नागौर में क्या अपनी राजनीतिक विरासत को बचा पाएंगी ज्योति मिर्धा ?
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नागौर में क्या अपनी राजनीतिक विरासत को बचा पाएंगी ज्योति मिर्धा ?
ज्योति मिर्धा। फाइल फोटो।

प्रदेश में जाट राजनीति के सबसे अहम केन्द्र रहे नागौर में एनडीए प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल को चुनौती देने वाली डॉ. ज्योति मिर्धा कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे नाथूराम मिर्धा की पौत्री है.

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प्रदेश में जाट राजनीति के सबसे अहम केन्द्र रहे नागौर में एनडीए प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल को चुनौती देने वाली  ज्योति मिर्धा कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे नाथूराम मिर्धा की पौत्री हैं. दादा की राजनीतिक विरासत को संभाल रही ज्योति मिर्धा ने इस बार लगातार तीसरी बार लोकसभा का चुनाव लड़ा है. वे इससे पहले नागौर क्षेत्र का लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. यहां इस बार मतदान में 2.23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

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पंचायतीराज की स्थापना के लिए देशभर में पहचान रखने वाला नागौर प्रदेश में जाट राजनीति की धुरी रहा है. यहां ज्योति मिर्धा के दादा नाथूराम मिर्धा का जबर्दस्त दबदबा रहा है. नाथूराम नागौर से छह बार सांसद रह चुके हैं. मिर्धा की पौत्री ज्योति ने बचपन से ही घर में राजनीतिक माहौल को देखा है. राजनीति उनके लिए कोई नया फील्ड नहीं है. लेकिन ज्योति ने प्रत्यक्ष तौर पर वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की. पहली बार में नागौर की जनता ने ज्योति को चुनकर लोकसभा में भेजा.



ज्योति मिर्धा। फाइल फोटो।

गत चुनाव में ढह गया था गढ़
उसके बाद गत चुनाव में कांग्रेस का सशक्त गढ़ माना जाने वाला नागौर भी मोदी लहर में चपेट में आकर ढह गया. इस चुनाव में ज्योति मिर्धा 75,218 मतों से बीजेपी के सीआर चौधरी से चुनाव हार गई थी. इस बार लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण के समय फिर से ज्योति मिर्धा को उम्मीदवार बनाए जाने पर पार्टी में विरोध के स्वर मुखर हुए थे. लेकिन मिर्धा परिवार के कांग्रेस में दबदबे के चलते आखिरकार पार्टी ने ज्योति के नाम पर ही मुहर लगाई.

ज्योति मिर्धा एवं पीसीसी चीफ सचिन पायलट। फोटो एफबी।


बेनीवाल से हुआ है ज्योति का मुकाबला
इस बार ज्योति का मुकाबला राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक एवं खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल से हुआ है. बीजेपी ने बमुश्किल हाथ आई नागौर सीट पर कब्जा बरकरार रखने के लिए यहां बेनीवाल की पार्टी से गठबंधन कर रखा है. बेनीवाल यहां एनडीए के प्रत्याशी के तौर चुनाव मैदान में डटे हुए हैं.

ज्योति का नागौर नहीं रहना कचोटता है मतदाताओं को
ज्योति की शादी हरियाणा में हुई है. वे अधिकतर वहीं रहती हैं. यही बात यहां के मतदाताओं को कचोटती रहती है. प्रतिद्वंदी पार्टी ने इसे चुनाव में मुद्दा बनाने की भी कोशिश की है. गत बार मोदी लहर में कांग्रेस के हाथ से छीन चुकी इस सीट पर क्या ज्योति वापस जीत की इबारत लिख पाएगी या नहीं इसका खुलासा तो 23 मई को ही होगा.

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