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राजस्‍थान के सात गांवों में 13 दिन से दलित आंदोलन, भूख हड़ताल पर आंदोलनकारी

आंदोलनकारी महिला के इलाज में जुटे चिकित्सक।  फोटो: न्यूज18 राजस्थान

आंदोलनकारी महिला के इलाज में जुटे चिकित्सक। फोटो: न्यूज18 राजस्थान

अखिल भारतीय अम्बेडकर महासभा के बैनर तले 'भीख नहीं भागीदारी चाहिये, देश की हर ईंट में हिस्सेदारी चाहिए' नारे के साथ दलित समाज के लोगों का आंदोलन रविवार को 13वें दिन भी जारी रहा.

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राजस्‍थान के नागौर जिले में बड़े दलित आंदोलन की आहट हो रही है. अखिल भारतीय अम्बेडकर महासभा के बैनर तले 'भीख नहीं भागीदारी चाहिये, देश की हर ईंट में हिस्सेदारी चाहिए' नारे के साथ दलित समाज के लोगों का आंदोलन रविवार को 13वें दिन भी जारी रहा.

11 सूत्रीय मांगों को लेकर जिले के आधा दर्जन से अधिक गांवों में यह आंदोलन चल रहा है. जिले के कुचामन क्षेत्र के राणासर, डीडवाना के नुवां, तोषिणा, कालवा, पांडोलाई और मकराना के बोरावड़ व कुपड़ास गांव में आंदोलन व भूख हड़ताल चल रही है. इन गांवों में दर्जनों महिलाएं व युवा भुख हड़ताल कर रहे हैं. राणासर में करीब 20 और नुवां में भी करीब 20 लोग भूख हड़ताल पर हैं.

प्रशासन गंभीर नहीं
तोषिणा, कालवा, पांडोलाई, बोरावड़, कुपड़ास में भी एक-एक दर्जन से अधिक दलित महिलाएं व युवा आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे हैं. भूख हड़ताल पर बैठने वालों में महिलाओंं की संख्या अधिक है. लगातार 13 दिन से भूख हड़ताल पर होने के चलते अब महिलाओं की तबीयत खराब हो रही है. इतने दिनों से जारी आंदोलन को जिला प्रशासन ने अब तक गंभीरता से नहीं लिया.
महिलाओं की तबीयत बिगड़ी


राणासर में रविवार को तीन महिलाओं की तबीयत अधिक खराब हो गई तो प्रशासन चेता और तीनों को कुचामन के राजकीय अस्पताल लाकर उपचार शुरू करवाया. वहीं नुवां व तोषिणा में भी तबीयत खराब होने पर महिलाओं का मौके पर और बाद में अस्पताल ले जाकर इलाज कराया गया.
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