निजी शिक्षण संस्थान के मालिकों ने प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार को चेताया, मांगों को लेकर दी आंदोलन की धमकी

प्रेस वार्ता कर अपनी समस्याओं को रखते निजी शिक्षण संस्थान के संचालक.
प्रेस वार्ता कर अपनी समस्याओं को रखते निजी शिक्षण संस्थान के संचालक.

बाड़मेर (Barmer) के प्राइवेट स्कूल (Private school) संचालकों और मालिकों ने प्रेस वार्ता कर अपनी मांगों को सरकार के सामने रखा. उन्होंने मांगों के पूरा नहीं होने पर आंदोलन (Protest) करने की चेतावनी भी दी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 6, 2020, 5:46 PM IST
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बाड़मेर. कोरोना (Corona) संकट ने प्रदेश समेत देश भर के प्रत्येक क्षेत्र को काफी प्रभावित किया है. हालात यह हैं कि दिनों-दिनों बेरोजगारी (Unemployment) और महंगाई (Inflation) बढ़ती जा रही है. लोगों को आर्थिक संकट (Economic Crisis) से जूझना पड़ रह है. ऐसी ही स्थिति के दौर से गुजर रहे बाड़मेर (Barmer) के निजी शिक्षण संस्थानों के मालिकों ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता कर सरकार के सामने अपना पीड़ा व्यक्त की है.

शैक्षणिक संस्थानों के मालिकों का कहना है कि कोरोना काल के अब तक 8 महीने गुजर चुके हैं. सभी प्रकार के प्रतिष्ठान, मंदिर, पार्क, शॉपिंग मॉल समेत शराब के ठेके तक खोले जा चुके हैं, लेकिन सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थान अभी भी बंद हैं. यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. ऐसा करना शिक्षण के पेश से जुड़े लाखों लोगों के साथ कुठाराघात है. निजी शिक्षण संस्थान संगठन बाड़मेर के जिलाध्यक्ष बाल सिंह राठौड़ ने बताया कि कोचिंग, सरकारी एवं निजी स्कूलों के बंद होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है.

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वहीं ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों में मानसिक तनाव की स्थितियां भी पैदा हो रही हैं. ऐसे में सरकार को आगे आना चाहिए और मेडिकल एडवाइजरी की पालना के साथ सरकारी एवं गैर सरकारी निजी संस्थाओं को खोलने की अनुमति देनी चाहिए, ताकि आर्थिक संकट से जूझ रहे निजी शिक्षण संस्थान के शिक्षकों, संस्थान संचालकों, बाल वाहिनी संचालनकर्ताओं, सफाईकर्मियों के साथ प्रत्येक वर्ग को राहत मिल सके.
निजी शिक्षण संस्थानों ने रखीं ये मांगें
निजी शिक्षण संस्थानों ने अपनी प्रमुख मांगों में निजी शिक्षण संस्थानों को आर्थिक पैकेज दिलाने, राज्य सरकार द्वारा जारी फीस निर्धारण आदेश को वापस लेने, आरटीई के विद्यार्थियों के भरण पोषण राशि का भुगतान करने, स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया के लिए निजी ऑनलाइन पोर्टल खेलने, सरकारी स्कूलों की तर्ज पर निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी विद्यार्थी कल्याण योजनाओं का फायदा दिलाने, भवन सुरक्षा प्रमाण पत्र के नाम पर निजी शिक्षण संस्थानों से की जा रही वसूली आदेश को वापस लेने, मदरसा बोर्ड की तर्ज पर निजी शिक्षण संस्थानों का बोर्ड गठित कर जिला मुख्यालय पर वरिष्ठ उप जिला शिक्षा अधिकारी निजी शिक्षा का पद सृजित करने की मांग की है.
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