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Rajasthan: भीड़ ने युवक को पकड़कर पीटा, बाल काटे, वीडियो वायरल हुआ तो आहत पीड़ित ने दी जान

इस मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया है. आयोग ने बीकानेर कलेक्टर और एसपी से पूरी तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है. (सांकेतिक तस्वीर)

इस मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया है. आयोग ने बीकानेर कलेक्टर और एसपी से पूरी तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है. (सांकेतिक तस्वीर)

Rajasthan Crime News: नागौर जिले के एक युवक की बीकानेर जिले के एक गांव में भीड़ ने पिटाई कर दी. यही नहीं भीड़ ने उसके बाल काट दिये और उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया. इससे आहत युवक ने सुसाइड कर लिया.

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नागौर. नागौर जिले के श्रीबालाजी थाना इलाके में बदसलूकी का वीडियो  वायरल (Video Viral) होने से आहत एक युवक ने कुंड में कूदकर जान (suicide) दे दी. इस युवक की दो दिन पहले बीकानेर जिले के नोखा इलाके के एक गांव में भीड़ ने पिटाई कर दी थी. बाद में उसके बाल काट दिये थे. ग्रामीणों ने इसके वीडियो बना लिये. उन वीडियो को सोशल मीडिया में वायरल कर दिया गया. इससे आहत होकर युवक ने अपने घर के सामने बने कुंड में कूदकर आत्महत्या कर ली. आरोप है कि युवक चोरी की नीयत से एक घर में घुस गया था. उसके कारण ग्रामीणों ने युवक को पकड़कर उसके बाल काट दिये थे. पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है.

जानकारी के अनुसार इस घटना का शिकार हुआ युवक ओमप्रकाश श्रीबालाजी थाना क्षेत्र के कालड़ी गांव का रहने वाला था. वह रविवार को बीकानेर जिले के नोखा के धावा गांव गया था. वहां कुछ लोगों ने पकड़कर उसकी पिटाई कर दी और बाल काट दिये. युवक के साथ मारपीट करने वाले लोगों का आरोप था कि वह किसी के घर में घुस गया था. सोमवार को इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पीड़ित युवक ने कुंड में कूदकर सुसाइड कर कर लिया. परिजनों ने युवक के शव को कुंड से निकालकर कल ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया.

मानवाधिकार आयोग लिया स्वप्रेरित प्रसंज्ञान
दूसरी तरफ वायरल वीडियो और पीड़ित युवक की आत्महत्या की खबर के बाद श्रीबालाजी थाना पुलिस उसके गांव पहुंची और मामले की जानकारी ली. इस मामले में पुलिस ने स्वप्रेरणा से मामला दर्ज कर जांच शुरू की है. वहीं इस मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया है. आयोग ने बीकानेर कलेक्टर और एसपी को निर्देश दिये हैं वे एक सप्ताह के भीतर इसकी तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करें. आयोग अध्यक्ष जस्टिस गोपाल कृष्ण व्यास ने इस मामले में टिप्पणी करते हुये कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का अधिकार है. इस प्रकार की घटना मानव अधिकारों का खुला हनन है. किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है.

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