SPECIAL REPORT: रणथंभौर में बढ़ी बाघों की आबादी, बढ़ते संघर्ष को देखकर बदल रहे हैं टेरिटरी

अब बाघों ने रणथम्भौर छोड़ कर हाड़ौती के मुकंदरा टाइगर रिजर्व व बूंदी रामगढ़ विषधारी सेंचुरी में रहने की ठान ली है.
अब बाघों ने रणथम्भौर छोड़ कर हाड़ौती के मुकंदरा टाइगर रिजर्व व बूंदी रामगढ़ विषधारी सेंचुरी में रहने की ठान ली है.

रणथम्भौर टाइगर रिजर्व (ranthambhore Tiger Reserve) में बाघों की आबादी लगातार बढ़ रही है. इसके चलते टाइगर रिजर्व में आए दिन बाघों के बीच वर्चस्व की लड़ाई (Fight For Territory) होती रहती है. ऐसे में अब बाघों ने हाड़ौती के मुकंदरा टाइगर रिजर्व (Mukundra Tiger Reserve) व बूंदी रामगढ विषधारी सेंचुरी (Boondi Ramgarh Vishdhari Sanctuary) में रहने की ठान ली है.

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कोटा. रणथम्भौर टाइगर रिजर्व  (Ranthambhore Tiger Reserve) में बाघों की आबादी लगातार बढ़ रही है. इसके चलते टाइगर रिजर्व में आए दिन बाघों के बीच वर्चस्व की लड़ाई (Fight For Territory) होती रहती है. ऐसे में अब बाघों ने हाड़ौती के मुकंदरा टाइगर रिजर्व व बूंदी रामगढ विषधारी सेंचुरी में रहने की ठान ली है. बाघ हाड़ौती (Hadauti Forest) के जंगलों में पलायन कर रहे हैं. हाड़ौती के जंगलों में एक, दो बाघों ने नहीं, बल्कि चार बाघ व एक बाघिन ने पलायन कर लिया है. हाड़ौती के जंगलों में एक साथ पांच बाघ-बाघिनों के आने से कोटा के वन्यजीव विभाग में हडकंप मचा हुआ है. विभाग बाघ-बाघिनों की सुरक्षा और इंसानों की सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट मोड पर आ गया है.

टेरिटरी बदलने वाले बाघों की उम्र ढाई से तीन साल के बीच है

कोटा के मुख्य वन्य जीव संरक्षक आनंद मोहन का कहना है कि वर्तमान में सवाईमाधोपुर के रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के जोन नंबर 10 में विचरण करने वाले टी-110, टी-115, टी-62, टी-116 बाघ व टी 59 बाघिन शामिल हैं. रणथंभौर से टेरिटरी की तलाश में हाड़ौती अंचल के बूंदी जिले के इंद्रगढ़ व लाखेरी वनमंडल में अभी मूवमेंट कर रहे हैं. रणथम्भौर में बाघों में प्रतिस्पर्धा की स्थिति है और यह सब व्यस्क बाघ हैं. इनकी उम्र ढाई से तीन साल के बीच है. इस दिशा में बाघों के मुकंदरा टाइगर रिजर्व व रामगढ विषधारी सेंचुरी में पहुंचने की प्रबल संभावनाएं वन विभाग को दिखाई दे रही हैं.



मुकुंदरा हिल्स में शिफ्ट कर रहे हैं बाघ
वन्यजीव विभाग को उम्मीद है कि रणथम्भौर से निकले ये बाघ मुकुंदरा में आ सकते हैं. पिछले साल कालीसिंध चंबल नदी कॉरिडोर से सुल्तानपुर होते हुए रणथंभौर का टी-98 बाघ भी आया था. अब यह मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का एमटी-3 बाघ है. इसी तरह से इनके भी मुकंदरा में आने की संभावना है. ऐसे में रणथम्भौर से निकले हुए चारों बाघों की सुरक्षा और उनसे आमजन को किसी तरह का कोई खतरा नहीं हो, इसके लिए कोटा में मुख्य वन्यजीव संरक्षक ने आज किशोरपुरा स्थित मुख्य वन्यजीव संरक्षक कार्यालय में महत्वपूर्ण मीटिंग ली है. इसमें बूंदी टेरिटोरियल, कोटा टेरिटोरियल, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के उपवन संरक्षक ने भाग लिया है.

रामगढ़ विषधारी सेंचुरी में टी-110 बाघ जा सकता है

आनंद मोहन ने कहा कि टी-110 बाघ के मेज नदी के आसपास पूरी तरह से अपना आवास बना चुका है. वह पिछले 7-8 महीने से इसी एरिया में रह रहा है. लाखेरी के नजदीक इंदरगढ़ की पहाड़ी को पार करके यह बाघ के बूंदी जिले की रामगढ़ विषधारी सेंचुरी कभी पहुंच सकता है. ऐसे में वन विभाग हाई अलर्ट पर है.



टी-115 बाघ मुकुंदरा की राह पर

यह टाइगर टी-115 बाघ मेज नदी के दूसरे हिस्से की तरफ खड़ा हुआ है. सामने कालिसिंध-चंबल नदी कॉरिडोर की सीमा शुरू होती है, जहां से इसी साल रणथंभौर से टी-98 बाघ पैदल चलते हुए करीब 200 किलोमीटर का सफर तय करते हुए बाघ मुकंदरा टाइगर रिजर्व में पहुंच गया था. यह आज मुकंदरा का एमटी 3 बाघ है. नदी कॉरिडोर के नजदीक इंद्रगढ वनक्षेत्र का कुवांलजी है. यह टाइगर अभी यहां पर आ-जा रहा है और इस बार वो करीब एक से डेढ़ महीने से यहां गुजारे. यहां से इसके सुल्तानपुर होते हुए मुकंदरा टाइगर रिजर्व में पहुंचने की पूरी उम्मीद है. इसी रास्ते से मुकंदरा की सीमा पर साल 2010 में टी-35 बाघिन रणथंभौर से पहुंची थी जिसने सुल्तानपुर के जंगलों में 6 साल बिताए थे.

दो बाघों की मां कर रही मॉनिटरिंग

टी-115 व टी 116 बाघ का बूंदी जिले के लाखेरी वनमंडल तक मूवमेंट हो रहा है. इन दोनों बाघों की मां टी-59 बाघिन भी इस एरिया में आ और जा रही है. यह दोनों बाघ लगातार लाखेरी वनमंडल में विचरण कर रहे हैं. वन विभाग की टीमें इनकी मॉनिटरिंग में जुटी हुई हैं. बाघिन अपने सभी व्यस्क बाघों की देखरेख में विचरण कर रही हैं.

रणथम्भौर में अभी भी हैं 15 शावक

मुख्य वन्यजीव संरक्षक आनंद मोहन के मुताबिक पलायन करने की पीछे मुख्य वजह है कि रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या ज्यादा है. टाइगर की तादाद काफी है. अभी भी रणथंभौर में 13 शावक हैं. अभी कुछ दिनों पहले दो शावक देखे गए हैं, लेकिन उनकी पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में 13 से 15 शावक है और सभी व्यस्क हैं. बाघों की बड़ी आबादी इतने छोटे क्षेत्र में कैसे रहेगी. इसलिए यह बाघ वहां से बाहर हाड़ौती के जंगलों की ओर पलायन कर चुके हैं.

हर स्तर पर बनाएंगे समन्वय: आनंद मोहन

कोटा के मुख्य वन्यजीव संरक्षक आनंद मोहन ने कहा कि मीटिंग में तय किया गया है कि हर स्तर पर समन्वय हुआ है, जिसमें नाकेदार, क्षेत्रीय वन अधिकारी और सहायक वन संरक्षक से लेकर उप वन संरक्षक तक अधिकारी शामिल हैं. अपने अपने स्तर पर वार्ताएं करेंगे व लगातार सूचनाओं का आदान प्रदान करेंगे. यह प्रक्रिया 24 घंटे और 7 दिन लगातार चलता रहेगा. रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के जो अधिकारी व कर्मचारी दूसरे टेरिटोरियल के नाकों पर बाघों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं, उन्हें हर तरह का सपोर्ट उपलब्ध कराया जाएगा. एक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी हर 15 दिन में किया जाएगा.

(कोटा से अर्जुन अरविंद की रिपोर्ट)

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