Nagaur: कोराना संकट काल, 165 लोगों का 1 संयुक्त परिवार, ऐसे कर रहा है मुकाबला

लॉकडाउन को देखते हुए परिवार ने 3 क्विंटल सांगरी तोड़कर एकत्र कर ली और सालभर की बड़ियां बनाकर रख ली ताकि एक साल तक साग सब्जी की दिक्क्त का सामना नहीं करना पड़े.
लॉकडाउन को देखते हुए परिवार ने 3 क्विंटल सांगरी तोड़कर एकत्र कर ली और सालभर की बड़ियां बनाकर रख ली ताकि एक साल तक साग सब्जी की दिक्क्त का सामना नहीं करना पड़े.

वैश्विक महामारी कोरोना (covid-19) से आज पूरी दुनिया मुकाबला करने में जुटी है. कोराना वायरस से बचाव के लिए लोग लॉकडाउन (Lockdown) में एकाकी जीवन जीने के लिए मजबूर हो रहे हैं. कई जगह लोग छोटी-छोटी चीजों के लिए तरस रहे हैं. सहायता की उम्मीदें लगाए बैंठे हैं.

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नागौर. वैश्विक महामारी कोरोना (covid-19) से आज पूरी दुनिया मुकाबला करने में जुटी है. कोराना वायरस से बचाव के लिए लोग लॉकडाउन (Lockdown) में एकाकी जीवन जीने के लिए मजबूर हो रहे हैं. कई जगह लोग छोटी-छोटी चीजों के लिए तरस रहे हैं. सहायता की उम्मीदें लगाए बैंठे हैं. लेकिन इन सबके बीच राजस्थान के नागौर जिले की दो गांवों के दो संयुक्त परिवारों की कहानियां अन्य लोगों के लिए इस समय प्रेरणा बन रही. ये परिवार बड़ी मजबूती से संकट का सामना कर रहे हैं और सामाजिक सरोकार भी निभा रहे हैं.

पांचौड़ी गांव में है यह प्रजापत परिवार
दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के नागौर जिले के पांचौड़ी गांव के प्रजापत परिवार में 5 पीढ़ियों के 165 लोग एक साथ रहते हैं. सभी का खाना साथ ही बनता है. इनके 32 दोहिते-दोहितियां अलग हैं. परिवार के मुखिया सुरजाराम का तीन साल पहले 105 साल की उम्र में निधन हो गया था. परिवार में जब सदस्य बढ़ गए तो इन्होंने खेत में ही 3 और मकान बना लिए. छह भाइयों के पास 40 बीघा जमीन है. सूरजाराम प्रजापत के छह बेटे हैं. अब परिवार में सभी छोटे-बड़े निर्णय सुरजाराम के बड़े बेटे दुर्गाराम लेते हैं. हाल ही में लॉकडाउन को देखते हुए परिवार ने 3 क्विंटल सांगरी तोड़कर एकत्र कर ली और सालभर की बड़ियां बनाकर रख ली ताकि एक साल तक साग सब्जी की दिक्क्त का सामना नहीं करना पड़े. परिवार के अधिकांश लोग मजूदरी करते हैं.

रेण में भी है 54 सदस्यों वाला संयुक्त परिवार
वहीं इसी जिले का एक और गांव है रेण. वहां भी एक ऐसा परिवार है जो खुद संयुक्त रूप से रहते हुए संकट की इस घड़ी में गांव के लोगों के लिए मास्क बनाने में जुटा हैं. रेण गांव के इस परिवार में 54 सदस्य हैं. 6 भाइयों के इस बड़े परिवार की मुखिया 84 साल की केसर देवी गोयल है. केसर देवी बताती है कि उनके 6 बेटे, 10 पोते और 6 पड़पोतों का कुनबा आज भी एक ही छत के नीचे रहता है. गांव का यह गोयल परिवार संयुक्त रूप से कोरोना संक्रमण की लड़ाई भी लड़ रहा है. परिवार के लोग गांव को कोरोना मुक्त रखने मास्क बनाने में जुटे हैं. ये लोग घर पर मास्क और सेनेटाइजर बनाकर गांव में बांट रहे हैं.



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