खुशखबरी! मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में दिखा तीसरा बाघ

हाडौती के वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी है. मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में तीसरा बाघ दिखा है. वन विभाग के लगाए ट्रैप कैमरे में तीसरे बाघ की तस्वीरें मिली हैं.

News18 Rajasthan
Updated: February 12, 2019, 1:36 AM IST
खुशखबरी! मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में दिखा तीसरा बाघ
हाडौती के वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी है. मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में तीसरा बाघ दिखा है. वन विभाग के लगाए ट्रैप कैमरे में तीसरे बाघ की तस्वीरें मिली हैं.
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Updated: February 12, 2019, 1:36 AM IST
हाड़ौती के वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी है. मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में तीसरा बाघ आ गया . है जो मुकंदरा टाइगर रिजर्व की दरा रेंज के घाटी माता मंदिर व घाटी गांव के जंगल में ट्रेस हुआ है. वन विभाग ने जो लगाए ट्रैप कैमरे लगाए हैं, उसमें तीसरे बाघ की तस्वीरें मिली हैं. वन विभाग फिलहाल बाघ की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है. 15 ट्रैप कैमरा बाघ की मॉनिटरिंग के लिए जंगल में लगाए गए हैं. मुकंदरा में तीसरे बाघ के आने की पुष्टि खुद मुकंदरा टाइगर रिजर्व के डीसीएफ डॉ. टी मोहनराज ने की है. फिलहाल डीसीएफ वनकर्मियों की अपनी टीम के साथ बाघ की ट्रेकिंग में लगे हुए हैं. घाटी माता मंदिर 8 हजार हेक्टेयर के एनक्लोजर की दीवार के समीप है. मुकंदरा में तीसरा बाघ आने से वन विभाग भी खुश है तो हाड़ौती अंचल के लोग भी तीसरे टाइगर को लेकर काफी उत्साहित हैं.

अब मुकंदरा में 2 बाघ 1 बाघिन हो गए हैं. 3 अप्रैल 2018 में बाघों से विहिन मुकंदरा में पहला बाघ शिफ्ट किया गया था. जिसे एमटी 1 नाम दिया गया. उसके बाद 18 दिसंबर 2018 को मुकंदरा में एक बाघिन को रणथंभोर से लाकर शिफ्ट किया गया है. जो फिलहाल 28 हेक्टेयर के एनक्लोजर में है. डीसीएफ डॉ. टी मोहनराज ने बताया कि एमटी-1 व एमटी-2 दोनों बाघ व बाघिन 8 हजार हेक्टेयर के एनक्लोजर के अंदर घूम रहे हैं.

जो तीसरा टाइगर है वह घाटी माता मंदिर व घाटी गांव के जंगल में मूवमेंट कर रहा है. वन विभाग को ग्रामीणों की सूचना पर बाघ के मूवमेंट की खबर दो दिन पहले लगी थी. तब से वन विभाग बाघ की तलाश व ट्रेंकिंग में जुटा हुआ था. आज वन विभाग ने लगाए 15 ट्रैप कैमरों में से 1 कैमरे में बाघ कैद हुआ. इधर, माना जा रहा है कि यह रणथंभौर का टी-98 बाघ है जो पिछले 1 माह से कोटा जिले की सुल्तानपुर रेंज में चंबल नदी के किनारे मूवमेंट कर रहा था. यह कालीसिंध नदी कॉरिडोर के सहारे होते हुए गागरोन के यहां से मुकंदरा में प्रवेश कर गया.



ऐसे में टी-98 जो मुकंदरा में आकर अब एमटी-3 नाम से पुकारा जाने लगा है. ऐसे में इस बाघ के रणथंभौर से चलकर चंबल फिर कालीसिंध नदी होकर यहां तक पहुुंचने में करीब 250 किलोमीटर का सफर तय करके आना बताया जा रहा है.

बडी खबर यह भी है कि मुकंदरा में रणथंभौर से साल 2003 में आए ब्रोकन टेल के बाद यह दूसरा बाघ है. जो रणथंभोर से मुकंदरा पूरी सफलता के साथ पहुंचा है. हालांकि ब्रोकन टेल की उसी दौरान रेल दुर्घटना में मौत हो गई थी. तब मुकंदरा खुला जंगल था. साल 2010 में रणथंभौर से मुकंदरा के रास्ते टी-35 बाघिन आई थी. लेकिन वह पलायथा के पास एनएचएआई 27 का कालीसिंध ब्रिज पार नहीं कर पाई थी. 6 साल बाघिन ने सुल्तानपुर के पास कालीसिंध की कंदराओं में गुजारे.

(रिपोर्ट- अर्जुन अरविंद)
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