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Rajasthan By Election Result 2019: राजस्थान इलेक्शन रिजल्ट २०१९, विधानसभा खींवसर उनचुनाव परिणाम - नारायण बेनीवाल की जीत के 5 कारण

Rajasthan By Election Result 2019 Live Updates: राजस्थान खींवसर विधानसभा उपचुनाव परिणाम २०१९ लाइव (Vidhan Sabha Chunav Parinam) - राजस्थान के इलेक्शन रिजल्ट. Assembly By Election Results 2019, Rajasthan Winning candidate Narayan beniwal.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 25, 2019, 9:33 AM IST
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नागौर. राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में खींवसर विधानसभा में जीत का परचम फहराने वाले हनुमान बेनीवाल ने 10 महीने बाद इसी सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों से गुरुवार को एक बार फिर अपनी साख और क्षेत्र में पकड़ साबित कर दी. हनुमान बेनीवाल ने अपने दम पर छोटे भाई नारायण बेनीवाल के सिर जीत का सेहरा बांधते हुए खींवसर कुर्सी पर अपनी जगह काबिज कर दिया है. यूं तो खींवसर से आरएलपी के नारायण बेनीवाल और कांग्रेस के हरेंद्र मिर्धा में बीच कड़ा मुकाबला रहा लेकिन नतीजों की घोषणा हुई तो बेनीवाल ने अपने प्रतिद्वंदी मिर्धा (Harendra mirdha) को 4570 वोटों से पीछे छोड़ दिया. मतगणना के पहले 6 राउंड में हरेंद्र मिर्धा ने बढ़त बना रखी थी जिसके चलते कांग्रेस खेमे में खुशी का माहौल नजर आ रहा था. हालांकि ये खुशी का माहौल ज्यादा देर तक नहीं रहा और 7वें राउंड के बाद नारायण बेनीवाल ने बढ़त बनानी शुरू की जो मतगणना पूरी होने तक कायम रही. यहां पढ़ें- नागौर के खींवसर में RLP के नारायण बेनीवाल की जीत के 5 कारण...
1. हनुमान बेनीवाल की साख, वर्तमान सांसद के रूप में सक्रिय
खींवसर विधानसभा सीट को हनुमान बेनीवाल का गढ़ कहा जाता है. दरअसल यहां से बेनीवाल अब तक तीन बार विधायक रह चुके हैं. एक बार निर्दलीय, एक बार बीजेपी के टिकट से और पिछली बार अपनी पार्टी (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी) के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. पूरे इलाके में लगभग 15 सालों से बेनीवाल सक्रिय रहे हैं और बेनीवाल की इसी साख के असर नारायण बेनीवाल के चुनाव में भी देखने को मिला.
2. चालीस साल पुरानी सियासी लड़ाई का इतिहास
मूंडवा में 1980 में बेनीवाल के पिता रामदेव को हरेंद्र मिर्धा ने हराया था. 1985 में रामदेव ने मिर्धा को हराया था. 2008 में मूंडवा और नागौर से ही खींवसर सीट बनी तो ये 20 साल पुरानी सियासी लड़ाई फिर शुरू हो गई. अब रामदेव के बेटे नारायण और मिर्धा के बीच मुकाबला था. चुनावी मुद्दा भले ही कुछ खास न हों लेकिन इन परिवारों की बीच की सियासी जंग में बेनीवाल परिवार को जनता का साथ मिला.
3. विधायक भाई का सारा काम संभालते थे नारायण, लोगों से कनेक्ट थे
नागौर के खींवसर इलाके में पिछले 10 साल से नारायण ही विधायक हनुमान बेनीवाल का काम संभालते आ रहे थे. इसके चलते ग्रामीण इलाकों में नारायण की अच्छी पकड़ बनी और पब्लिक कनेक्ट रहने का फायदा इस चुनाव में भी मिला.


4. साफ-सुथरी और सॉफ्ट इमेज
सांसद हनुमान बेनीवाल अपने अखड़ स्वभाव से जाने जाते हैं लेकिन उनके भाई नारायण की पब्लिक में सॉफ्ट इमेज रही है. जाट नेता के रूप में बड़े भाई अखड़ और छोटे भाई की साफ-सुथरी छवि का फायदा 36 कोम  के समर्थन से मिला.
5. बीजेपी का साथ, बड़े नेताओं द्वारा प्रचार
हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी से किए गठबंधन को  उपचुनाव में भी जारी रखा. इसके चलते नारायण बेनीवाल के चुनाव प्रचार में बीजेपी के दिग्गज नेता शामिल हुए और नारायण को वोट देने की उनकी अपील पर बीजेपी वोट भी आरएलपी को गए.


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