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कोटा के अस्पताल में साल के पहले 2 दिनों दो और शिशुओं की मौत, मृतकों की संख्या 102 हुई

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Updated: January 2, 2020, 3:42 PM IST
कोटा के अस्पताल में साल के पहले 2 दिनों दो और शिशुओं की मौत, मृतकों की संख्या 102 हुई
कोटा के जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है. (फाइल फोटो)

कोटा (Kota) जिले के जेके लोन अस्पताल (JK Lone Hospital) में नए साल के पहले दो दिनों में दो और बच्चों की दुखदायी मृत्यु हो गई. इससे कोटा में मरने वाले शिशुओं की संख्या बढ़कर 102 हो गई. केवल दिसंबर माह में अस्पताल में 100 नवजात बच्चे दम तोड़ चुके हैं.

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  • Last Updated: January 2, 2020, 3:42 PM IST
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कोटा. राजस्थान के कोटा जिले के जेके लोन अस्पताल में नए साल के पहले दो दिनों में दो और बच्चों की मृत्यु हो गई. इससे कोटा में मरने वाले शिशुओं की संख्या 102 हो गई. अस्पताल अधीक्षक सुरेश दुलारा ने दो बच्चों के मौत की पुष्टि की है. अकेले दिसंबर माह में अस्पताल में 100 नवजात बच्चे दम तोड़ चुके हैं. अस्पताल में बीते साल भी 963 बच्चों ने दम तोड़ा था. हाल ही में जिन बच्चों की सांसें थमी हैं वे कम वजन, प्री-मेच्योर डिलीवरी और माइल्ड इंफेक्शन से पीड़ित बताए जा रहे हैं.

राजस्थान की अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार की जांच कमेटी ने हाल ही में जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें बच्चों की मौत के पीछे अस्पताल के वेंटिलेटर और वार्मर खराब होने सहित अन्य कारण बताए गए थे. 23-24 दिसंबर की 48 घंटे की अवधि के दौरान सरकारी अस्पताल में 10 बच्चों की मौत से विपक्षी दल कांग्रेस सरकार पर पहले से हमलावर हो गए हैं. इस मामले में देश भर में सियासत गरमा गई है. आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है.

सिंगल बेड पर पाए गए दो से तीन बच्चे, नहीं थी पर्याप्त नर्सें
कोटा का यह अस्पताल बच्चों के लिए सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है. इसके पीडियाट्रिक्स विभाग में हर दिन 30-40 मरीजों के अलावा ओपीडी में 200-300 मरीजों को देखा जाता है. मंगलवार को बीजेपी संसदीय दल के सांसद लॉकेट चटर्जी, कांता कर्दम और जसकौर मीणा ने अस्पताल का दौरा किया और इसके बुनियादी ढांचे पर चिंता व्यक्त की. पैनल ने कहा कि दो से तीन बच्चे सिंगल बेड पर पाए गए और अस्पताल में पर्याप्त नर्सें नहीं थीं.

अस्पताल परिसर में घूमते हुए पाए गए थे सूअर
इससे पहले, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने राज्य में कांग्रेस सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. राजस्थान सरकार की एक समिति ने फैसला किया है कि शिशुओं को सही उपचार दिया गया है. जबकि बाल अधिकार संरक्षण आयोग के चेयरपर्सन प्रियांक कानोंगो ने कहा है कि, ‘अस्पताल परिसर के अंदर सूअर घूमते हुए पाए गए’.

हर्षवर्धन ने स्वास्थ्य सचिव को सेवाओं का जायजा लेने को कहाकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव से मुलाकात की और उन्हें जल्द से जल्द कोटा अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लेने को कहा. अस्पताल में हाल ही में शिशुओं की मौत पर चिंता व्यक्त करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने मंगलवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को एक पत्र भी लिखा है.

2019 में अस्पताल में हुई 20.2% की उच्च मृत्यु दर
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्थापित विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों के बारे में ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से उपलब्ध जानकारी और बीमार शिशुओं को राज्य सरकार से राहत देने की समीक्षा की गई है. इसने पूर्ववर्ती दो की तुलना में 2019 के दौरान जेके लोन अस्पताल, कोटा में 20.2% की उच्च मृत्यु दर दिखाई है.  इसके अलावा, यह भी ध्यान दिया गया है कि जे के लोन अस्पताल में, 70% रेडिएंट वार्मर्स काम नहीं कर रहे हैं और बिस्तर नर्स अनुपात 4:1 के मानक के खिलाफ 13:1 है.

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First published: January 2, 2020, 3:36 PM IST
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