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नागौर के JLN अस्पताल में लड़खड़ा सकती है चिकित्सा व्यवस्था

फोटो-(ईटीवी)

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अजमेर और अलवर में लोकसभा उपचुनाव को लेकर चिकित्सा विभाग द्वारा किए गए डॉक्टरों के स्थानांतरण से नागौर के जिला अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था लडख़ड़ा सकती है

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अजमेर और अलवर में लोकसभा उपचुनाव को लेकर चिकित्सा विभाग द्वारा किए गए डॉक्टरों के स्थानांतरण से नागौर के जिला अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था लडख़ड़ा सकती है.

जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल पहले से ही डॉक्टरों की कमी है और सरकार ने उपचुनाव को लेकर जेएलएन से दो सहित जिले से 12 डॉक्टरों का स्थानांतरण अजमेर जिले में कर दिया है.

डॉक्टर सुरेन्द्र भाकल का स्थानांतरण होने से जेएलएन अस्पताल में अब एक ही फिजिशियन ही रह जाएगा, जबकि डॉक्टर जेपी टाक के स्थानांतरण से नाक-कान व गला रोग का कोई भी विशेषज्ञ जिला अस्पताल में नहीं रह जाएगा. ऐसे में मेडिकल कॉलेज का ख्वाब देखने वाले नागौर वासियों को छोटी-मोटी बीमारियों के लिए या तो निजी अस्पतालों में जाना पड़ेगा या फिर दूसरे शहरों का रुख करना पड़ेगा.



डॉक्टरों के स्थानांतरण से होने वाली परेशानी को देखते हुए शहरवासियों ने शनिवार को कलेक्टर को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर डॉक्टर भाकल का तबादला निरस्त करने की मांग कर चुके हैं.
जेएलएन अस्पताल से फिजिशयन डॉ. भाकल का स्थानांतरण अजमेर के लूलवा अस्पताल में होने से यहां कई चिकित्सा व्यवस्थाएं ठप हो जाएंगी. इन दिनों मौसमी बीमारियों का सीजन होने के कारण प्रतिदिन करीब एक हजार से अधिक का आउटडोर एवं 60 से 70 का इनडोर रहता है. इनमें से फिजिशियन डॉ. भाकल एवं डॉ. एसएस कालवी 300 से अधिक मरीज प्रतिदिन देखते हैं और वार्ड का राउंड भी करते हैं.

मरीजों के परिजन भी चाहते हैं कि जेएलएन अस्पताल के दोनों डॉक्टरों का तबादला नहीं हो. दोनों ही डॉक्टरों के कार्य से मरीज और परिजन भी संतुष्ट हैं. आकला ग्राम के रामूराम सियाग ने कहा कि वह अपनी पत्नी को गंभीर बीमार होने पर नागौर लेकर आए. यहां डॉ. सुरेंद्र भाकल ने इलाज किया और राहत पहुंचाई. रामूराम की मानें तो इलाज के साथ-साथ डॉक्टर का व्यवहार भी अच्छा है.

वहीं बासनी निवासी मोहम्मद इकबाल ने कहा कि दोनों ही डॉक्टर समय पर अस्पताल पहुंचते हैं और इलाज करते हैं. तबादला होने से चिकित्सा सेवा प्रभावित होगी.

जेएलएन अस्पताल में बने सीसीयू वार्ड में आने वाले गंभीर रोगियों को जीवन रक्षा (स्ट्रेप्टोकाइनेन इंजेक्शन) लगाने व धड़कन असंतुलित होने पर डीसी सोक लगाकर मरीजों का उपचार भी डॉ. सुरेंद्र भाकल द्वारा किया जा रहा है.

अस्पताल में प्रत्येक बुधवार को लगने वाले एनसीडी शिविर में (कैंसर, डायबिटीज व बीपी) के मरीजों की जांच व उपचार की जिम्मेदारी भी डॉ. भाकल को ही सौंपी हुई है. वहीं डायलिसिस की मशीनें भी नागौर के जेएलएन अस्पताल में आ चुकी है. अभी डायलिसिस सेवा शुरू करने के प्रयास शुरू ही हुए हैं और इससे पहले ही स्पेशलिस्ट फिजिशियन का तबादला हो चुका है.

इधर, ईएनटी के डॉ. टाक के स्थानानंतरण से जिला अस्पताल में नाक, कान व गला रोग के मरीजों को उपचार नहीं मिल सकेगा. ऐसे में मरीजों को या तो दूसरे जिलों में जाना पड़ेगा या फिर निजी अस्पताल में मोटी रकम खर्च करके इलाज करवाना होगा.
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