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पक्षियों की कब्रगाह बनी सांभर झील, जांच के लिए कोयंबटूर भेजे जाएंगे मृत पक्षियों के सैंपल

Mahendra Bishnoi | News18 Rajasthan
Updated: November 18, 2019, 6:55 PM IST
पक्षियों की कब्रगाह बनी सांभर झील, जांच के लिए कोयंबटूर भेजे जाएंगे मृत पक्षियों के सैंपल
सांभर झील में अब तक 16000 से ज्यादा पक्षियों की मौत हो चुकी है.

सांभर झील (Sambhar Lake) में मौत (Birds Deaths) होने की जानकारी मिलने के बाद सलीम अली सेंटर फॉर ओरनिथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री के डॉ. मुरलीधरन सांभर झील में पक्षियों के मरने वाले स्थान रतन तालाब (Ratan Pond) एवं झपोक डैम (Jhapok Dam) पर पहुंचे.उन्होंने बताया कि जांच के लिए सैंपल कोयंबटूर (Koyambatoor) लेकर जाएंगे.

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नागौर. राजस्थान के सांभर झील (Sambhar Lake) में देशी-विदेशी पक्षियों की मौत (Birds Deaths) का मामला सामने आने के बाद से प्रशासन चौकन्ना हो गया. प्रशासन, सांभर झील में से हर रोज बीमार और मृत पक्षियों को निकलवा रहा है. इसके तहत अब नागौर जिले के हिस्से में आने वाले झील में मोहनपुरा, खाखड़की रोड, शाकम्भर माता का मंदिर, गुढ़ासाल्ट, जाब्दीनगर सहित नावां के आस-पास में स्थित झील के हिस्से में एसडीआरएफ एवं सिविल डिफेंस एवं नगर पालिका नावां की टीम ने रविवार तक 34 बीमार और 5309 मृत पक्षियों को झील से बाहर निकाला है. सोमवार को भी लगातार मृत पक्षियों को निकालने का सिलसिला जारी है. सांभर झील में अब तक 16,500 से ज्यादा पक्षियों की मौत हो चुकी है.

सैंपल कोयंबटूर भेजे जाएंगे

देशी एवं विदेशी पक्षियों की भारी तादाद में सांभर झील में मौत होने की जानकारी मिलने के बाद सलीम अली सेंटर फॉर आर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री (Salim Ali Centre for Ornithology and Natural History) के डॉ. मुरलीधरन सांभर झील में पक्षियों के मरने वाले स्थान रतन तालाब एवं झपोक डैम पर पहुंचे. उन्होंंने भी यहां पक्षियों की मौत के कारणों को जानने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि जांच के लिए यह भी सैंपल कोयंबटूर लेकर जाएंगे.

Sambhar Lake
सलीम अली सेंटर फॉर आॅरनिथोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर के डॉ. मुरलीधरन सांभर झील में पक्षियों के मरने वाले स्थान रतन तालाब एवं झपोक डैम पर पहुंचे.


झील में से मृत पक्षियों को निकाल कर नावां में दफनाया जा रहा है 

बीमार पक्षियों को इलाज के लिए रेस्क्यू कैंप नावां के राजकीय पशु चिकित्सालय में ले जाया जा रहा है. झील में से मृत पक्षियों को निकाल कर दफनाया जा रहा है. नावां में रविवार को एकाएक चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन सहित कई बड़े अफसर और एक्सपर्ट ने मौका मुआयना किया. सोमवार को भी जिले के वन विभाग के अधिकारी मुआयना करने में जुटे रहे.

मौके पर चिकित्सा दल में 36 सदस्य, सिविल डिफेंस के 61 सदस्य मौजूदपक्षियों की मौत के बाद उन्हें दफनाने का घटनाक्रम सात दिन से लगातार जेसीबी चलाकर किया जा रहा है. हजारों पक्षियों को कब्र में दफनाया जा चुका है. कई पक्षियों की लाश सड़ने लगी और उसमें कीड़े लग गए. इसके बावजूद उन्हें पानी से निकाला नहीं गया, जिसके चलते दूसरे पक्षियों की भी सेहत बिगड़ी. नावां के सांभर झील में पक्षियों के मरने वाली जगहों पर चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन अरिंदम तोमर व श्रेया गुहा, प्रमुख सचिव, वन-पर्यावरण, उप जिला कलेक्टर, उपखण्ड अधिकारी, वन विभाग के उच्च अधिकारी, पशुपालन विभाग के उच्च अधिकारी मौके पर आ चुके हैं. यहां मौके पर चिकित्सा दल में 36 सदस्य, सिविल डिफेंस के 61 सदस्य सहित टीमें काम में जुटी हुई हैं.

सांभर सॉल्ट की प्रयोगशाला में गुणवत्ता की जांच की जा रही है

सांभर सॉल्ट के कर्मचारी का कहना है कि सांभर साल्ट की प्रयोग शाला में केवल नमक से उत्पादन एवं नमक की गुणवत्ता की ही जांच की जा सकती है. पानी दूषित या संक्रमित हुआ है, इसकी जांच यहां की प्रयोगशाला में संभव नहीं है. पशु चिकित्सक लेखराज चौधरी ने बताया कि सांभर झील में घायल पक्षियों को रेस्क्यू करके लाया जा रहा है. इन्हें विभाग की ओर से एंटीबायोटिक, एन्टीहिस्टेमेनिक के साथ साथ नरवाइनटोनिक दिया जा रहा है. वहीं आवश्यकता अनुसार पक्षियों की ड्रेसिंग भी की जा रही है.

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First published: November 18, 2019, 6:16 PM IST
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