मंगवाए थे रेडियो कॉलर 
गौतरतलब है कि एमटी-1 को मुकंदरा में 3 अप्रैल 2018 को शिफ्ट किया गया था, तब से रणथंभौर नेशनल पार्क प्रशासन की ओर से बाघ के गले में रेडियो कॉलर लगाया गया था. वहीं साल 2019 में एमटी-4 बाघिन को भी रणथंभौर से जब मुकंदरा में शिफ्ट किया गया था तब उसके गले में रेडियो कॉलर पहनाया गया था. ये दोनों रेडियो कॉलर रणथंभौर नेशनल पार्क प्रशासन ने दो साल पहले जर्मनी से मंगवाए थे. ऐसे में अब इन दोनों बाघ-बाघिन के रेडियो कॉलर को बदलने या इनकी बैट्री बदलने की जरूरत है.

(कोटा से अर्जुन अरविंद कि रिपोर्ट)

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