Assembly Banner 2021

Rajasthan News: किसान आंदोलन में दरार! RLP नेता बेनीवाल ने राकेश टिकैत को करार दिया 'बाहरी'

 आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल ने किसान नेता राकेश टिकैत पर साधा निशाना है.

आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल ने किसान नेता राकेश टिकैत पर साधा निशाना है.

Kisan Andolan News: केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को लेकर आंदोलन चल रहा है. इसको लेकर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) इन दिनों राजस्‍थान में रैली कर रहे हैं. हालांकि उन्‍हें राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने बाहरी करार दिया है.

  • Share this:
नागौर. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) की रैलियां करा रहे वामपंथी नेताओं पर भी निशाना साधा है. उन्‍होंने कहा कि बाहरी नेताओं से राजस्थान में वामपंथी दल सियासी जमीन तैयार नहीं कर पाएंगे. बेनीवाल ने टिकैत पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बाहरी नेता राजस्थान में किसानों की भीड़ नहीं जुटा सकता. इसके अलावा उन्‍होंने कहा कि टिकैत की आज की नागौर की रैली में मुठ्ठीभर लोग पहुंचे. अगर टिकैत लोकप्रिय होते तो किसानों की भारी भीड़ होती.

बता दें कि नागौर हनुमान बेनीवाल का सियासी किला है और वह वहां से सासंद हैं. इसके अलावा बेनीवाल की पार्टी आरएलपी के दो विधायक नागौर जिले से हैं. यही नहीं, बेनीवाल एनडीए का साथ
छोड़ कर किसान आंदोलन में कूदे थे, लेकिन टिकैत की नागौर में किसान रैली से खुद को किनारे किए जाने से वह गुस्साए हुए हैं.

यह बेनीवाल के गुस्‍से की वजह
हनुमान बेनीवाल की गुस्से की वजह सिर्फ नागौर में किसान रैली ही नहीं है बल्कि राकेश टिकैत पिछले 10 दिन से राजस्थान के जाट बहुल जिलों में धुंआंधार किसान रैलियां कर रहे हैं. बेनीवाल और राजस्थान के जाट नेता इसे राकेश टिकैत की जाट बैंक पर नजर मान रहे हैं. जबकि हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी का सबसे बड़ा आधार ही जाट वोट बैंक है और पश्चिम राजस्थान में जाट बहुल इलाकों में ही उनकी पार्टी की ताकत है. यही नहीं, हनुमान बेनीवाल को आशंका है कि किसान रैलियों के सहारे वामपंथी दल और राकेश टिकैत उनकी सियासी जमीन हथियाने की कोशिश कर रहे हैं. जबकि यही आंशका किसान आंदोलन का साथ दे रहे कांग्रेस के नेताओं को भी है.



फिर दम दिखाने की जुगत में वामपंथी दल
दरअसल सीकर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चुरु और झुंझुनू में एक दशक पहले वामपंथी दलों का अच्छा खास प्रभाव था. श्रीगंगानर का घड़साना, अनूपगढ, रायसिंह नगर सीकर की धोद विधानसभा क्षेत्र में वामंथी दलों से विधायक रह चुके हैं. राकेश टिकैत की किसान रैलियो में वामदल दल के नेता अमरा राम भी साथ नजर आ रहे हैं. नागौर की आज की किसान रैली में तो भीम आर्मी के चंद्रशेखर
रावण भी थे. दरअसल नागौर में जाट और मुस्लिम के बाद तीसरा सबसे बड़ा वोट बैंक दलित है.
राजस्थान में सियासत के जानकार इसे राजनीतिक प्रयोग मान रहे हैं. इसी वजह से राकेश टिकैत की किसान रैलियों पर राजनीतिक दलों की पैनी नजर है.

बता दें कि शुरुआत में हनुमान बेनीवाल किसान आंदोलन के समर्थन में नहीं थे, क्‍योंकि वह एनडीए का हिस्सा था, लेकिन जैसे ही आंदोलन जोर पकड़ने लगा और बेनीवाल को लगा उनका कोर वोट बैंक खिसक सकता है, वह एनडीए छोड़ शाहजहांपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन में जा पहुंचे. हालांकि वह अपनी पार्टी के अलग झंडे के साथ पहुंचे थे. इस दौरान उन्‍होंने शाहजहांपुर बॉर्डर पर पहले से धरने पर बैठे वामपंथी संगठनों और राजस्थान जाट महासभा से दूरी बनाए रखी. बेनीवाल का मकसद आंदोलन
के जरिये अपने कोर जाट वोट बैंक को बचाए रखना था, लेकिन अब उनको इस आंदोलन के नेताओं से सेंधमारी का खतरा नजर आ रहा है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज