'आतंकियों के शवों को रस्सियों से बांधकर ले जाया गया, क्‍योंकि उनमें हथियार हो सकते थे'

रस्सियों से बांधकर आतंकियों का शव ले जाने के मामले पर लेफ्टिनेंट जनरल मेथसन ने कहा कि देश की रक्षा के लिए लड़ रहे सैनिकों की जिंदगी ज्यादा मायने रखती है या आतंकवादियों के मानवाधिकार का मुद्दा.

भाषा
Updated: September 15, 2018, 11:02 PM IST
'आतंकियों के शवों को रस्सियों से बांधकर ले जाया गया, क्‍योंकि उनमें हथियार हो सकते थे'
प्रतीकात्मक तस्वीर
भाषा
Updated: September 15, 2018, 11:02 PM IST
भारतीय सेना की दक्षिण पश्चिम कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल चेरिश मेथसन ने शनिवार को कहा कि आतंकियों के शवों को रस्सियों से बांधकर ले जाना सेना की एक प्रक्रिया थी. जिससे उनके शरीर से बंधे विस्फोटकों व ग्रेनेड में होने वाले विस्फोट के खतरे से बचा जा सके. मेथसन ने कहा, 'आतंकी अपने शरीर से विस्फोटक (आईईडी) व ग्रेनेड बांध लेते हैं. सैनिक जब उनके शवों को उठाते हैं तो उनके लिए हमेशा खतरा बना रहता है. आतंकियों के शवों को रस्सी से बांधकर ले जाना सेना की एक प्रक्रिया थी. जिससे उनपर बंधे विस्फोटक सामग्री में विस्फोट की घटना से बचाव हो सके.

उल्लेखनीय है कि भारतीय सैनिकों का एक वीडियो शुक्रवार को सामने आया जिसमें वे कथित तौर पर जैश ए मोहम्मद के आतंकवादी के शव को रस्सियों से घसीट रहे हैं. कुछ लोगों ने इसे मानवाधिकार का उल्लंघन बताया. लेफ्टिनेंट जनरल मेथसन ने कहा कि इसका जवाब दिया जाना चाहिए कि देश की रक्षा के लिए लड़ रहे सैनिकों की जिंदगी ज्यादा मायने रखती है या आतंकवादियों के मानवाधिकार का मुद्दा.

सेना में पुनर्गठन के सवाल पर सैन्य कमांडर ने कहा कि दुनिया भर की सेनाएं समय समय पर अपनी समीक्षा करती हैं ताकि यह देखा जा सके कि उनका ढांचा संभावित खतरों से लड़ने के अनुकूल है या नहीं. उन्होंने कहा कि प्रत्येक इकाई को अपनी समीक्षा करने का अधिकार है.

उन्होंने बताया कि हाइफा दिवस के सौ साल पूरा होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में सेना प्रमुख बिपिन रावत जयपुर आएंगे. रावत यहां हाइफा मूर्ति के विमोचन कार्यक्रम में भी भाग लेंगे.

इजराइल में सौ साल पहले हाइफा शहर को तुर्कों के कब्जे से मुक्त करवाने में अपनी जान न्योछावर करने वाले भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए हाइफा दिवस मनाया जाता है. इसके 100 साल पूरे होने पर 23 सितंबर को यहां विशेष कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है. मेथसन ने कहा कि बहुत कम भारतीय ही इस दिवस के बारे में जानते हैं, लेकिन इजराइल में हर साल इस दिवस को मनाया जाता है.
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